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Ambala News: करोड़ों खर्च करने के बाद भी शहर नहीं हुआ साफ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 11:06 PM IST
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Even after spending crores, the city is not clean
अंबाला सिटी। करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाई है। कई जगह तो ऐसी हैं, जहां से सुबह 11 बजे तक भी कूड़ा नहीं उठता और कई डंपिंग प्वाइंट पर लोग लिफाफों में बंद कर कूड़ा फेंक रहे हैं।
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इस वजह से सड़क पर भी गंदगी फैलती है। बेसहारा गोवंश कूड़े को सड़क पर बिखेर देते हैं। नगर निगम हाउस में कई बार शहर में सफाई का मुद्दा उठ चुका है और निगम अधिकारी भी कई बार फील्ड में जाकर सफाई व्यवस्था को चेक कर चुके हैं, इसके बाद भी हालात खराब हैं। शहर की पुरानी कॉलोनियों में व्यवस्था ज्यादा खराब है। यही नहीं पब्लिक यूटीलिटी कोर्ट में शहर में गंदगी को लेकर केस विचाराधीन है। वहीं, निगम शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन अभी भी हालात जस के तस हैं।
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आबादी के हिसाब से कर्मचारी कम
नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की कमी से शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए पार्षद कई बार हाउस बैठक से लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री के सामने तक आवाज उठा चुके हैं, मगर अभी तक निगम में कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ी। इस वजह से निगम में कार्य कर रहे कर्मचारियों के ऊपर कार्य का दबाव बढ़ रहा है। निगम के कर्मचारी शहर में सफाई व्यवस्था को तो देख ही रहे हैं, साथ ही बरसाती पानी में पंप चलाने से लेकर पोस्टर और होर्डिंग्स उतारने का कार्य भी इन कर्मचारियों को ही करना पड़ता है। ऐसे में शहर के वार्डों में सफाई कार्य प्रभावित होता है। निगम में 11 नए गांव शामिल किए थे, यहां भी कर्मचारी भेजे जा रहे हैं।
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निगम में 492 सफाई कर्मचारी कार्यरत
शहर में 20 वार्ड हैं। शहर की आबादी के हिसाब से 400 लोगों पर एक सफाई कर्मचारी होना चाहिए, लेकिन निगम में 250 से ज्यादा कर्मचारी की कमी है। अभी निगम में 81 सफाई कर्मचारी नियमित, 411 कर्मचारी पालिका के रोल पर हैं। यही नहीं निगम के पास सफाई से जुड़े संसाधनों की कमी भी है।

कोट्स
भाजपा के कार्यकाल में शहर में सफाई व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। पहले जहां दिन में शहर में सफाई होती थी, अब शहर में रात में भी सफाई हो रही है। नालों की सफाई नगर निगम की ओर से कराई गई। ड्रेन की सफाई के लिए अलग से टेंडर लगाया गया। इस वजह से बरसाती पानी भी कुछ ही घंटे में शहर से उतर जाता है। कांग्रेस की मानसिकता खराब है कि उन्हें शहर में सफाई नहीं दिखती।

अमन सूद, भाजपा के अंबाला शहर अध्यक्ष।
कोट्स
भाजपा सरकार सफाई के नाम पर शून्य रही है। इन्होंने कभी सफाई को लेकर सिस्टम नहीं बनाया। हर वार्ड में एक डंपिंग जोन बनाया जाना था, जिसकी चारदीवारी होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने डंपिंग जोन नहीं बनाए। निगम में सफाई कर्मचारियों की संख्या भी कम है। एक कर्मचारी तीन से चार एरिया संभाल रहा है।
मिथुन वर्मा अधिवक्ता, कांग्रेस नेता और पार्षद।
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