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चालक मनमर्जी से कर रहे वाहन पार्क, यात्री परेशान
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स्टेशन पर सर्विस लेन में खड़े वाहन
- फोटो : Ambala
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इस वर्ष भी अंबाला रेलवे जंक्शन की मल्टी लेवल पार्किंग की सुविधा फाइलों में दबी रह गई। यहां काफी संख्या में रोजाना वाहनों का आवागमन होता है। अब नववर्ष पर इस सुविधा के मिलने की उम्मीद जताई गई है। जबकि स्टेशन पर लगातार बढ़ रही वाहनों की तादाद से रेलवे को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं रेलवे परिसर और सर्विस लेन में खड़े वाहनों की वजह से सुरक्षा एजेंसियों सहित यात्री भी परेशान हैं। पिछले दिनों मंडल रेल कार्यालय में उपभोक्ता समिति की बैठक में भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी।
ट्रेनों का संचालन आरंभ होते ही स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की तादाद भी अब सैकड़ों से हजारों में पहुंचने लगी है। इस कारण कार सहित अन्य दोपहिया वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। मगर, लगातार बढ़ रही वाहनों की तादाद से स्टेशन पर चल रही कार व दोपहिया पार्किंग अब छोटी पड़ने लगी है। कार पार्किंग में कार्यरत कर्मचारी पवन ने बताया कि रोजाना 100 से अधिक वाहन आ रहे हैं। मगर, कार पार्किंग में मात्र 70 वाहन खड़ा करने की सुविधा है। इसलिए वाहन चालक मजबूर होकर अपने वाहनों को सर्विस लेन में खड़ा कर रहे हैं।
वहीं मल्टी लेवल पार्किंग न होने का खामियाजा रेलवे कर्मचारियों को भी झेलना पड़ रहा है।
उन्हें भी रेलवे परिसर के नो पार्किंग जोन में अपने वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं। कुछ समय पहले रेलवे स्टेशनों को पीपीपी मोड यानी पब्लिक प्राइवेट गठबंधन के तहत कायाकल्प करने की रेलवे ने योजना तैयार की थी। मगर, इस योजना को सिरे चढ़ने में अभी कुछ समय लग सकता है। मंडल का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन होने के बाद भी आजतक न तो सुरक्षा के प्रबंध पुख्ता हो पाए हैं और न ही वाहन पार्किंग को लेकर व्यवस्थाएं सुधर पाई हैं।
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150 से अधिक ट्रेनों का संचालन
कोरोना काल के बाद लंबी दूरी की लगभग 200 ट्रेनों में से 150 ट्रेनों का संचालन आरंभ हो चुका है। इसमें आरक्षित और अनारक्षित कोच के साथ चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं। जहां पहले यात्रियों की संख्या 600 से 700 के करीब होती थी, वहीं अब यात्रियों की संख्या पांच से छह हजार तक पहुंच गई है। इस कारण स्टेशन पर पहले के मुकाबले काफी चहल-पहल भी नजर आने लगी है।
खाली पार्किंग का टैक्सी चालक उठा रहे फायदा
स्टेशन पर बनी दो कार पार्किंग में से एक कार पार्किंग रेलवे परिसर में चल रही है। वहीं आरपीएफ पोस्ट के समक्ष दूसरी कार पार्किंग का फायदा टैक्सी व ऑटो चालक उठा रहे हैं, वो भी बिना पैसे दिए। पूरा दिन ऐसे चालक स्टेशन के एस्कलेटर के पास सक्रिय रहते हैं और ट्रेन से उतरने वाली सवारियों से परिसर में ही मोलभाव कर टैक्सियों का संचालन कर रहे हैं।
योजना हो रही तैयार
स्टेशन पर मल्टी लेवल पार्किंग को लेकर योजना तैयार की जा रही है, ताकि वाहन चालकों को राहत मिल सके। रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन में योजना पर कार्य किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव जल्द ही तैयार कर मुख्यालय भेजा जाएगा।
