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मां ने दूध बेचकर पाली लाडो अब बेटी चुका रही मातृभूमि का कर्ज
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exclusive
- फोटो : Ambala
उमेश भार्गव
अंबाला सिटी। मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आंखों के पर्दों को निगाहों से हटाएंगी, गिरकर भी हमको संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी। अंबाला शहर के साथ सटे गांव जलबेहड़ा की 20 वर्षीय मनप्रीत ने इन पंक्तियों के मायने को न केवल सार्थक कर दिखाया बल्कि उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई जोकि मुसीबतों का रोना रोते हैं। जन्म से पहले ही पिता का साया सिर से उठ गया था।
पिता की मौत के समय बड़ा भाई करीब 10 साल का था और मां अनपढ़। पिता की मौत के कुछ दिन बाद जब बेटी जन्मी तो मानो एक और आफत परिवार पर आन पड़ी। लेकिन मां तो मां होती है। मां ने अपने इस जिगर के टुकड़े को बेटे से ज्यादा लाड़ प्यार दिया। बेटी ने भी मां के दुलार को बिसराया नहीं और वो कर दिखाया जिसकी पूरे परिवार में आज तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। वह भी सिर्फ अपनी मेहनत और लग्न के बल पर।
नौकरी से पहले ही हासिल की मुकाम
मनप्रीत का सपना था कि वह पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा करे। इसके लिए उसने कराटे की ट्रेनिंग ली। कराटे में नेशनल के अलावा इंटरनेशनल भी खेली। मलेशिया में अपनी धाक जमाते हुए मनप्रीत ने 2017-18 में गोल्ड मेडल जीता। इतना ही नहीं यही रहते हुए मनप्रीत ने अपने जैसी बहनों को कराटे का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया वह भी एकदम निशुल्क। सरकारी स्कूलों के साथ-साथ प्राइवेट स्कूलों में और कॉलेजों में भी चाइल्ड लाइन टीम के साथ मनप्रीत ने बेटियों को आत्मनिर्भर बनने का निशुल्क प्रशिक्षण दिया। इसका परिणाम यह रहा कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से खुद सक्षम हो गई।
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कैसे छुआ जमीं से आसमां
दरअसल मनप्रीत को मां ने भैंस का दूध बेचकर शिक्षित किया। दोनों बहन भाई बहुत छोटे थे। घर में आय का कोई साधन नहीं था। इसीलिए मां पालो देवी ने भैंस पाली और दूध बेचकर दोनों बच्चों को पढ़ाया। बेटा ज्यादा नहीं पढ़ा। लेकिन बेटी पर मां ने आस टिकाए रखी। मनप्रीत ने भी मां के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर बीएससी में दाखिला ले लिया और बीएससी करते-करते पुलिस भर्ती निकली और यहां मनप्रीत ने अपने आपको साबित कर पहले ही झटके में नौकरी हासिल कर ली। इस तरह किचन और खेती से निकलकर मनप्रीत ने आसमां को छू लिया।
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अंबाला सिटी। मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी, आंखों के पर्दों को निगाहों से हटाएंगी, गिरकर भी हमको संभलना होगा, ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी। अंबाला शहर के साथ सटे गांव जलबेहड़ा की 20 वर्षीय मनप्रीत ने इन पंक्तियों के मायने को न केवल सार्थक कर दिखाया बल्कि उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई जोकि मुसीबतों का रोना रोते हैं। जन्म से पहले ही पिता का साया सिर से उठ गया था।
पिता की मौत के समय बड़ा भाई करीब 10 साल का था और मां अनपढ़। पिता की मौत के कुछ दिन बाद जब बेटी जन्मी तो मानो एक और आफत परिवार पर आन पड़ी। लेकिन मां तो मां होती है। मां ने अपने इस जिगर के टुकड़े को बेटे से ज्यादा लाड़ प्यार दिया। बेटी ने भी मां के दुलार को बिसराया नहीं और वो कर दिखाया जिसकी पूरे परिवार में आज तक किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। वह भी सिर्फ अपनी मेहनत और लग्न के बल पर।
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नौकरी से पहले ही हासिल की मुकाम
मनप्रीत का सपना था कि वह पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा करे। इसके लिए उसने कराटे की ट्रेनिंग ली। कराटे में नेशनल के अलावा इंटरनेशनल भी खेली। मलेशिया में अपनी धाक जमाते हुए मनप्रीत ने 2017-18 में गोल्ड मेडल जीता। इतना ही नहीं यही रहते हुए मनप्रीत ने अपने जैसी बहनों को कराटे का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया वह भी एकदम निशुल्क। सरकारी स्कूलों के साथ-साथ प्राइवेट स्कूलों में और कॉलेजों में भी चाइल्ड लाइन टीम के साथ मनप्रीत ने बेटियों को आत्मनिर्भर बनने का निशुल्क प्रशिक्षण दिया। इसका परिणाम यह रहा कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से खुद सक्षम हो गई।
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कैसे छुआ जमीं से आसमां
दरअसल मनप्रीत को मां ने भैंस का दूध बेचकर शिक्षित किया। दोनों बहन भाई बहुत छोटे थे। घर में आय का कोई साधन नहीं था। इसीलिए मां पालो देवी ने भैंस पाली और दूध बेचकर दोनों बच्चों को पढ़ाया। बेटा ज्यादा नहीं पढ़ा। लेकिन बेटी पर मां ने आस टिकाए रखी। मनप्रीत ने भी मां के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर बीएससी में दाखिला ले लिया और बीएससी करते-करते पुलिस भर्ती निकली और यहां मनप्रीत ने अपने आपको साबित कर पहले ही झटके में नौकरी हासिल कर ली। इस तरह किचन और खेती से निकलकर मनप्रीत ने आसमां को छू लिया।