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अंबाला में अतिक्रमण : गिड़गिड़ाते रहे लेकिन नहीं रुकी जेसीबी
ब्यूरो्\अमर उजाला, अंबाला कैंट
Updated Fri, 04 Apr 2014 12:56 AM IST
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वीरवार को कैंट के बाजारों में प्रशासन ने सीमेंटेड कब्जों पर हथौड़ा चलाया। सुबह करीब पौने आठ बजे शुरू हुई कार्रवाई देर शाम तक चली।
इस दौरान जहां दुकानदारों व कर्मचारियों की नोकझोंक हुई, वहीं अफसरों से जमकर बहसबाजी भी हुई। दुकानदारों ने कार्रवाई में प्रशासन पर ‘पिक एंड चूज़’ की नीति अपनाने के आरोप लगाए, वहीं कुछ नेता अपनी नेतागिरी चमकाने से भी बाज नहीं आए।
यह है मामला
एडवोकेट एसकेएस बेदी ने कैंट के बाजारों में फैले अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बाजारों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए। इस पर निगम ने अंबाला कैंट के कुछ बाजारों से अतिक्रमण हटाए, लेकिन निगम की कार्रवाई बाद में ढीली हो गई थी। इसी पर बेदी ने अवमानना याचिका डाली, जिस पर हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इसी मामले में 11 अप्रैल को सुनवाई है।
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हटाओ अतिक्रमण नहीं तो चलेगी जेसीबी
एसडीएम अंबाला विनय प्रताप सिंह ने दौरा कर दुकानदारों को अल्टीमेटम दे दिया कि दुकानों से अतिक्रमण हटाओ, नहीं तो जेसीबी चलाई जाएगी।
वीरवार सुबह ही पुलिस बल के साथ निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों का अमला कैंट में पहुंचा। विजय रतन चौक से लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई।
लगभग पौने आठ बजे जेसीबी ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, जो देर शाम तक जारी रही। इस दौरान सदर बाजार सहित बजाजा बाजार मेें अवैध कब्जे हटाए गए।
इस दौरान नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी मनेंद्र सिंह, सचिव केके यादव, संजय यादव, कार्यकारी अभियंता एमआर शर्मा, एमई व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
दुकानदारों का हंगामा
प्रशासन का दस्ता जब अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा, तो कुछ देर तक तो ठीक चला, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ने लगीं।
कुछ दुकानदारों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दस्ते का विरोध किया। दुकानदारों ने खुद अतिक्रमण हटाने की बात कही, लेकिन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं हुआ।
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इसी तरह बजाजा बाजार में भी एक दुकान का थड़ा तोड़ने के दौरान दुकानदार ने हंगामा कर दिया। अधिकारी बार-बार दुकानदार को समझाते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद तो दस्ते ने जबरदस्ती दुकान के थड़े को तोड़ा।
यह मनमर्जी की कार्रवाई है
प्रशासन की टीम ने जब अवैध कब्जे तोड़ने शुरू किए तो दुकानदारों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। जैसे-जैसे कार्रवाई बढ़ी, दुकानदार भड़कते गए।
दुकानदारों ने कहा कि निगम की टीम अतिक्रमण हटाने को लेकर सिर्फ दिखावा कर रही है। कहीं पर एक फुट तो कहीं पर दो फुट तोड़ा गया है, जबकि कहीं पर तो दिखावे की कार्रवाई कर छोड़ दिया गया है।
यदि अतिक्रमण की स्थिति एक जैसी है, तो कार्रवाई में अलग-अलग पैमाने क्यों अपनाए जा रहे हैं। इस पर दुकानदार भड़क गए और एसडीएम को खरी-खोटी सुनाने लगे।
