फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   govt tell, how can manage kitchen, ambala

अब तो सरकार ही बताए कैसे चलाएं रसोई

Mon, 18 Jul 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला Updated Mon, 18 Jul 2016 12:04 AM IST
विज्ञापन
govt tell, how can manage kitchen, ambala
vegetables - फोटो : getty images
जिले के लोगोें को इस वक्त गुजारा करने से लेकर अपना लाइफ स्टाइल बरकरार रखना बहुत मुश्किल हो रहा है। इस वक्त लोग लगातार महंगाई के बोझ तले दबते जा रहे हैं। उन्हें इससे कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। इसी बात को लेकर लोगों में बहुत ज्यादा आक्रोश है।
विज्ञापन

महंगाई ने उनकी रसोई का बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। इससे परिवार में कमाने वाले व्यक्ति के जेब पर भी लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता रहा है। मध्यम, निम्न मध्यम और निम्न वर्ग के लोग इस महंगाई से ज्यादा दुखी है।
विज्ञापन


सबसे बड़ी बात यह कि इस बढ़ती महंगाई पर किसी का भी नियंत्रण नहीं है। खान पान से लेकर कपड़ा, सजने संवरने से लेकर सैर सपाटा, इस वक्त सबकुछ महंगा हो चुका है। रेस्तराओं में भी सभी फूड आइटम के दाम बढ़ते जा रहे हैं, इसलिए मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी अब रेस्तराओं व होटलों में फैमिली लंच या डिनर के लिए सोचना पड़ता है।दूसरी ओर, प्रशासन जहां अपने स्तर पर महंगाई नियंत्रण के प्रयास कर रहा है, वहीं पक्ष और विपक्ष के नेता अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जबकि गृहिणियां सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही हैं कि सरकार ही उन्हें बता दें कि वे अपनी रसोई कैसे चलाएं?
विज्ञापन
विज्ञापन


सबसे ज्यादा रसोई पर मार
इस वक्त देखा जाए तो सबसे ज्यादा महंगाई की मार रसोई पर पड़ी है। इस बात को लेकर गृहिणियां ज्यादा उखड़ी हुई हैं। दालें तो लोगों की प्लेटों से गायब हो रही हैं, तो सब्जियों का नखरा देखने लायक है। आम व केले को छोड़कर कोई भी फल 100 रुपये किलो से नीचे नहीं है। इसलिए आमजन बहुत ज्यादा चिंतित हैं।

इनके अचानक बढ़े दाम  
आइटम    पहले    अब (रेट प्रति किलो) 
दाल चना    80    100
बेसन    90    110
सफेद चना    100    120
सरसो तेल    110    115
चीनी    38    40
अरहर की दाल    140    150
उड़द साबुत    130    140
उड़द धुली    155    160
उड़द छिलका    140    150

सब्जी

टमाटर    40    50
घीया    30    40
करेले    20    30
पत्ता गोभी    30    40
मटर    80    100
फूलगोभी    40    50
कद्दू    20    30
कटहल    35    40
बैंगन    25    40
फ्रांसबीन    30    40
अरबी    25    30
शिमला मिर्च    35    40
बैंगन    35    40
भिंडी    30    40
तोरी    35    30
आलू    20    25
प्याज    15    20

पहाड़ी सब्जियों पर आश्रित अंबाला 
सब्जियों के अचानक बढ़े दाम के पीछे सबसे बड़ी वजह है लोकल सब्जियों का बाजार से गायब होना। अभी तक खेतों में लोकल सब्जियां तैयार नहीं हैं, इसलिए बाजार में बाहरी सब्जियों की आवक ज्यादा है और उसी हिसाब से रेट में बहुत चढ़े हुए हैं। एक या दो सब्जियों को छोड़कर कोई भी सब्जी तीस रुपये प्रति किलो से कम नहीं है। सब्जी कारोबारी अनिल पंडित, गौरव, सुशील सोनकर, रिक्की कश्यप, अमित, विकास, मस्तराम, अतुल, पप्पू पासी, राम आसरे, श्री पांडे, आशीष, जगदीप व कृष्ण का कहना है कि  इस वक्त बाजार में पहाड़ी सब्जियां ही सबसे ज्यादा आ रही है, यही वजह की सब्जी बाजार में बहुत ज्यादा तेजी है। जब तक लोकल सब्जी बाजार में नहीं आते, तब तक महंगा स्वाद ही लेना पड़ेगा।

मनमाने रेट पर बिक रहे कपड़े
इस वक्त बाजार में कपड़ा मार्केट भी बूम पर हैं। रेडिमेड कपड़ों की मार्केट में तो जबरदस्त मनमानी चल रही है। कपड़ा निर्माताओं को छोड़ दें तो थोक व फुटकर रेडिमेड कपड़ा विक्रेता अपनी मर्जी से कपड़ों का रेट तय कर रहे हैं। अंबाला में उत्तर भारत की सबसे बड़ी थोक कपड़ा मार्केट है। जबकि फुटकर के लिए कपड़े के काफी ज्यादा शोरूम व मॉल्स है। कपड़ा कारोबार से जुड़े एक थोक व्यापारी ने बताया कि इस वक्त बाजार में रेट टेंपरिंग सिस्टम सबसे ज्यादा हो रहा है। कपड़ा कारोबारी थोक में लुधियाना, कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, सूरत से बच्चों के रेडिमेड कपड़े व महिलाओं की साडिय़ों व सूट उठाते हैं और यहां अपनी दुकानों व शोरूम में लाकर उस पर मशीन से स्लीप चिपकाकर उस पर अपना रेट प्रिंट कर देते हैं। इसी ख्ेाल में दुकानदार दो से तीन प्रतिशत का मार्जिन का खेल खेलते हैं और पब्लिक का भारी चूना लगा देते हैं। बच्चों के कपड़ों में तो सबसे ज्यादा रेट टेंपरिंग का खेल खेला जाता है।

