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Ambala News: अंबाला में 25000 एकड़ में होगी धान की सीधी बिजाई
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जलबेड़ा में डीएसआर धान के लिए तैयार हुआ खेत। संवाद
-पिछले साल के मुकाबले साढ़े 15 हजार एकड़ में अतिरिक्त होगी धान की सीधी बिजाई
- पिछले साल साढ़े 9 हजार एकड़ में थी धान की सीधी बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी,
जलबेड़ा। राज्य में पानी की कमी और बढ़ते श्रम खर्चे से जूझ रहे किसानों को सरकार एक बार फिर से धान में सीधी बिजाई की तरफ प्रोत्साहित कर रही है। अंबाला में पिछले साल साढ़े 9 हजार एकड़ में किसानों ने सीधी बिजाई से धान उगाया था। एक साल बाद इसका किसानों को फायदा दिखा तो इस बार सीधी बिजाई का रकबा का लक्ष्य बढ़ गया है। इस बाद 25 हजार एकड़ में किसान इस पद्धति से धान लगाएंगे। पिछले साल के मुकाबले साढ़े 15 हजार एकड़ रकबा बढ़ाया गया है। इसका प्रमुख कारण है कि किसानों को अब सीधी बिजाई धान उगाने के फायदे दिखने लगे हैं।
प्रदेश में 3 लाख एकड़ का लक्ष्य
सरकार ने डीएसआर पद्धति द्वारा धान की सीधी बिजाई के लिए पूरे राज्य में 3 लाख एकड़ का लक्ष्य रखा है। पिछले कुछ वर्षों में इस पद्धति से धान उगाने पर किसानों को मुनाफा भी मिल रहा है और पानी की खपत भी कम हो गई है। इसके साथ ही फसल बीमारियों से भी बच जाती है। इस बार 20 जून तक किसान धान की सीधी बिजाई कर सकते हैं।
बॉक्स
दो विधियों से होगी बिजाई
यह बिजाई दो विधियों द्वारा की जाती है। जिसमें पहली विधि मशीन द्वारा तो दूसरी विधि में हाथ से धान की बिजाई होती है। मशीन द्वारा धान की बिजाई करवाई जाए तो वह अति उत्तम मानी जाती है। इसमें पौधे की पौधे से लंबाई व चौड़ाई एक समान होती है। इससे प्रति एकड़ पैदावार ज्यादा होने की संभावना रहती है। सीधी बिजाई में मजदूरी की बचत होती है साथ ही साथ 30 से 40 प्रतिशत पानी की भी बचत होती है। सरकार भी प्रति एकड़ 4500 रुपये सब्सिडी किसान को भेजती है, जिसके कारण किसानों में इस और रुझान बढ़ रहा है। सीधी बिजाई से धान अंबाला यमुनानगर और कुरुक्षेत्र आदि में लगाया जाता है।
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सरकार ने अंबाला को जो लक्ष्य दिया है उसे पूरा किया जाएगा। इससे किसानों का बहुत ज्यादा लाभ होगा क्योंकि डीएसआर को लेकर किसानों में बहुत ज्यादा उत्साह है। सफेद कीट का हमला भी ट्रांसप्लांट तरीके वाली धान की अपेक्षा इसमें काम होता है।
जसविंदर सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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- पिछले साल साढ़े 9 हजार एकड़ में थी धान की सीधी बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी,
जलबेड़ा। राज्य में पानी की कमी और बढ़ते श्रम खर्चे से जूझ रहे किसानों को सरकार एक बार फिर से धान में सीधी बिजाई की तरफ प्रोत्साहित कर रही है। अंबाला में पिछले साल साढ़े 9 हजार एकड़ में किसानों ने सीधी बिजाई से धान उगाया था। एक साल बाद इसका किसानों को फायदा दिखा तो इस बार सीधी बिजाई का रकबा का लक्ष्य बढ़ गया है। इस बाद 25 हजार एकड़ में किसान इस पद्धति से धान लगाएंगे। पिछले साल के मुकाबले साढ़े 15 हजार एकड़ रकबा बढ़ाया गया है। इसका प्रमुख कारण है कि किसानों को अब सीधी बिजाई धान उगाने के फायदे दिखने लगे हैं।
प्रदेश में 3 लाख एकड़ का लक्ष्य
सरकार ने डीएसआर पद्धति द्वारा धान की सीधी बिजाई के लिए पूरे राज्य में 3 लाख एकड़ का लक्ष्य रखा है। पिछले कुछ वर्षों में इस पद्धति से धान उगाने पर किसानों को मुनाफा भी मिल रहा है और पानी की खपत भी कम हो गई है। इसके साथ ही फसल बीमारियों से भी बच जाती है। इस बार 20 जून तक किसान धान की सीधी बिजाई कर सकते हैं।
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दो विधियों से होगी बिजाई
यह बिजाई दो विधियों द्वारा की जाती है। जिसमें पहली विधि मशीन द्वारा तो दूसरी विधि में हाथ से धान की बिजाई होती है। मशीन द्वारा धान की बिजाई करवाई जाए तो वह अति उत्तम मानी जाती है। इसमें पौधे की पौधे से लंबाई व चौड़ाई एक समान होती है। इससे प्रति एकड़ पैदावार ज्यादा होने की संभावना रहती है। सीधी बिजाई में मजदूरी की बचत होती है साथ ही साथ 30 से 40 प्रतिशत पानी की भी बचत होती है। सरकार भी प्रति एकड़ 4500 रुपये सब्सिडी किसान को भेजती है, जिसके कारण किसानों में इस और रुझान बढ़ रहा है। सीधी बिजाई से धान अंबाला यमुनानगर और कुरुक्षेत्र आदि में लगाया जाता है।
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सरकार ने अंबाला को जो लक्ष्य दिया है उसे पूरा किया जाएगा। इससे किसानों का बहुत ज्यादा लाभ होगा क्योंकि डीएसआर को लेकर किसानों में बहुत ज्यादा उत्साह है। सफेद कीट का हमला भी ट्रांसप्लांट तरीके वाली धान की अपेक्षा इसमें काम होता है।
जसविंदर सिंह, जिला कृषि अधिकारी