इस दौरान एसीपी राहुल देव ने लोगों को समझाने की कोशिश की। काफी देर के बाद लोग शांत हुए। इसी तरह बजाजा बाजार में जब कार्रवाई की जाने लगी, तो एक शोरूम मालिक भड़क गया और कार्रवाई को कई बार बाधित भी किया।
दुकानदारों ने इस बात का भी विरोध किया कि प्रशासन ने बजाजा बाजार से आगे हनुमान मार्केट (पुरानी सब्जी मंडी) में कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि सबसे ज्यादा अतिक्रमण इसी बाजार में है।
याचिकाकर्ता पर पत्थर फेंका
कार्रवाई के दौरान याचिकाकर्ता एडवोकेट एसकेएस बेदी जब बाजार पहुंचे, तो दुकानदार उन्हें देखकर भड़क गए। इसी दौरान भीड़ में से किसी ने याचिकाकर्ता की ओर पत्थर फेंक दिया, बेदी बाल-बाल बच गए। प्रशासन ने भी स्थिति को भांपते हुए इसे संभाला। कुछ देर रुकने के बाद बेदी यहां से चले गए।
यह है प्रशासन का कहना
अंबाला के पूर्व डीसी केएम पांडुरंग ने कई महीने पहले बाजाजा बाजार, सदर बाजार, सब्जी मंडी, बांस बाजार, दाल मंडी, गुड़ मंडी सहित अन्य बाजारों का दौरा करके अतिक्रमण को हटाने के साथ-साथ लोगों को चेतावनी भी दी थी।
इससे पूर्व भी डीसी शेखर विद्यार्थी के कार्यकाल में भी रेलवे रोड, 12 क्रॉस रोड, कबाड़ी बाजार इत्यादि स्थानों से अतिक्रमण हटाने का कार्य किया गया था।
प्रशासन ने कहा, सहयोग मांगा था
प्रशासन का दावा है कि अधिकारियों ने कई बार बाजारों की एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हेें इस कार्य में सहयोग देने का अनुरोध किया था लेकिन अधिकतर दुकानदारों ने आदेशों के प्रति बेरुखी दिखाते हुए अतिक्रमण हटाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
मामले में 28 मार्च के बाद डीसी व नगर निगम के अन्य अधिकारी कई बार बाजारों में गए और दुकानदारों से अतिक्रमण हटाने की बात कही, जबकि मुनादी भी कराई थी।
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इस दौरान जहां दुकानदारों व कर्मचारियों की नोकझोंक हुई, वहीं अफसरों से जमकर बहसबाजी भी हुई। दुकानदारों ने कार्रवाई में प्रशासन पर ‘पिक एंड चूज़’ की नीति अपनाने के आरोप लगाए, वहीं कुछ नेता अपनी नेतागिरी चमकाने से भी बाज नहीं आए।
यह है मामला
एडवोकेट एसकेएस बेदी ने कैंट के बाजारों में फैले अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका डाली थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बाजारों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए। इस पर निगम ने अंबाला कैंट के कुछ बाजारों से अतिक्रमण हटाए, लेकिन निगम की कार्रवाई बाद में ढीली हो गई थी। इसी पर बेदी ने अवमानना याचिका डाली, जिस पर हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इसी मामले में 11 अप्रैल को सुनवाई है।
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हटाओ अतिक्रमण नहीं तो चलेगी जेसीबी
एसडीएम अंबाला विनय प्रताप सिंह ने दौरा कर दुकानदारों को अल्टीमेटम दे दिया कि दुकानों से अतिक्रमण हटाओ, नहीं तो जेसीबी चलाई जाएगी।
वीरवार सुबह ही पुलिस बल के साथ निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों का अमला कैंट में पहुंचा। विजय रतन चौक से लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई।
लगभग पौने आठ बजे जेसीबी ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, जो देर शाम तक जारी रही। इस दौरान सदर बाजार सहित बजाजा बाजार मेें अवैध कब्जे हटाए गए।
