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Ambala News: अंगूठा लगाने के बाद भी पोर्टल पर नहीं हो रहा सत्यापन, परेशानी झेल रहे किसान
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अंबाला छावनी स्थित मोहडा अनाज मंडी में वेरिफिकेशन कराते किसान परेशान होते हुए। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। मंडियों में धान की आवक तेजी पर है, लेकिन पोर्टल की खामियों और सरकार की नई शर्तों ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। एक तरफ जहां मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर बार-बार अंगूठा लगाने के बाद भी किसानों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा प्रति एकड़ धान खरीद की सीमा घटाने से किसान खासे परेशान हैं।
इस बार सरकार ने एक एकड़ में केवल 26 क्विंटल धान की खरीद की शर्त तय की है जबकि खेतों में बेहतर पैदावार के कारणर किसानों के पास प्रति एकड़ 32 से 36 क्विंटल तक धान निकला है। यानी औसतन छह से 10 क्विंटल धान अधिक हुआ है। ऐसे में किसान इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि सरकार की ओर से निर्धारित 26 क्विंटल के कोटे के बाद बचा हुआ अतिरिक्त धान वे कहां और कैसे बेचेंगे।
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पिछले साल 30 क्विंटल थी सीमा, इस बार घटा दी
किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि पिछले साल सरकार ने प्रति एकड़ 30 क्विंटल धान उत्पादन की सीमा तय की थी, जिसे इस बार घटाकर 26 क्विंटल प्रति एकड़ कर दिया गया है। इस बार उनकी धान की फसल अच्छी हुई है। वहीं बचे हुए अतिरिक्त धान को मंडी में बेचने की चिंता ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है।
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पोर्टल के चक्कर काट रहे किसान
किसान गुरमेल सिंह ने बताया कि वेरिफिकेशन न होने के कारण कई किसानों को मंडी में गेट पास कटवाने और फसल का उठान कराने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। पोर्टल की तकनीकी कमियों को जल्द दूर किया जाए और धान खरीद की प्रति एकड़ सीमा को बढ़ाकर कम से कम 35 क्विंटल किया जाए, ताकि उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल सके।
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यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है जैसे ही इस पर फैंसला आएगा तो किसानों को इसकी जानकारी दे दी जाएगी।
जितेश गोयल , जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी, अंबाला।
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अंबाला। मंडियों में धान की आवक तेजी पर है, लेकिन पोर्टल की खामियों और सरकार की नई शर्तों ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। एक तरफ जहां मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर बार-बार अंगूठा लगाने के बाद भी किसानों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा प्रति एकड़ धान खरीद की सीमा घटाने से किसान खासे परेशान हैं।
इस बार सरकार ने एक एकड़ में केवल 26 क्विंटल धान की खरीद की शर्त तय की है जबकि खेतों में बेहतर पैदावार के कारणर किसानों के पास प्रति एकड़ 32 से 36 क्विंटल तक धान निकला है। यानी औसतन छह से 10 क्विंटल धान अधिक हुआ है। ऐसे में किसान इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि सरकार की ओर से निर्धारित 26 क्विंटल के कोटे के बाद बचा हुआ अतिरिक्त धान वे कहां और कैसे बेचेंगे।
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पिछले साल 30 क्विंटल थी सीमा, इस बार घटा दी
किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि पिछले साल सरकार ने प्रति एकड़ 30 क्विंटल धान उत्पादन की सीमा तय की थी, जिसे इस बार घटाकर 26 क्विंटल प्रति एकड़ कर दिया गया है। इस बार उनकी धान की फसल अच्छी हुई है। वहीं बचे हुए अतिरिक्त धान को मंडी में बेचने की चिंता ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है।
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पोर्टल के चक्कर काट रहे किसान
किसान गुरमेल सिंह ने बताया कि वेरिफिकेशन न होने के कारण कई किसानों को मंडी में गेट पास कटवाने और फसल का उठान कराने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। पोर्टल की तकनीकी कमियों को जल्द दूर किया जाए और धान खरीद की प्रति एकड़ सीमा को बढ़ाकर कम से कम 35 क्विंटल किया जाए, ताकि उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल सके।
यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है जैसे ही इस पर फैंसला आएगा तो किसानों को इसकी जानकारी दे दी जाएगी।
जितेश गोयल , जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी, अंबाला।

अंबाला छावनी स्थित मोहडा अनाज मंडी में वेरिफिकेशन कराते किसान परेशान होते हुए। संवाद