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मुफ्त दवा फिर भी मरीजों को दे रहीं ‘दर्द’
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला
Updated Mon, 08 Jun 2015 12:59 AM IST
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सस्ते इलाज के दावे सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों दर्द दे रहे हैं। अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवा ही अस्पताल में नहीं मिलती।
मरीज से कह दिया जाता है कि वे बाहर से दवा खरीद लाएं। इसके बाद मरीज अधिक कीमत पर यह दवाएं बाहर से खरीदकर लाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे हालात जिले के सिविल अस्पतालों से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक हैं।
पांच हजार मरीजों की ओपीडी
जिला के सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी में करीब पांच हजार मरीजों तक की ओपीडी है। इनको सिविल अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से ही दवा दी जाती है।
अस्पताल सूत्रों की मानें, तो करीब 200 दवाएं सिविल अस्पताल में उपलब्ध हैं। इन्हें मरीजों को निशुल्क दिया जाता है। नियमानुसार अस्पताल या सीएचसी, पीएचसी में उपलब्ध स्टॉक को डिस्पले बोर्ड पर लिखना होता है। लेकिन, ऐसा कम ही होता है।
टोकन सिस्टम, फिर भी लाइनें
सिविल अस्पताल अंबाला सिटी में दवा लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मरीज डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा लेने पहुंचता है, तो टोकन लेना पड़ता है। इसके बाद लाइन में लंबा इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल में टोकन सिस्टम भी मरीजों को राहत नहीं दे पा रहा। कैंट के सिविल अस्पताल में भी मरीजों को दवा लेने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। हालांकि यहा मरीजों को करीब 15 मिनट में दवा मिल जाती है।
बाहर से दवा खरीदने की सलाह
लंबी लाइन में लगने के बाद मरीज का जब नंबर आता है, तो कई बार उससे कह दिया जाता है कि स्टोर पर संबंधित दावा उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद मरीज या तो डॉक्टर के पास जाकर उस दाव का सब्सीटीट्यूट लिखवाता है या फिर उसे दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है। अधिकतर मरीज बाहर से ही दवा खरीद लेते हैं। हालांकि उन्हें यह दावा बेहद महंगी पड़ती है। कई बार डॉक्टर ही मरीजों से बाहर से दावा लेने के लिए बोल देते हैं।
यह कहते हैं लोग
कैंट सिविल अस्पताल में इलाज करवा चुके मरीजों के तीमारदारों में सुशील कुमार, दीपक कनौजिया, अशोक, मनोज कुमार, ऋषभ, अजय करधान ने बताया कि उन्हों ने अपने सगे संबंधियों का इलाज सिविल अस्पताल में कराया था। यहां पर मरीजों को पूरी दवाएं नहीं दी जातीं।
चार या पांच दवाएं लिखी हैं, तो उनमें से तीन-चार दवाएं ही मिलती है। कुछ दवाएं हमेशा ही बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। कई बार डॉक्टर खुद कह देते हैं कि बाहर से दवा लिखकर दी जा रही है, जो मार्केट से ही मिलेगी। अब बाहर से दवा खरीदते हैं, तो महंगी मिलती है। अस्पताल प्रबंधन को चाहिए कि वह सभी दवाएं उपलब्ध करवाए।
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मरीज से कह दिया जाता है कि वे बाहर से दवा खरीद लाएं। इसके बाद मरीज अधिक कीमत पर यह दवाएं बाहर से खरीदकर लाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे हालात जिले के सिविल अस्पतालों से लेकर सीएचसी, पीएचसी तक हैं।
पांच हजार मरीजों की ओपीडी
जिला के सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी में करीब पांच हजार मरीजों तक की ओपीडी है। इनको सिविल अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से ही दवा दी जाती है।
अस्पताल सूत्रों की मानें, तो करीब 200 दवाएं सिविल अस्पताल में उपलब्ध हैं। इन्हें मरीजों को निशुल्क दिया जाता है। नियमानुसार अस्पताल या सीएचसी, पीएचसी में उपलब्ध स्टॉक को डिस्पले बोर्ड पर लिखना होता है। लेकिन, ऐसा कम ही होता है।
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टोकन सिस्टम, फिर भी लाइनें
सिविल अस्पताल अंबाला सिटी में दवा लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मरीज डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा लेने पहुंचता है, तो टोकन लेना पड़ता है। इसके बाद लाइन में लंबा इंतजार करना पड़ता है।
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अस्पताल में टोकन सिस्टम भी मरीजों को राहत नहीं दे पा रहा। कैंट के सिविल अस्पताल में भी मरीजों को दवा लेने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। हालांकि यहा मरीजों को करीब 15 मिनट में दवा मिल जाती है।
बाहर से दवा खरीदने की सलाह
लंबी लाइन में लगने के बाद मरीज का जब नंबर आता है, तो कई बार उससे कह दिया जाता है कि स्टोर पर संबंधित दावा उपलब्ध नहीं है।
इसके बाद मरीज या तो डॉक्टर के पास जाकर उस दाव का सब्सीटीट्यूट लिखवाता है या फिर उसे दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है। अधिकतर मरीज बाहर से ही दवा खरीद लेते हैं। हालांकि उन्हें यह दावा बेहद महंगी पड़ती है। कई बार डॉक्टर ही मरीजों से बाहर से दावा लेने के लिए बोल देते हैं।
यह कहते हैं लोग
कैंट सिविल अस्पताल में इलाज करवा चुके मरीजों के तीमारदारों में सुशील कुमार, दीपक कनौजिया, अशोक, मनोज कुमार, ऋषभ, अजय करधान ने बताया कि उन्हों ने अपने सगे संबंधियों का इलाज सिविल अस्पताल में कराया था। यहां पर मरीजों को पूरी दवाएं नहीं दी जातीं।
चार या पांच दवाएं लिखी हैं, तो उनमें से तीन-चार दवाएं ही मिलती है। कुछ दवाएं हमेशा ही बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। कई बार डॉक्टर खुद कह देते हैं कि बाहर से दवा लिखकर दी जा रही है, जो मार्केट से ही मिलेगी। अब बाहर से दवा खरीदते हैं, तो महंगी मिलती है। अस्पताल प्रबंधन को चाहिए कि वह सभी दवाएं उपलब्ध करवाए।