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Ambala News: अंगद और रावण का संवाद, मेघनाद का वध
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अंबाला। छावनी के खुखरैन भवन में श्रीराम लीला कमेटी बजाजा बाजार की ओर से श्री रामलीला दशहरा महोत्सव मनाया जा रहा है। वृंदावन के श्रीधाम से पधारे नीलांचल मंंडल के पंडित देवदत्त वशिष्ठ और प्रेम चंद वशिष्ठ द्वारा श्रीराम लीला का मंचन किया गया। रामलीला के 10वें दिन गणेश पूजन, समुद्र के ऊपर पुल का निर्माण राम जी की ओर से, शंभू स्थापना, अंगद, रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध और मेघनाद वध की लीलाओं को दर्शाया गया।
पंडित प्रेम चंद वशिष्ठ ने बताया कि सबसे पहले गणेश पूजन किया। इसके बाद भगवान श्रीराम की वानर सेना द्वारा समुद्र पर पुल बनाया गया था। इस पुल को राम सेतु कहा जाता है। श्रीराम को रावण की नगरी लंका में जाना था। इसलिए इस पुल का निर्माण किया गया। इस पुल के ऊपर से होकर श्रीराम की सेना लंका पहुंची थी। इसके बाद शंभू की स्थापना की गई। अंगद और रावण संवाद में बताया गया कि कैसे रावण मौन होकर अपने स्थल पर विराजमान हो गया। रावण जब खुद अंगद के पांव उठाने आया तो अंगद ने कहा कि मेरे पांव क्यों पकड़ते हो, अगर पकड़ने हैं तो, मेरे स्वामी श्री राम के चरण पकड़ लो। इसके बाद लक्ष्मण शक्ति और कुंभकरण के वध को दिखाया गया।
भगवन श्रीराम ने इन्द्रास्त्र चलाकर कुंभकरण की दोनों भुजाएं काट डाली। इसके बाद राम ने ब्रह्म दंड चलाया। इससे कुंभकरण का मस्तक कटकर समुंद्र में जा गिरा इस तरह से कुंभकरण का वध दिखाया गया। जब श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था तो लक्ष्मण ने अपने बाण से मेघनाद का सिर धड़ से अलग कर उसका वध कर दिया।
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पंडित प्रेम चंद वशिष्ठ ने बताया कि सबसे पहले गणेश पूजन किया। इसके बाद भगवान श्रीराम की वानर सेना द्वारा समुद्र पर पुल बनाया गया था। इस पुल को राम सेतु कहा जाता है। श्रीराम को रावण की नगरी लंका में जाना था। इसलिए इस पुल का निर्माण किया गया। इस पुल के ऊपर से होकर श्रीराम की सेना लंका पहुंची थी। इसके बाद शंभू की स्थापना की गई। अंगद और रावण संवाद में बताया गया कि कैसे रावण मौन होकर अपने स्थल पर विराजमान हो गया। रावण जब खुद अंगद के पांव उठाने आया तो अंगद ने कहा कि मेरे पांव क्यों पकड़ते हो, अगर पकड़ने हैं तो, मेरे स्वामी श्री राम के चरण पकड़ लो। इसके बाद लक्ष्मण शक्ति और कुंभकरण के वध को दिखाया गया।
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भगवन श्रीराम ने इन्द्रास्त्र चलाकर कुंभकरण की दोनों भुजाएं काट डाली। इसके बाद राम ने ब्रह्म दंड चलाया। इससे कुंभकरण का मस्तक कटकर समुंद्र में जा गिरा इस तरह से कुंभकरण का वध दिखाया गया। जब श्रीराम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था तो लक्ष्मण ने अपने बाण से मेघनाद का सिर धड़ से अलग कर उसका वध कर दिया।
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