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तांत्रिक क्रियाओं के लिए चोरी होने का डर, तालों के पहरे में अस्थियां

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2020 10:31 PM IST
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Fear of theft for tantrik activities, bones in locks
कमरे में बंद अस्थियां - फोटो : AMAR UJALA
अंबाला। मर चुके इंसानों की अस्थियों का इस्तेमाल तांत्रिक क्रियाओं में किया जा सकता है। इस डर से अब मरे लोगों की अस्थियों को लॉकर के अंदर बड़े तालों के बीच रखा जा रखा जा रहा है। बाकायदा चोरी होने के डर से इनकी कड़ी पहरेदारी भी हो रही है। यही कारण है कि लगभग सभी श्मशान घाटों में बनाए गए ज्यादातर लॉकर्स फुल हो रहे हैं। अलबत्ता अब अस्थियां सुरक्षित रखने का संकट खड़ा हो गया है। पड़ोसी गांव के लोगों की अस्थियां रखने से इंकारः जंडली के श्मशान घाट में अस्थियां रखने के लिए इस समय छह लॉकर उपलब्ध हैं। कई दिन पहले ही ये लॉकर फुल हो चुके हैं। विसर्जन के लिए इन अस्थियों को लॉकर में रखकर उस पर बड़े ताले लगाकर परिजन चाबी भी अपने साथ ले गए। लॉकर फुल होने के बाद अब यहां पड़ोसी गांवों से आने वाली अस्थियों को रखने से मना किया जा रहा है। जंडली गांव के दो और लोगों की मौत के बाद उनकी अस्थियां लक्कड़ के गोदाम में खुंटी पर लटकाई गई हैं। चौकीदार सुरेश कुमार को इन अस्थियों की पहरेदारी की जिम्मेदारी दी गई है। -------------------- बंद कमरे में 35 लोगों की अस्थियों को विसर्जन का इंतजार सिटी के रामबाग स्थित श्मशान घाट में हर महीने 50 से 55 शवों का दाह संस्कार होता है। लॉकडाउन में अब तक 37 शवों की अस्थियां यहां विसर्जन के इंतजार में हैं। यहां अस्थियों के लिए कोई लॉकर नहीं है। मगर दो कमरों में तालों के बीच अस्थियों को खुंटियों पर लटकाया जा रहा है। अस्थियों के साथ राख को भी रखा जा रहा है। 26 अस्थियों के साथ एक कमरा फुल हो चुका है। दूसरे कमरे में भी दस से ज्यादा शवों की अस्थियां रखी गई हैं। अब यहां कुछ अस्थियां ही रखने की जगह शेष बची है। यहां केवल लाइन में 53 अस्थियां रखने के नंबर अंकित हैं।
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