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Ambala News: क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगी औषधीय पौधों की जानकारी
Sat, 19 Sep 2026 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:19 AM IST
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अंबाला छावनी के जीएमएन कॉलेज में पेड़ पर लगे क्यूआर कोड को देखते शिक्षक व विद्यार्थी। प्रवक्ता
- फोटो : Samvad
अंबाला। जीएमएन कॉलेज ने पर्यावरण संरक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। कॉलेज परिसर में मौजूद 135 प्रमुख पेड़-पौधों को डिजिटल पहचान दी गई है। अब विद्यार्थी और आगंतुक अपने स्मार्टफोन से पौधों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर उनकी वैज्ञानिक, औषधीय और पर्यावरणीय जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे।
यह पूरी परियोजना प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त के मार्गदर्शन में संचालित की गई। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के प्रोजेक्ट असाइनमेंट के तहत वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. कुलदीप यादव के निर्देशन में बीएससी लाइफ साइंस के छात्रों ने परिसर का सर्वेक्षण कर 135 पौधों की पहचान की। इसके बाद कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग की डॉ. प्रबलीन कौर के नेतृत्व में बीसीए छात्रों ने क्यूआर कोड युक्त डिजिटल प्लेटें तैयार कीं। इस सर्वेक्षण में कॉलेज के माली सुनील तिवारी के पारंपरिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव की भी सराहनीय भूमिका रही।
स्मार्ट व ग्रीन कैंपस की दिशा में बड़ा कदम
प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने कहा कि यह व्यवस्था परिसर की जैव विविधता को एक जीवंत शिक्षण संसाधन (लिविंग लर्निंग रिसोर्स) में बदलती है, जो भविष्य में शोध, प्रोजेक्ट कार्य और हर्बेरियम निर्माण में बेहद उपयोगी साबित होगी। प्रबंधन ने इसे ग्रीन व स्मार्ट कैंपस की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। इस पहल से विद्यार्थियों को व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान मिलने के साथ-साथ उनमें प्रकृति के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा। संवाद
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यह पूरी परियोजना प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त के मार्गदर्शन में संचालित की गई। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के प्रोजेक्ट असाइनमेंट के तहत वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. कुलदीप यादव के निर्देशन में बीएससी लाइफ साइंस के छात्रों ने परिसर का सर्वेक्षण कर 135 पौधों की पहचान की। इसके बाद कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग की डॉ. प्रबलीन कौर के नेतृत्व में बीसीए छात्रों ने क्यूआर कोड युक्त डिजिटल प्लेटें तैयार कीं। इस सर्वेक्षण में कॉलेज के माली सुनील तिवारी के पारंपरिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव की भी सराहनीय भूमिका रही।
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स्मार्ट व ग्रीन कैंपस की दिशा में बड़ा कदम
प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने कहा कि यह व्यवस्था परिसर की जैव विविधता को एक जीवंत शिक्षण संसाधन (लिविंग लर्निंग रिसोर्स) में बदलती है, जो भविष्य में शोध, प्रोजेक्ट कार्य और हर्बेरियम निर्माण में बेहद उपयोगी साबित होगी। प्रबंधन ने इसे ग्रीन व स्मार्ट कैंपस की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। इस पहल से विद्यार्थियों को व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान मिलने के साथ-साथ उनमें प्रकृति के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा। संवाद
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