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संत का प्रत्येक व्यवहार ज्ञान एवं भक्ति से भरा होता है : साध्वी हेमसुदा भारती
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नारायणगढ़। दिव्या ज्योति जागृति संस्थान हुसैनी रोड स्थित आश्रम में साप्ताहिक सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्य साध्वी हेमसुदा भारती और साध्वी रेनू भारती प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि संत का प्रत्येक व्यवहार ज्ञान एवं भक्ति से भरा हुआ होता हैं। पवित्र संत की सेवा करके प्राप्त की गई विद्या, विनय और विवेक लाती हैं।सेवा से आशीर्वाद मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि ज्ञान से ब्रह्मा को जाना जा सकता हैं, मगर उसे पाया नहीं जा सकता। प्रेम की परिकाष्ठा बहुत ऊंची है, प्रभु को केवल प्रेम की डोरी से बांधा जा सकता है। प्रेम की दीवानगी के कारण बाल कृष्ण आज भी बृजवासियों की रग-रग में उनका वास है। उन्होंने कहा कि आज युवा वर्ग विदेशों की ओर आकर्षित हो रहे है, और जन्म देने वाले मां-- बाप की आंखे उनकी राह देखते-देखते थक जाती हैं, मगर याद रखना कि मां-बाप तो तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ है, उनकी सेवा ही परमात्मा की सेवा है।
उन्होंने नौवें गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस के बारे में बताया कि मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु जी को इस्लाम धर्म अपनाने का आदेश दिया था, लेकिन गुरु जी ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपना सिर कटवा सकते है लेकिन अपने धर्म से नहीं हटेंगे।
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औरंगजेब के आदेश पर 24 नवंबर 1675 को दिल्ली में चांदनी चौक में गुरु तेग बहादुर जी को शहीद कर दिया गया। उनका बलिदान हमें सिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए बलिदान को याद करने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का अवसर प्रदान करता हैं। सत्संग के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का भी वितरण किया गया।
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उन्होंने कहा कि ज्ञान से ब्रह्मा को जाना जा सकता हैं, मगर उसे पाया नहीं जा सकता। प्रेम की परिकाष्ठा बहुत ऊंची है, प्रभु को केवल प्रेम की डोरी से बांधा जा सकता है। प्रेम की दीवानगी के कारण बाल कृष्ण आज भी बृजवासियों की रग-रग में उनका वास है। उन्होंने कहा कि आज युवा वर्ग विदेशों की ओर आकर्षित हो रहे है, और जन्म देने वाले मां
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उन्होंने नौवें गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस के बारे में बताया कि मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु जी को इस्लाम धर्म अपनाने का आदेश दिया था, लेकिन गुरु जी ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपना सिर कटवा सकते है लेकिन अपने धर्म से नहीं हटेंगे।
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औरंगजेब के आदेश पर 24 नवंबर 1675 को दिल्ली में चांदनी चौक में गुरु तेग बहादुर जी को शहीद कर दिया गया। उनका बलिदान हमें सिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए बलिदान को याद करने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का अवसर प्रदान करता हैं। सत्संग के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद का भी वितरण किया गया।