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शिक्षकों की कमी से जूझ रहा शिक्षा विभाग, विद्यार्थियों के भविष्य पर खतरा
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अंबाला शहर स्थित शिक्षा सदन
- फोटो : Ambala
अंबाला सिटी। जिले भर के सरकारी स्कूल इस समय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। जिले में जितने शिक्षकों की जरूरत है, उससे बहुत कम ही शिक्षक इस समय स्कूलों में छात्रों को पढ़ाई करवा रहे हैं। इसके अलावा समय के साथ-साथ शिक्षकों की संख्या भी दिन पर दिन कम होती जा रही है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि जहां जिले में 1457 जेबीटी शिक्षकों की आवश्यकता है। इसके सापेक्ष जिले में 1068 जेबीटी शिक्षक ही छात्रों को पढ़ा रहे हैं। वर्तमान में जिले में 389 जेबीटी शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। यही स्थिति पीजीटी शिक्षकों की है। जिले में 1 719 पीजीटी शिक्षकों की आवश्यकता है। वर्तमान में यहां 1065 शिक्षक ही छात्रों को पढ़ाई करवा रहे हैं। 654 पद इस समय जिले में खाली पड़े हैं। जिले में प्राचार्य वह मुख्य अध्यापकों की कमी बनी हुई है। जिले में शिक्षकों की कमी के चलते 767 सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कुल 82 हजार 479 बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसके बाद भी अभी तक शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
विषय विशेषज्ञों की खल रही है कमी
जिले के स्कूलों में मुख्य रूप से विषय विशेषज्ञों की कमी खल रही है। क्योंकि बहुत से स्कूल ऐसे हैं जहां पर पंजाबी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, गणित व अन्य बहुत से ऐसे विषय हैं जिनके अध्यापक ही नहीं है। इसके स्थान पर अन्य विषयों के अध्यापक छात्रों को पढ़ाई करवा रहे हैं। इससे छात्रों के लिए उस विषय को समझ पाना काफी मुश्किल हो जा रहा है। यहीं कारण है कि छात्रों को इस कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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शिक्षकों पर पड़ रहा है अतिरिक्त दबाव
लगातार बढ़ रही शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में तैनात शिक्षकों पर ही अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है। क्योंकि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है तो प्रतिमाह शिक्षक कम होते चले जा रहे हैं। वहीं शिक्षकों को उतने ही समय में अधिक कक्षाओं को पढ़ाना पढ़ रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में होने वाली अतिरिक्त गतिविधियों में भी अध्यापक उलझे रहते हैं। इसके चलते अध्यापक चाहकर भी छात्रों को पढ़ाने में असमर्थ हो जाते हैं। शिक्षकों का भी कहना है कि प्रत्येक स्कूल में पर्याप्त संख्या में स्टाफ हो तो इससे छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी काफी लाभ मिलेगा।
प्राइमरी व मिडल स्कूल की स्थिति
ब्लॉक हेड मास्टर टीजीटी जेबीटी
स्वीकृत खाली स्वीकृत खाली स्वीकृत खाली
अंबाला वन 30 26 392 152 362 131
अंबाला टू 32 26 681 240 282 93
बराड़ा 20 14 585 202 217 44
साहा 13 07 509 180 195 50
नारायणगढ़ 20 10 601 192 232 38
शहजादपुर 12 06 428 126 169 33
सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थिति
ब्लॉक प्राचार्य हेड मास्टर पीजीटी
स्वीकृत खाली स्वीकृत खाल स्वीकृत खाली
अंबाला वन 22 03 13 02 395 158
अंबाला टृ 17 02 08 01 290 112
साहा 10 01 15 05 239 95
बराड़ा 16 03 15 05 336 136
साहा 12 02 05 02 205 61
नारायणगढ़ 16 03 06 01 254 92
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जल्द ही स्थानांतरण प्रक्रिया होगी, उम्मीद है कि उस समय शिक्षकों की कमी दूर हो जाएगी। इससे कि छात्रों को फायदा मिलेेगा।
- सुरेश कुमार, डीईओ, अंबाला।
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हालात यह हैं कि जहां जिले में 1457 जेबीटी शिक्षकों की आवश्यकता है। इसके सापेक्ष जिले में 1068 जेबीटी शिक्षक ही छात्रों को पढ़ा रहे हैं। वर्तमान में जिले में 389 जेबीटी शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। यही स्थिति पीजीटी शिक्षकों की है। जिले में 1 719 पीजीटी शिक्षकों की आवश्यकता है। वर्तमान में यहां 1065 शिक्षक ही छात्रों को पढ़ाई करवा रहे हैं। 654 पद इस समय जिले में खाली पड़े हैं। जिले में प्राचार्य वह मुख्य अध्यापकों की कमी बनी हुई है। जिले में शिक्षकों की कमी के चलते 767 सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कुल 82 हजार 479 बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसके बाद भी अभी तक शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है।
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विषय विशेषज्ञों की खल रही है कमी
जिले के स्कूलों में मुख्य रूप से विषय विशेषज्ञों की कमी खल रही है। क्योंकि बहुत से स्कूल ऐसे हैं जहां पर पंजाबी, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान, गणित व अन्य बहुत से ऐसे विषय हैं जिनके अध्यापक ही नहीं है। इसके स्थान पर अन्य विषयों के अध्यापक छात्रों को पढ़ाई करवा रहे हैं। इससे छात्रों के लिए उस विषय को समझ पाना काफी मुश्किल हो जा रहा है। यहीं कारण है कि छात्रों को इस कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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शिक्षकों पर पड़ रहा है अतिरिक्त दबाव
लगातार बढ़ रही शिक्षकों की कमी के कारण स्कूलों में तैनात शिक्षकों पर ही अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है। क्योंकि स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है तो प्रतिमाह शिक्षक कम होते चले जा रहे हैं। वहीं शिक्षकों को उतने ही समय में अधिक कक्षाओं को पढ़ाना पढ़ रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में होने वाली अतिरिक्त गतिविधियों में भी अध्यापक उलझे रहते हैं। इसके चलते अध्यापक चाहकर भी छात्रों को पढ़ाने में असमर्थ हो जाते हैं। शिक्षकों का भी कहना है कि प्रत्येक स्कूल में पर्याप्त संख्या में स्टाफ हो तो इससे छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी काफी लाभ मिलेगा।
प्राइमरी व मिडल स्कूल की स्थिति
ब्लॉक हेड मास्टर टीजीटी जेबीटी
स्वीकृत खाली स्वीकृत खाली स्वीकृत खाली
अंबाला वन 30 26 392 152 362 131
अंबाला टू 32 26 681 240 282 93
बराड़ा 20 14 585 202 217 44
साहा 13 07 509 180 195 50
नारायणगढ़ 20 10 601 192 232 38
शहजादपुर 12 06 428 126 169 33
सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल की स्थिति
ब्लॉक प्राचार्य हेड मास्टर पीजीटी
स्वीकृत खाली स्वीकृत खाल स्वीकृत खाली
अंबाला वन 22 03 13 02 395 158
अंबाला टृ 17 02 08 01 290 112
साहा 10 01 15 05 239 95
बराड़ा 16 03 15 05 336 136
साहा 12 02 05 02 205 61
नारायणगढ़ 16 03 06 01 254 92
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जल्द ही स्थानांतरण प्रक्रिया होगी, उम्मीद है कि उस समय शिक्षकों की कमी दूर हो जाएगी। इससे कि छात्रों को फायदा मिलेेगा।
- सुरेश कुमार, डीईओ, अंबाला।