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ट्रैक्टरों में ग्रिल, पंखे व अन्य सामान लेकर लौटे किसान
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दिल्ली ओर से आ रहा ट्रैक्टर का काफिला।
- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। दिल्ली के विभिन्न बॉर्डरों पर एक वर्ष तक प्रयोग हुए टेंटों को समेटने के बाद किसान वापस लौटने लगे हैं। बहुत से किसानों ने तो ट्रैक्टरों को ही पूरी तरह टेंट के रूप में डाल दिया था। वहीं जिन जत्थे बंदियों ने टेंट लगाए हुए थे अब उसके सामान किसान समेट ला रहे थे।
इसमें लोहे की ग्रिल, लकड़ी के फट्टे, गद्दे, पंखे, कूलर, पानी की टंकियां, बांस, तिरपाल व अन्य सामान शामिल था। ऐसा दृश्य शंभू बॉर्डर पर पूरे एक वर्ष बाद दिखाई दिया। इस दौरान किसान एक साथ दो से तीन-तीन ट्राली एक ही ट्रैक्टर द्वारा खींच कर ला रहे थे। इससे कि कम से कम ईंधन में ज्यादा से ज्यादा सामान को वापस लाया जा सके। इस दौरान केवल ट्रैक्टर ही नहीं बड़ी-बड़ी गाड़ियों के साथ भी ट्राली को लेकर वापस आया जा रहा था। यहां तक बॉर्डरों पर किसानों की ओर से अपनी ई शौचालयों की व्यवस्था भी की गई थी। जिसे लेकर वह वापस लौट रहे थे। वापस लौट रहे किसानों का कहना है कि अगर सरकार फिर से ऐसा कोई कदम उठाती है जो किसानों के हक में न तो तब भी वह वापस दिल्ली जाने से गुरेज नहीं करेंगे।
नाडा साहिब से आए किसानों की ओर से लगाया पकौड़ों व चाय का लंगर
अंबाला सिटी। नाडा साहिब गुरुद्वारा के पास स्थित एक गांव से आए किसानों ने शंभू बॉर्डर पर पकौड़ों व चाय का लंगर लगाया। किसानों की ओर से पहले ही आधी से ज्यादा तैयारी कर ली थी। इससे कि जब ज्यादा किसान शंभू बॉर्डर पहुंचे तो पकौड़े और चाय बांटने में किसानों को परेशानी न हो। इसके लिए पहले ही मेज भरकर पकौड़ों का रखा लिया गया था। फिर जो भी किसान आए जा रहे थे उन्हें पकौड़े पक्के करके वितरित किए जा रहे थे। वहीं चाय के लिए क्विंटल दूूध की व्यवस्था भी किसानों की ओर से की गई थी। किसानों द्वारा लगाए गए लंगर की सभी दिल्ली से आ रहे किसानों ने सराहना की।
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इसमें लोहे की ग्रिल, लकड़ी के फट्टे, गद्दे, पंखे, कूलर, पानी की टंकियां, बांस, तिरपाल व अन्य सामान शामिल था। ऐसा दृश्य शंभू बॉर्डर पर पूरे एक वर्ष बाद दिखाई दिया। इस दौरान किसान एक साथ दो से तीन-तीन ट्राली एक ही ट्रैक्टर द्वारा खींच कर ला रहे थे। इससे कि कम से कम ईंधन में ज्यादा से ज्यादा सामान को वापस लाया जा सके। इस दौरान केवल ट्रैक्टर ही नहीं बड़ी-बड़ी गाड़ियों के साथ भी ट्राली को लेकर वापस आया जा रहा था। यहां तक बॉर्डरों पर किसानों की ओर से अपनी ई शौचालयों की व्यवस्था भी की गई थी। जिसे लेकर वह वापस लौट रहे थे। वापस लौट रहे किसानों का कहना है कि अगर सरकार फिर से ऐसा कोई कदम उठाती है जो किसानों के हक में न तो तब भी वह वापस दिल्ली जाने से गुरेज नहीं करेंगे।
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नाडा साहिब से आए किसानों की ओर से लगाया पकौड़ों व चाय का लंगर
अंबाला सिटी। नाडा साहिब गुरुद्वारा के पास स्थित एक गांव से आए किसानों ने शंभू बॉर्डर पर पकौड़ों व चाय का लंगर लगाया। किसानों की ओर से पहले ही आधी से ज्यादा तैयारी कर ली थी। इससे कि जब ज्यादा किसान शंभू बॉर्डर पहुंचे तो पकौड़े और चाय बांटने में किसानों को परेशानी न हो। इसके लिए पहले ही मेज भरकर पकौड़ों का रखा लिया गया था। फिर जो भी किसान आए जा रहे थे उन्हें पकौड़े पक्के करके वितरित किए जा रहे थे। वहीं चाय के लिए क्विंटल दूूध की व्यवस्था भी किसानों की ओर से की गई थी। किसानों द्वारा लगाए गए लंगर की सभी दिल्ली से आ रहे किसानों ने सराहना की।
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