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भारी भरकम बैगों से मिला छुटकारा, अब छात्रों को टैब का सहारा
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अंबाला सिटी। टैबलेट मिलने से विद्यार्थियों को भारी भरकम किताबों के बैग के बोझ से छुटकारा मिल गया। अब विद्यार्थी बैग में इक्का-दुक्का किताब के साथ टैबलेट लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं। यह किताबें भी मुख्य रूप से वह हैं जो स्कूल में अतिरिक्त विषयों की हैं और वह विषय अभी टैबलेट में दर्ज नहीं किए गए हैं।
अध्यापकों का कहना है कि वह विद्यार्थियों को टैबलेट से ही पढ़ाई करवा रहे हैं, क्योंकि शुरुआती दौर में बच्चे रुचि के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। टैबलेट में मुख्य विषयों की किताबें पीडीएफ फाइल के तौर पर अवसर और दिशा एप पर पहले से मौजूद हैं। टैबलेट की स्क्रीन बड़ी होने के कारण विद्यार्थियों को भी पढ़ाई करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। इसके अलावा वीडियो भी दी गई है जिसे डिजिटल बोर्ड पर चलाकर बच्चों की पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाया जा रहा है।
जब से टैबलेट मिले हैं तब से पढ़ाई भी टैबलेट पर ही कर रहे हैं। इससे काफी सुविधा भी मिली है। अभी शुरुआत है तो किताबें तो लानी पड़ती हैं पर अब पहले के मुकाबले कम लाने लगे हैं। - कोमल।
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अधिकतर पढ़ाई एप से ही करने लगे हैं। अब केवल वहीं किताब लाते हैं जो जरूरी होती हैं। उम्मीद है कि धीरे-धीरे सारी पढ़ाई ही एप से होगी और किताबें लानी बिल्कुल बंद हो जाएगी। - महक।
एप के माध्यम से पढ़ाई करने में मजा आ रहा है। इस कारण अब किताबें भी कम लाने लगे हैं। टैबलेट से पढ़ने की आदत हो जाएगी तो किताबों के भारी भरकम बोझ से छूट मिलेगा। - नमरा।
एप पर किताबें पहले से अपलोड की हुई हैं। साथ ही वीडियो भी है, अगर हम घर पर पढ़ाई कर रहे हों और कोई विषय समझ नहीं आता तो वीडियो में समझ लेते हैं। वैसे तो इतनी जरूरत पढ़ती नहीं है। - नंदनी।
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अध्यापकों का कहना है कि वह विद्यार्थियों को टैबलेट से ही पढ़ाई करवा रहे हैं, क्योंकि शुरुआती दौर में बच्चे रुचि के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। टैबलेट में मुख्य विषयों की किताबें पीडीएफ फाइल के तौर पर अवसर और दिशा एप पर पहले से मौजूद हैं। टैबलेट की स्क्रीन बड़ी होने के कारण विद्यार्थियों को भी पढ़ाई करने में कोई दिक्कत नहीं आ रही है। इसके अलावा वीडियो भी दी गई है जिसे डिजिटल बोर्ड पर चलाकर बच्चों की पढ़ाई को और अधिक रोचक बनाया जा रहा है।
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जब से टैबलेट मिले हैं तब से पढ़ाई भी टैबलेट पर ही कर रहे हैं। इससे काफी सुविधा भी मिली है। अभी शुरुआत है तो किताबें तो लानी पड़ती हैं पर अब पहले के मुकाबले कम लाने लगे हैं। - कोमल।
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अधिकतर पढ़ाई एप से ही करने लगे हैं। अब केवल वहीं किताब लाते हैं जो जरूरी होती हैं। उम्मीद है कि धीरे-धीरे सारी पढ़ाई ही एप से होगी और किताबें लानी बिल्कुल बंद हो जाएगी। - महक।
एप के माध्यम से पढ़ाई करने में मजा आ रहा है। इस कारण अब किताबें भी कम लाने लगे हैं। टैबलेट से पढ़ने की आदत हो जाएगी तो किताबों के भारी भरकम बोझ से छूट मिलेगा। - नमरा।
एप पर किताबें पहले से अपलोड की हुई हैं। साथ ही वीडियो भी है, अगर हम घर पर पढ़ाई कर रहे हों और कोई विषय समझ नहीं आता तो वीडियो में समझ लेते हैं। वैसे तो इतनी जरूरत पढ़ती नहीं है। - नंदनी।