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Ambala News: स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस वेंटिलेटर पर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2024 01:29 AM IST
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Health department's ambulance on ventilator
पीटीए एबुलेंस की तस्वीर। संवाद
सुखबीर सिंह
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अंबाला सिटी। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवा बेसहारा चल रही है। आलम ये है कि विभाग के कुल 27 एंबुलेंस हैं, जिसमें दो एंबुलेंस अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं वह भी वीआईपी ड्यूटी के चलते व्यस्त रहती हैं।
ऐसे में मरीजों को घटनास्थल से जिन एंबुलेंस की मदद से अस्पताल लाया जाता है उनमें सिर्फ ऑक्सीजन की ही सुविधा है। जबकि गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस की सुविधा होनी चाहिये। मसला यहीं पर समाप्त नहीं होता बल्कि करीब आठ एबुलेंस तो ऐसी हैं जो निर्धारित सीमा यानि तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। इसके बाद भी यह एंबुलेंस मरीजों को ला रही हैं। वहीं दो एंबुलेंस को विभाग की ओर से हाल ही में कंडम घोषित किया गया है। इसके साथ ही दो अन्य एंबुलेंस को भी कंडम घोषित करने की तैयारी की जा रही है।
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मुख्यालय से भी नहीं मिला जवाब
कई बार पत्र लिखने के बाद भी अभी तक विभाग के मुख्यालय की ओर से नई एंबुलेंस नहीं मिल सकी हैं। विभाग स्थानीय स्तर पर पत्राचार कर रहा है, मगर कोई जवाब देने वाला ही नहीं है। इधर पुरानी एंबुलेंस के रखरखाव के लिए विभाग प्रति माह हजारों रुपये खर्चा हो रहा है। पुरानी होने के कारण मरीजों को पीटीए एंबुलेंस में ही ट्रांसफर किया जाता है। इस एंबुलेंस में सिर्फ आक्सीजन की सुविधा ही मिल पाती है।
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रोजाना आती हैं 50 से 60 कॉल
एंबुलेंस के लिए रोजाना जिला अंबाला में 50 से 60 कॉल आती हैं, जबकि इन्हें संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती है। पुरानी होने के कारण एंबुलेंस कई बार रिपेयर के लिए जाती हैं। ऐसे में एक ही एंबुलेंस में दो- दो मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अंबाला में सबसे अधिक कॉल अंबाला छावनी और नारायणगढ़ से आती हैं। हाल ही में नारायणगढ़ और अंबाला छावनी अस्पताल में तैनात बीएलएस एंबुलेंस को कंडम घोषित किया गया है। सबसे अधिक मरीज यहीं से रेफर होते हैं।
बीएलएस को ही बनाया एएलएस
जिले में 27 एंबुलेंस हैं, इनमें से चार अंबाला सिटी, चार अंबाला छावनी और तीन नारायणगढ़ को दी गई है। इसके अलावा और सभी पीएचसी पर भी एक- एक एबुलेंस दी हुई हैं। किसान आंदोलन के चलते चार एंबुलेंस शंभू के लिए लगाई गई है। इधर वीआईपी कॉल के लिए दो बीएलएस एंबुलेंस में ही वेंटिलेटर लगाकर एएलएल का कार्य लिया जा रहा है। इन सभी में सात पेशेंट ट्रांसपोर्ट एंबुलेंस (पीटीए) ही सही हालत में हैं। इनमें सिर्फ ऑक्सीजन की सुविधा होती है। लेकिन इन्हें भी बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा विभाग के पास एक किलकारी और एक न्यूनेटन, दो वैन लैब शिविर के लिए मौजूद हैं। इनमें मरीजों को लेकर नहीं जाया जा सकता।

वर्जन
निदेशालय को एंबुलेंस की कमी के लिए लिखा है। फिलहाल बीएलएस में ही सभी उपकरण लगाकर उनसे एएलएस की सुविधा ली जा रही है। निदेशालय की ओर से जल्द ही नई एएलएस एंबुलेंस मिलने की उम्मीद है।
-डॉ. हितार्थ, नोडल अधिकारी, एंबुलेंस सेवा।

पीटीए एबुलेंस की तस्वीर। संवाद

पीटीए एबुलेंस की तस्वीर। संवाद

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