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व्रत स्नान पूर्ण करने से मिलते हैं अच्छे फल
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सिटी के श्री अनंत प्रेम मंदिर में चल रही कार्तिक मास की कथा में प्रवचन करती गीता देवी ।
- फोटो : Ambala
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श्री अनंत प्रेम मंदिर में चल रही कार्तिक मास की कथा में गीता देवी महाराज ने भीष्म पंचक व्रत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने भीष्म पितामह को यह व्रत करने को कहा था। इस बारे में एक प्रसंग सुनाते हुए गीता देवी महाराज ने कहा कि युद्ध में जब पांडवों की जीत हो गई, तब श्रीकृष्ण पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गए और उनसे अनुरोध किया कि वह पांडवों को ज्ञान प्रदान करें।
शर सैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे भीष्म पितामह ने भगवान कृष्ण के अनुरोध पर पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म व मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया। बताया जाता है भीष्म पितामह द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक चलता रहा। भीष्म पितामह ने जब पूरा ज्ञान दे दिया, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आपने जो इन पांच दिनों में ज्ञान दिया है, यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गए हैं।
इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंचक व्रत के नाम से जाना जाएगा। जो इन पांच दिनों के दौरान कार्तिक मास में व्रत स्नान आदि करेगा उसे पूर्ण कार्तिक मास का फल प्राप्त होगा। इस अवसर पर सत्संग में भगवत धाम हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने भी गंगा की महिमा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कार्तिक मास में जो कोसों दूर रहकर भी गंगा का स्मरण करता है व गंगा-गंगा उच्चारण करता है, उसके जन्म जन्मांतरों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
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शर सैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे भीष्म पितामह ने भगवान कृष्ण के अनुरोध पर पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म व मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया। बताया जाता है भीष्म पितामह द्वारा ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक चलता रहा। भीष्म पितामह ने जब पूरा ज्ञान दे दिया, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आपने जो इन पांच दिनों में ज्ञान दिया है, यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गए हैं।
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इन पांच दिनों को भविष्य में भीष्म पंचक व्रत के नाम से जाना जाएगा। जो इन पांच दिनों के दौरान कार्तिक मास में व्रत स्नान आदि करेगा उसे पूर्ण कार्तिक मास का फल प्राप्त होगा। इस अवसर पर सत्संग में भगवत धाम हरिद्वार से महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद महाराज ने भी गंगा की महिमा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कार्तिक मास में जो कोसों दूर रहकर भी गंगा का स्मरण करता है व गंगा-गंगा उच्चारण करता है, उसके जन्म जन्मांतरों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

टि के श्री अनंत प्रेम मंदिर में चल रही कार्तिक मास की कथा में मौजूद श्रद्धालु।- फोटो : Ambala
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