-हरि मोहन, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक।
काट रहे चालान
पार्किंग के बाहर सर्विस लेन में खड़े वाहनों के लगातार चालान काटे जा रहे हैं। स्टेशन परिसर में ही कुछ रेलवे कार्यालय हैं, उनमें कार्यरत कर्मचारी परिसर में अपने वाहन खड़ा कर रहे हैं। पहले उन्हें चेतावनी दी जाएगी। अगर फिर भी नहीं सुधरे तो चालान काटा जाएगा।
-धर्मवीर सिंह, थाना प्रभारी जीआरपी।
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ट्रेनों का संचालन आरंभ होते ही स्टेशन पर आने वाले यात्रियों की तादाद भी अब सैकड़ों से हजारों में पहुंचने लगी है। इस कारण कार सहित अन्य दोपहिया वाहनों का आवागमन भी शुरू हो गया है। मगर, लगातार बढ़ रही वाहनों की तादाद से स्टेशन पर चल रही कार व दोपहिया पार्किंग अब छोटी पड़ने लगी है। कार पार्किंग में कार्यरत कर्मचारी पवन ने बताया कि रोजाना 100 से अधिक वाहन आ रहे हैं। मगर, कार पार्किंग में मात्र 70 वाहन खड़ा करने की सुविधा है। इसलिए वाहन चालक मजबूर होकर अपने वाहनों को सर्विस लेन में खड़ा कर रहे हैं।
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वहीं मल्टी लेवल पार्किंग न होने का खामियाजा रेलवे कर्मचारियों को भी झेलना पड़ रहा है।
उन्हें भी रेलवे परिसर के नो पार्किंग जोन में अपने वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं। कुछ समय पहले रेलवे स्टेशनों को पीपीपी मोड यानी पब्लिक प्राइवेट गठबंधन के तहत कायाकल्प करने की रेलवे ने योजना तैयार की थी। मगर, इस योजना को सिरे चढ़ने में अभी कुछ समय लग सकता है। मंडल का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन होने के बाद भी आजतक न तो सुरक्षा के प्रबंध पुख्ता हो पाए हैं और न ही वाहन पार्किंग को लेकर व्यवस्थाएं सुधर पाई हैं।
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150 से अधिक ट्रेनों का संचालन
कोरोना काल के बाद लंबी दूरी की लगभग 200 ट्रेनों में से 150 ट्रेनों का संचालन आरंभ हो चुका है। इसमें आरक्षित और अनारक्षित कोच के साथ चलने वाली ट्रेनें शामिल हैं। जहां पहले यात्रियों की संख्या 600 से 700 के करीब होती थी, वहीं अब यात्रियों की संख्या पांच से छह हजार तक पहुंच गई है। इस कारण स्टेशन पर पहले के मुकाबले काफी चहल-पहल भी नजर आने लगी है।
खाली पार्किंग का टैक्सी चालक उठा रहे फायदा
स्टेशन पर बनी दो कार पार्किंग में से एक कार पार्किंग रेलवे परिसर में चल रही है। वहीं आरपीएफ पोस्ट के समक्ष दूसरी कार पार्किंग का फायदा टैक्सी व ऑटो चालक उठा रहे हैं, वो भी बिना पैसे दिए। पूरा दिन ऐसे चालक स्टेशन के एस्कलेटर के पास सक्रिय रहते हैं और ट्रेन से उतरने वाली सवारियों से परिसर में ही मोलभाव कर टैक्सियों का संचालन कर रहे हैं।
योजना हो रही तैयार
स्टेशन पर मल्टी लेवल पार्किंग को लेकर योजना तैयार की जा रही है, ताकि वाहन चालकों को राहत मिल सके। रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन में योजना पर कार्य किया जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव जल्द ही तैयार कर मुख्यालय भेजा जाएगा।
-हरि मोहन, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक।
काट रहे चालान
पार्किंग के बाहर सर्विस लेन में खड़े वाहनों के लगातार चालान काटे जा रहे हैं। स्टेशन परिसर में ही कुछ रेलवे कार्यालय हैं, उनमें कार्यरत कर्मचारी परिसर में अपने वाहन खड़ा कर रहे हैं। पहले उन्हें चेतावनी दी जाएगी। अगर फिर भी नहीं सुधरे तो चालान काटा जाएगा।
-धर्मवीर सिंह, थाना प्रभारी जीआरपी।

नो पार्किंग जोन में खड़े रेलवे केमचारियों के वाहन- फोटो : Ambala