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Ambala News: एक करोड़ खर्च होने के बाद भी स्टेडियम दुरुस्त नहीं
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अंबाला छावनी के रेलवे स्टेडियम में स्थित बैडमिंटन हाल। संवाद
-बदहाली का शिकार रेलवे स्टेडियम, अब शुल्क थोपने की तैयारी,
-खेल सुविधाओं से वंचित रेल कर्मचारी व स्वजनसंवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। रेलवे स्टेडियम बदहाली का शिकार है। स्टेडियम के जीर्णोद्धार के नाम पर लगभग एक करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। लेकिन धरातल पर नतीजा कुछ और ही है। हालात इस कदर बदतर हैं कि धावक ट्रैक पर दौड़ नहीं पा रहे हैं और बच्चों की खेल गतिविधियां पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। करोड़ों खर्च होने के बाद भी खिलाड़ियों को मायूसी हाथ लग रही है।
खुद के लिए प्राइम टाइम, कर्मचारियों पर पाबंदी
रेलवे प्रशासन का नया समय-सारणी आदेश कर्मचारियों के लिए जी का जंजाल बन गया है। नए फरमान के तहत, अधिकारियों के खेलने का समय शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक तय किया गया है। जबकि कर्मचारियों व उनके परिजनों का समय शाम 5 बजे से 7 बजे तक रखा गया है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि अधिकांश रेलवे कर्मचारी शाम 6 बजे तक कार्यालयों में ऑन-ड्यूटी रहते हैं। ऐसे में ड्यूटी खत्म होने से पहले ही कर्मचारियों का खेल का समय समाप्त हो जाता है। इस व्यावहारिक खामी के कारण कर्मचारी और उनके बच्चे चाहकर भी स्टेडियम का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि जब वो 6 बजे तक दफ्तर में ही रहेंगे, तो 5 बजे स्टेडियम कैसे पहुंचेंगे, यह आदेश उन्हें खेल सुविधाओं से दूर रखने की सोची-समझी साजिश जैसा है।
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अब स्टेडियम में शुल्क के बिना एंट्री पर पाबंदी
रेलवे प्रशासन अब स्टेडियम में प्रवेश के लिए पंजीकरण और मासिक शुल्क वसूलने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि जो स्टेडियम उनके और उनके बच्चों के शारीरिक विकास के लिए निशुल्क होना चाहिए था, अब उसे व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है। बदहाल व्यवस्था के बीच नया शुल्क थोपने से कर्मचारियों में रोष पनपता जा रहा है।
खेल क्लब के तहत अधिकारी भी एक हजार रुपये का शुल्क देते हैं। स्टेडियम के बैडमिंटन हाल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए अगर मामूली शुल्क देना भी पड़े तो उसमें हर्ज क्या है। स्टेडियम में अभी काम चल रहा है, जैसे ही ये तैयार हो जाएगा तो इसे रेल कर्मचारियों व परिजनों के लिए खोल दिया जाएगा।
यशनजीत सिंह, वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक, अंबाला।
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-खेल सुविधाओं से वंचित रेल कर्मचारी व स्वजनसंवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। रेलवे स्टेडियम बदहाली का शिकार है। स्टेडियम के जीर्णोद्धार के नाम पर लगभग एक करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। लेकिन धरातल पर नतीजा कुछ और ही है। हालात इस कदर बदतर हैं कि धावक ट्रैक पर दौड़ नहीं पा रहे हैं और बच्चों की खेल गतिविधियां पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। करोड़ों खर्च होने के बाद भी खिलाड़ियों को मायूसी हाथ लग रही है।
खुद के लिए प्राइम टाइम, कर्मचारियों पर पाबंदी
रेलवे प्रशासन का नया समय-सारणी आदेश कर्मचारियों के लिए जी का जंजाल बन गया है। नए फरमान के तहत, अधिकारियों के खेलने का समय शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक तय किया गया है। जबकि कर्मचारियों व उनके परिजनों का समय शाम 5 बजे से 7 बजे तक रखा गया है।
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विभागीय जानकारों का कहना है कि अधिकांश रेलवे कर्मचारी शाम 6 बजे तक कार्यालयों में ऑन-ड्यूटी रहते हैं। ऐसे में ड्यूटी खत्म होने से पहले ही कर्मचारियों का खेल का समय समाप्त हो जाता है। इस व्यावहारिक खामी के कारण कर्मचारी और उनके बच्चे चाहकर भी स्टेडियम का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि जब वो 6 बजे तक दफ्तर में ही रहेंगे, तो 5 बजे स्टेडियम कैसे पहुंचेंगे, यह आदेश उन्हें खेल सुविधाओं से दूर रखने की सोची-समझी साजिश जैसा है।
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अब स्टेडियम में शुल्क के बिना एंट्री पर पाबंदी
रेलवे प्रशासन अब स्टेडियम में प्रवेश के लिए पंजीकरण और मासिक शुल्क वसूलने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि जो स्टेडियम उनके और उनके बच्चों के शारीरिक विकास के लिए निशुल्क होना चाहिए था, अब उसे व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है। बदहाल व्यवस्था के बीच नया शुल्क थोपने से कर्मचारियों में रोष पनपता जा रहा है।
खेल क्लब के तहत अधिकारी भी एक हजार रुपये का शुल्क देते हैं। स्टेडियम के बैडमिंटन हाल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए अगर मामूली शुल्क देना भी पड़े तो उसमें हर्ज क्या है। स्टेडियम में अभी काम चल रहा है, जैसे ही ये तैयार हो जाएगा तो इसे रेल कर्मचारियों व परिजनों के लिए खोल दिया जाएगा।
यशनजीत सिंह, वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक, अंबाला।

अंबाला छावनी के रेलवे स्टेडियम में स्थित बैडमिंटन हाल। संवाद