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स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में कोरोना वैक्सीन की कमी
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शहर के नागरिक अस्पताल में कोरोना वैक्सीन की कमी हो गई है, यह बात हम नहीं बल्कि नागरिक अस्पताल में वैक्सीनेशन करवाने आ रहे लोग कह रहे हैं। वीरवार को वैक्सीन लगवाने आए लोगों को ट्रामा सेंटर के मुख्य गेट से ही वापस भेजे जाने का सिलसिला दिन भर जारी रहा। किसी भी व्यक्ति को वैक्सीन की पहली ही डोज उपलब्ध नहीं हुई। यही हाल अंबाला के अन्य सरकारी अस्पतालों (पोली क्लीनिक और शहर के नागरिक अस्पताल) में रहा। जहां से वैक्सीन लगवाने वालों को निराशा हाथ लगी।
इस दौरान अमर उजाला की टीम ने लौट रहे लोगों से मायूसी का कारण पूछा तो लोगों का गुबार फूट पड़ा। लोगों ने बताया कि तीनों सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन का अकाल पड़ गया है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में रुपये लेकर वैक्सीनेशन की जा रही है। जिसका सीधा असर जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि जिस परिवार के घर में पांच लोगों को वैक्सीन लगनी है वो कहां से देंगे। लोगों ने बताया कि हम यहां पहली डोज लगवाने के लिए आए थे, लेकिन यहां कहा जा रहा है कि अभी वैक्सीन की डोज खत्म है, आप दो-चार दिन बाद आकर पता कर लेना। इस दौरान लोगों ने मांग की है कि अस्पताल के बाहर सिटीजन चार्ट लगाना, चाहिए जिस पर दवाई की उपलब्धता दर्ज होनी चाहिए।
मैं दो दिन से नागरिक अस्पताल में वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहा हूं, लेकिन मुझे हर रोज यह कह कर वापस भेज दिया जाता है कि अभी वैक्सीन खत्म है। आज फिर वैक्सीन लगवाने आया हूं, अब भी कह रहे हैं कि अभी वैक्सीन नहीं आई दो दिन बाद पता करना। - संजीव
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तीन दिन से वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट कर वापस जा रहे हैं, आज चौथा दिन है और आज भी कह रहे हैं अभी वैक्सीन नहीं आई। बाहर से लगवा लेता लेकिन हमारी इतनी कमाई नहीं कि प्राइवेट में वैक्सीन लगवा सकें। मजबूरी है अब इंतजार करना ही बेहतर है। बाकी जो होना होगा वो तो हो कर ही रहेगा। - त्रिशला
कामकाज करने वाला दिहाड़ीदार आदमी हूूं, पिछले तीन दिन से ट्रामा सेंटर से एक ही जवाब मिल रहा है कि अभी वैक्सीन खत्म है। बाद में पता कर लेना, आज भी पता करने के लिए काम से छुट्टी लेकर आया था लेकिन अभी भी कह रहे हैं दो दिन बाद आना। - कर्मचंद।
अपनी जिम्मेदारी समझते हुए वैक्सीन लगवाने आए थे, लेकिन यहां वैक्सीन तो नहीं मिली हां झूठा आश्वासन जरूर देकर लौटा दिया कि आप तो लोकल हैं दो-चार दिन बाद आकर आराम से लगवा लेना। यही सिलसिला पिछले तीन दिनों से चलता आ रहा है।
- स्वर्ण सिंह।
सरकार ने पिछले दिनों लोगों को जागरूक करने के लिए टीका उत्सव मनाते हुए, अपनी पीठ थपथपाई। टीका उत्सव समाप्त होने के महज चार दिन बाद ही सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की पोल खुल गई है। जिसका जीता जागता सबूत वैक्सीन खत्म होना है। -अशोक धीमान
वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के लिए आए थे, लेकिन वैक्सीन काउंटर पर बैठा कर्मचारी कह रहा है कि मैडम अभी वैक्सीन खत्म है। सिर्फ को-वैक्सीन की कुुछ ही डोज बची हैं वह भी उन लोगों के लिए है जिन्हें दूसरी डोज लगनी है। -हरवीन कौर
सरकार का भी अजीब खेल चल रहा है। एक तरफ तो सरकार वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक कर रह है दूसरी ओर अस्पतालों में वैक्सीन की पहली डोज पर ही संकट झा गया है। ऐसे में आम नागरिक कहां जाए। विभाग को चाहिए कि ट्रामा सेंटर के बाहर सिटीजन बोर्ड लगवाए उस पर अधिकारियों के साथ-साथ लगने वाली डोज की स्थिति भी दर्शाए जिससे कि आम नागरिक को सहूलियत हो। - डेजी।
मैं सुबह से अपने बेटे को लेकर वैक्सीन लगवाने के लिए भटक रहा हूं, पॉली क्लीनिक गया वहां कहते हैं बड़े अस्पताल जाओ। छावनी गया तो वहां से शहर भेज दिया, यहां कह रहे हैं चार दिन बाद आना। मेरा सवाल स्वास्थ्य मंत्री और विभाग से यह है कि सरकारी अस्पताल में वैक्सीन मिल नहीं रही, जबकि प्राइवेट में मिल रही है। क्या हर आदमी के पास इतने संसाधन हैं कि वह प्राइवेट में जाकर वैक्सीन लगवा ले। - राम चंद।
