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Ambala News: नोटबंदी के सात साल बाद भी पैक्स की दो सोसायटी में धूल फांक रहे 17.40 लाख

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Nov 2023 12:19 AM IST
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Even after seven years of demonetization, Rs 17.40 lakhs are gathering dust in two PACS societies.
अंशु शर्मा
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अंबाला। प्राइमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसायटी (पैक्स) की दो सोसायटी में नोटबंदी के समय पर जमा 500 और 1000 रुपये के नोट अभी पड़े होने का मामला सामने आया है। अंबाला की बब्याल व खोजकीपुर सोसायटी में 17.40 लाख रुपये की राशि पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि करीब सात साल बीतने के बावजूद अभी तक इस पैसे का क्या किया जाना है। किसकी लापरवाही के चलते यह पैसा इन सोसायटी में रह गया है, इसकी जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है। आरटीआई में मामला उजागर होने के बाद इस संबंध में सीएम विंडो पर भी शिकायत की गई है।
समाजसेवी एडवोकेट अशोक की ओर से इस संबंध में सीएम विंडो पर दी गई शिकायत में बताया गया है कि अंबाला की बब्याल व खोजकीपुर सोसायटी में 1000 और 500 के नोट आज भी पड़े हुए हैं, जबकि वर्षों पहले सरकार ने इसे बंद कर दिया है। बैंक की ओर से ठोस जवाब नहीं मिलने पर इस संबंध में उन्होंने आरटीआई में डिटेल जानकारी भी मांगी है।
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बताया जाता है कि जिस समय यह पैसा बैंकों में जमा हुआ था, उस समय के संबंधित अधिकारी भी रिटायर्ड हो चुके हैं। यह सोसायटी द अंबाला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की महेश नगर शाखा के अधीन आती है। बताया जाता है कि बब्याल सोसायटी में कुल सात लाख 96 हजार रुपये के नोट पड़े हैं, जबकि खोजकीपुर में 9.44 लाख रुपये की राशि पड़ी है। हालांकि नोटों की गिनती की पुष्टि बैंक अधिकारियों ने नहीं की है। मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है कि 2016 में हुई नोटबंदी के बाद यह पैसा जमा हुआ था और मुख्यालय में भेजने का प्रयास हुआ था, लेकिन आरबीआई ने यह पैसा लेने से इंकार कर दिया था। ऐसे में यह पैसा आज भी इन सोसायटियों की तिजोरियों में ज्यों का त्यों पड़ा है। कोई भी अधिकारी इस सरकारी पैसे के मामले को गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं है।
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को-ऑपरेटिव बैंकों में आठ नवंबर को नोटबंदी शुरू हुई थी और आरबीआई ने 14 नवंबर को को-ऑपरेटिव बैंकों पर यह नोट लेने पर रोक लगा दी थी। बाकी शाखाओं में जो उस समय तक पैसा जमा हुआ था वो बदल दिया गया था, लेकिन इस पैसे को लेने से आरबीआई ने इंकार कर दिया था। यह किस कारण नहीं हो पाया इसकी फिलहाल उन्हें जानकारी नहीं है।
जेपी सोनी, जीएम, द अंबाला सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक
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