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विश्व एड्स दिवस पर विशेष: ...एड्स से डरे नहीं बल्कि लड़ रहे 391 मरीज
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जिले में एड्स के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन अब एड्स से लड़ने वाले मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा होने लगा है। लोगों ने इस बीमारी को छिपाने की बजाए इससे लड़ने की ठान ली है। अंबाला में पिछले तीन साल में कुल 391 एड्स के केस आ चुके है, इसमें 368 मरीज सामान्य है, जबकि 23 गर्भवती महिलाएं है। 2019 में अब तक कुल 138 मरीज अस्पताल में रजिस्टर किए गए हैं। इसमें से 135 मरीज सामान्य हैं जबकि 3 गर्भवती महिलाएं शामिल है। बता दें कि इन 391 मरीजों में 13 मरीज सेंट्रल जेल के भी शामिल हैं। सरकारी अस्पताल में इस बीमारी को नियंत्रण में रखने के लिए विशेष डॉक्टर, दवाईयां व टेस्ट तक उपलब्ध हैैं, जो कि मरीजों को निशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं। यहां तक कि मरीज के सेल्स चैक करने के लिए अब सीडीफोर काउंट टेस्ट भी हो रहा है और वायरल लोड टेस्ट भी अस्पताल में ही होगा। जिससे मरीज की सही स्थिति और प्रतिरोधक क्षमता को जांचा भी जा सकेगा।
एड्स से पीड़ित 15 महिलाओं ने जन्में स्वस्थ बच्चे
एड्स से लड़ते हुए अंबाला में 15 महिलाएं ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। डेढ़ साल में डीबीएस टेस्ट की रिपोर्ट के बाद यह खुलासा हुआ है। इस टेस्ट से साफ हो जाता है कि यह बच्चे एकदम स्वस्थ हैं। इनमें 7 मेल और 8 फीमेल बच्चे शामिल हैं। इनमें एक महिला ऐसी है जिसने गर्भधारण के समय खुद का टेस्ट तो करवाया लेकिन इलाज की प्रक्रिया पूरी नहीं की। घर पर ही डिलिवरी करवाई। इसलिए बच्चा मृत पैदा हुआ।
बच्चों को दिया जाता है विशेष ख्याल
गर्भवती महिलाओं में एड्स की पुष्टि होने के बाद जहां महिलाओं को विशेष ट्रीटमेंट दिया जाता है, वहीं बच्चे का भी विशेष ख्याल रखा जाता है। डॉक्टर ने बताया कि इसमें गर्भवती महिलाओं को डरने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि अधिकतर केस में बच्चे इस बीमारी से बच जाते हैं। साथ ही उनका टेस्ट कर इस बीमारी की जांच की जाती है।
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4500 रुपये वाला टेस्ट होगा फ्री
अंबाला में सेक्टर 10 स्थित पोली क्लीनिक में एड्स बीमारी के लिए विशेष डॉक्टर एवं काउंसलर मौजूद है। जहां अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र के मरीज अपना इलाज करवाने के लिए आते हैं। साथ ही मरीज इस बीमारी से परेशान न हो इसके लिए काउंसलर भी हायर किए हुए हैं। जो मरीजों को इस बीमारी के बारे में फैलाई गई भ्रामक अफवाहों से दूर करने का काम करते हैं। डॉक्टर ने बताया कि 12 दिसंबर से वायरल लोड टेस्ट भी किया जाएगा, जो बाहर 4500 में किया जाता है।
एड्स कोई अछूत बीमारी नहीं है, जो किसी के छूने से फैल जाए, इसलिए किसी को भी एड्स के मरीजों से भेदभाव वाला बरताव नहीं करना चाहिए, क्योंकि एड्स को अब शुगर व थाइराइड जैसी बीमारियों में गिना जाने लगा है। जिससे किसी दूसरे पर असर नहीं पड़ता। दवाई लेने से इस बीमारी को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
-डॉ. पवन चौ., एचआईवी एंड एड्स डिप्टी नोडल ऑफिसर।
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एड्स से पीड़ित 15 महिलाओं ने जन्में स्वस्थ बच्चे
एड्स से लड़ते हुए अंबाला में 15 महिलाएं ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। डेढ़ साल में डीबीएस टेस्ट की रिपोर्ट के बाद यह खुलासा हुआ है। इस टेस्ट से साफ हो जाता है कि यह बच्चे एकदम स्वस्थ हैं। इनमें 7 मेल और 8 फीमेल बच्चे शामिल हैं। इनमें एक महिला ऐसी है जिसने गर्भधारण के समय खुद का टेस्ट तो करवाया लेकिन इलाज की प्रक्रिया पूरी नहीं की। घर पर ही डिलिवरी करवाई। इसलिए बच्चा मृत पैदा हुआ।
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बच्चों को दिया जाता है विशेष ख्याल
गर्भवती महिलाओं में एड्स की पुष्टि होने के बाद जहां महिलाओं को विशेष ट्रीटमेंट दिया जाता है, वहीं बच्चे का भी विशेष ख्याल रखा जाता है। डॉक्टर ने बताया कि इसमें गर्भवती महिलाओं को डरने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि अधिकतर केस में बच्चे इस बीमारी से बच जाते हैं। साथ ही उनका टेस्ट कर इस बीमारी की जांच की जाती है।
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4500 रुपये वाला टेस्ट होगा फ्री
अंबाला में सेक्टर 10 स्थित पोली क्लीनिक में एड्स बीमारी के लिए विशेष डॉक्टर एवं काउंसलर मौजूद है। जहां अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र के मरीज अपना इलाज करवाने के लिए आते हैं। साथ ही मरीज इस बीमारी से परेशान न हो इसके लिए काउंसलर भी हायर किए हुए हैं। जो मरीजों को इस बीमारी के बारे में फैलाई गई भ्रामक अफवाहों से दूर करने का काम करते हैं। डॉक्टर ने बताया कि 12 दिसंबर से वायरल लोड टेस्ट भी किया जाएगा, जो बाहर 4500 में किया जाता है।
एड्स कोई अछूत बीमारी नहीं है, जो किसी के छूने से फैल जाए, इसलिए किसी को भी एड्स के मरीजों से भेदभाव वाला बरताव नहीं करना चाहिए, क्योंकि एड्स को अब शुगर व थाइराइड जैसी बीमारियों में गिना जाने लगा है। जिससे किसी दूसरे पर असर नहीं पड़ता। दवाई लेने से इस बीमारी को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
-डॉ. पवन चौ., एचआईवी एंड एड्स डिप्टी नोडल ऑफिसर।