वैक्सीन की कमी चल रही है, सुबह से एक गाड़ी कुरुक्षेत्र भेज रखी है। शाम तक दो हजार वैक्सीन आने की उम्मीद है। अब इसमें कितनी कोविशील्ड हैं, कितनी को-वैक्सीन इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
- डॉक्टर संगीता गोयल, नोडल अधिकारी, अंबाला।
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इस दौरान अमर उजाला की टीम ने लौट रहे लोगों से मायूसी का कारण पूछा तो लोगों का गुबार फूट पड़ा। लोगों ने बताया कि तीनों सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन का अकाल पड़ गया है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में रुपये लेकर वैक्सीनेशन की जा रही है। जिसका सीधा असर जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। लोगों ने कहा कि जिस परिवार के घर में पांच लोगों को वैक्सीन लगनी है वो कहां से देंगे। लोगों ने बताया कि हम यहां पहली डोज लगवाने के लिए आए थे, लेकिन यहां कहा जा रहा है कि अभी वैक्सीन की डोज खत्म है, आप दो-चार दिन बाद आकर पता कर लेना। इस दौरान लोगों ने मांग की है कि अस्पताल के बाहर सिटीजन चार्ट लगाना, चाहिए जिस पर दवाई की उपलब्धता दर्ज होनी चाहिए।
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मैं दो दिन से नागरिक अस्पताल में वैक्सीन लगवाने के लिए आ रहा हूं, लेकिन मुझे हर रोज यह कह कर वापस भेज दिया जाता है कि अभी वैक्सीन खत्म है। आज फिर वैक्सीन लगवाने आया हूं, अब भी कह रहे हैं कि अभी वैक्सीन नहीं आई दो दिन बाद पता करना। - संजीव
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तीन दिन से वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल के चक्कर काट कर वापस जा रहे हैं, आज चौथा दिन है और आज भी कह रहे हैं अभी वैक्सीन नहीं आई। बाहर से लगवा लेता लेकिन हमारी इतनी कमाई नहीं कि प्राइवेट में वैक्सीन लगवा सकें। मजबूरी है अब इंतजार करना ही बेहतर है। बाकी जो होना होगा वो तो हो कर ही रहेगा। - त्रिशला
कामकाज करने वाला दिहाड़ीदार आदमी हूूं, पिछले तीन दिन से ट्रामा सेंटर से एक ही जवाब मिल रहा है कि अभी वैक्सीन खत्म है। बाद में पता कर लेना, आज भी पता करने के लिए काम से छुट्टी लेकर आया था लेकिन अभी भी कह रहे हैं दो दिन बाद आना। - कर्मचंद।
अपनी जिम्मेदारी समझते हुए वैक्सीन लगवाने आए थे, लेकिन यहां वैक्सीन तो नहीं मिली हां झूठा आश्वासन जरूर देकर लौटा दिया कि आप तो लोकल हैं दो-चार दिन बाद आकर आराम से लगवा लेना। यही सिलसिला पिछले तीन दिनों से चलता आ रहा है।
- स्वर्ण सिंह।
सरकार ने पिछले दिनों लोगों को जागरूक करने के लिए टीका उत्सव मनाते हुए, अपनी पीठ थपथपाई। टीका उत्सव समाप्त होने के महज चार दिन बाद ही सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की पोल खुल गई है। जिसका जीता जागता सबूत वैक्सीन खत्म होना है। -अशोक धीमान
वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के लिए आए थे, लेकिन वैक्सीन काउंटर पर बैठा कर्मचारी कह रहा है कि मैडम अभी वैक्सीन खत्म है। सिर्फ को-वैक्सीन की कुुछ ही डोज बची हैं वह भी उन लोगों के लिए है जिन्हें दूसरी डोज लगनी है। -हरवीन कौर
सरकार का भी अजीब खेल चल रहा है। एक तरफ तो सरकार वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक कर रह है दूसरी ओर अस्पतालों में वैक्सीन की पहली डोज पर ही संकट झा गया है। ऐसे में आम नागरिक कहां जाए। विभाग को चाहिए कि ट्रामा सेंटर के बाहर सिटीजन बोर्ड लगवाए उस पर अधिकारियों के साथ-साथ लगने वाली डोज की स्थिति भी दर्शाए जिससे कि आम नागरिक को सहूलियत हो। - डेजी।
मैं सुबह से अपने बेटे को लेकर वैक्सीन लगवाने के लिए भटक रहा हूं, पॉली क्लीनिक गया वहां कहते हैं बड़े अस्पताल जाओ। छावनी गया तो वहां से शहर भेज दिया, यहां कह रहे हैं चार दिन बाद आना। मेरा सवाल स्वास्थ्य मंत्री और विभाग से यह है कि सरकारी अस्पताल में वैक्सीन मिल नहीं रही, जबकि प्राइवेट में मिल रही है। क्या हर आदमी के पास इतने संसाधन हैं कि वह प्राइवेट में जाकर वैक्सीन लगवा ले। - राम चंद।
वैक्सीन की कमी चल रही है, सुबह से एक गाड़ी कुरुक्षेत्र भेज रखी है। शाम तक दो हजार वैक्सीन आने की उम्मीद है। अब इसमें कितनी कोविशील्ड हैं, कितनी को-वैक्सीन इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
- डॉक्टर संगीता गोयल, नोडल अधिकारी, अंबाला।