इस दौरान नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी मनेंद्र सिंह, सचिव केके यादव, संजय यादव, कार्यकारी अभियंता एमआर शर्मा, एमई व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
दुकानदारों का हंगामा
प्रशासन का दस्ता जब अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा, तो कुछ देर तक तो ठीक चला, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ने लगीं।
कुछ दुकानदारों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दस्ते का विरोध किया। दुकानदारों ने खुद अतिक्रमण हटाने की बात कही, लेकिन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं हुआ।
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इसी तरह बजाजा बाजार में भी एक दुकान का थड़ा तोड़ने के दौरान दुकानदार ने हंगामा कर दिया। अधिकारी बार-बार दुकानदार को समझाते रहे, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद तो दस्ते ने जबरदस्ती दुकान के थड़े को तोड़ा।
यह मनमर्जी की कार्रवाई है
प्रशासन की टीम ने जब अवैध कब्जे तोड़ने शुरू किए तो दुकानदारों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। जैसे-जैसे कार्रवाई बढ़ी, दुकानदार भड़कते गए।
दुकानदारों ने कहा कि निगम की टीम अतिक्रमण हटाने को लेकर सिर्फ दिखावा कर रही है। कहीं पर एक फुट तो कहीं पर दो फुट तोड़ा गया है, जबकि कहीं पर तो दिखावे की कार्रवाई कर छोड़ दिया गया है।
यदि अतिक्रमण की स्थिति एक जैसी है, तो कार्रवाई में अलग-अलग पैमाने क्यों अपनाए जा रहे हैं। इस पर दुकानदार भड़क गए और एसडीएम को खरी-खोटी सुनाने लगे।
इस दौरान एसीपी राहुल देव ने लोगों को समझाने की कोशिश की। काफी देर के बाद लोग शांत हुए। इसी तरह बजाजा बाजार में जब कार्रवाई की जाने लगी, तो एक शोरूम मालिक भड़क गया और कार्रवाई को कई बार बाधित भी किया।
दुकानदारों ने इस बात का भी विरोध किया कि प्रशासन ने बजाजा बाजार से आगे हनुमान मार्केट (पुरानी सब्जी मंडी) में कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि सबसे ज्यादा अतिक्रमण इसी बाजार में है।
याचिकाकर्ता पर पत्थर फेंका
कार्रवाई के दौरान याचिकाकर्ता एडवोकेट एसकेएस बेदी जब बाजार पहुंचे, तो दुकानदार उन्हें देखकर भड़क गए। इसी दौरान भीड़ में से किसी ने याचिकाकर्ता की ओर पत्थर फेंक दिया, बेदी बाल-बाल बच गए। प्रशासन ने भी स्थिति को भांपते हुए इसे संभाला। कुछ देर रुकने के बाद बेदी यहां से चले गए।
यह है प्रशासन का कहना
अंबाला के पूर्व डीसी केएम पांडुरंग ने कई महीने पहले बाजाजा बाजार, सदर बाजार, सब्जी मंडी, बांस बाजार, दाल मंडी, गुड़ मंडी सहित अन्य बाजारों का दौरा करके अतिक्रमण को हटाने के साथ-साथ लोगों को चेतावनी भी दी थी।
इससे पूर्व भी डीसी शेखर विद्यार्थी के कार्यकाल में भी रेलवे रोड, 12 क्रॉस रोड, कबाड़ी बाजार इत्यादि स्थानों से अतिक्रमण हटाने का कार्य किया गया था।
प्रशासन ने कहा, सहयोग मांगा था
प्रशासन का दावा है कि अधिकारियों ने कई बार बाजारों की एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हेें इस कार्य में सहयोग देने का अनुरोध किया था लेकिन अधिकतर दुकानदारों ने आदेशों के प्रति बेरुखी दिखाते हुए अतिक्रमण हटाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
मामले में 28 मार्च के बाद डीसी व नगर निगम के अन्य अधिकारी कई बार बाजारों में गए और दुकानदारों से अतिक्रमण हटाने की बात कही, जबकि मुनादी भी कराई थी।