रेस्तराओं में थाली भी महंगी 
महंगाई का असर रेस्तरां कारोबार पर भी खासा पड़ा है। मजबूरन संचालकों को अपनी थालियों व फूड आइटम के रेट बढ़ाने पड़ रहे हैं। कारोबार से जुड़े सुभाष व श्रीपाल शर्मा बताते हैं कि सब्जियां बहुत महंगी हो गई है, क्या करें, इसलिए सब्जी का रेट पहले की अपेक्षाकृत महंगा तो होगा। उन्होंने बताया कि सभी फूड आइटम में थोड़ा-थोड़ा इजाफा करना पड़ा है, जबकि आइसक्रीम आइटम भी थोड़ी महंगी हुई है।
---

मोदी सरकार ने अभी पेट्रोल व डीजल के दाम थोड़े कम किए हैं, ये अच्छी बात है। लेकिन मेरा तो प्रधानमंत्री मोदी से यही आग्रह है कि वे महिलाओं की रसोई का खास ध्यान रखें। देशभर की महिलाओं को उनसे महंगाई नियंत्रण को लेकर बहुत उम्मीदें हैं।
-सैलजा सचदेवा, गृहिणी
---

समझ नहीं आ रहा कब अच्छे दिन आएंगे।  सब्जियों से लेकर दालों में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है। लोग नाश्ता तो आचार, चटनी या चाय से कर लेते हैं, लेकिन दोपहर व रात को  क्या सब्जी या दाल बनाएं, इसे लेकर टेंशन हो जाती है। सरकार लोगों की इस स्थिति को समझें और महंगाई को काबू करे।
-सोनिया रानी, पार्षद एवं गृहिणी
---

महंगाई से मध्यम व निम्न मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है। क्योंकि अपने स्टैंडर्ड से नीचे जाकर वो जी नहीं सकता और ज्यादा की उसकी औकात नहीं होती। इसलिए महंगाई की मार सबसे ज्यादा उसी पर है। सरकार ने महंगाई नियंत्रण का जनता से वायदा किया था, इसलिए सरकार इस वायदे को निभाए।
-ज्योति चौहान, गृहिणी
---

खान-पान से लेकर सजने-संवरने, ओढ़ना-बिछौना और सैर सपाटे तक सब कुछ महंगा हो गया है। दरअसल, हम महंगाई सिर्फ खानपान मे ही देखते हैं। लेकिन इससे हटकर लाइफ स्टाइल की हर चीज दबे पांव महंगी होती जा रही है। इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि सरकार रोजमर्रा और जरूरी चीजों के कंट्रोल प्राइज रेट तय क्यों नहीं करती?
-नीलम सैनी, गृहिणी
---

कारोबारी हो या सर्विस क्लास, लोग सभी घरों का बजट महंगाई ने बिगाड़ दिया है। लोगों की प्रति व्यक्ति आय में इतनी बढ़ोतरी नहीं हो रही है, जितनी बढ़ोतरी महंगाई में होती जा रही है। सरकार, लोगों की जेब पर आर्थिक भार न बढ़ाए।
-कंवलजीत कौर, गृहिणी
---

मुझे लगता है कोई भी सरकार हो, उसके लिए महंगाई सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा रह गया है। सही मायनों में महंगाई कब नियंत्रण में आएगी, यही सरकारें लोगों को बता दें। सरकार महंगाई काबू नहीं कर सकती तो रोजमर्रा की चीजों के कंट्रोल रेट निर्धारित कर दे।
- निर्मल, गृहिणी
---

मुद्दे पर नेता आमने-सामने
मोदी सरकार महंगाई नियंत्रण में पूरी तरह फेल हो गई है। इसलिए मोदी सरकार को जगाने के लिए 20 जुलाई को कांग्रेस दिल्ली में वायदाखिलाफी रैली करेगी। जिसमें हरियाणा से हजारों महिलाएं थाली व चम्मच लेकर और अपने गले में सब्जियों की मालाएं पहनकर दिल्ली पहुंचेगी। ताकि शायद सरकार नींद  से जागकर महंगाई को काबू करे।
- सुमित्रा चौहान, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा महिला कांग्रेस
---

मोदी सरकार महंगाई नियंत्रण को लेकर लगातार गंभीरता से काम कर रही है। पेट्रोल व डीजल के दाम अभी कम हुए हैं। विपक्ष के पास कोई मुद्दा तो हैं नहीं, इसलिए वे जनता को बहकाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही है। जल्द ही महंगाई नियंत्रण में होगी और जनता को राहत मिलेगी।

- नीता खेड़ा, भाजपा नेत्री एवं पूर्व हरियाणा भाजपा कार्यकारिणी सदस्य
---

जमाखोरी पर रहेगी प्रशासन की नजर

महंगाई नियंत्रण को लेकर प्रशासन भी अपना काम पूरी शिद्दत के साथ कर रहा है। पिछले दिनों कारोबारियों व खाद्य आपूर्ति विभाग के अफसरों की बैठक भी ली गई थी। जिसमें ये निर्देश दिए गए थे कि कोई भी दाल व सब्जी व्यापारी जमाखोरी न करे। तभी महंगाई को नियंत्रण में लाया जा सकता है। जमाखोरी के खिलाफ प्रशासन अपना भी छापामारी अभियान चलाएगा।
-कैप्टन शक्ति सिंह, सब डिविजिनल मजिस्ट्रेट, अंबाला
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed