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Ambala News: बासवाड़ा मेले में भक्तों ने मांगी मन्नतें
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अंबाला। हर साल की भांति इस साल छावनी की जोगी मंडी और कुम्हार मंडी स्थित श्री माता महारानी, शीतला माता मंदिर में सोमवार की सुबह बासवाड़ा मेला लगाया गया। इसमें सुबह पांच बजे से ही भक्त आने लगे और शीतला माता के दर्शन के लिए भक्त लंबी लगाकर खड़े दिखाई दिए।
मंदिर उप प्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने बताया यह बासवाड़ा का मेला मंगलवार को भी लगाया जाएगा। होली के एक सप्ताह बाद आने वाले पहले सोमवार और मंगलवार को इस मेले का आयोजन किया जाता है। वहीं मंदिर में मेले के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। मेले में श्रद्धालुओं के लिए सभी सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। मंदिर पर भव्य सजावट की गई है। इस मंदिर की मान्यता दूर तक फैली है। यहां पर अन्य जगहों से लोग मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
नवरात्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है मंदिर
महारानी दुर्गा देवी शीतला माता मंदिर नवरात्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। भक्तगण मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दूरदराज से माथा टेकने आते हैं। मां दुर्गा के साथ-साथ मंदिर में शीतला माता के स्वरूप की भी पूजा की जाती है। नवरात्र पर माता रानी का श्रृंगार करने के अलावा पूजा पाठ और कीर्तन किया जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को मनचाहा फल मिलता है।
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यह है मंदिर का इतिहास
मंदिर उप प्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने बताया कि इस मंदिर को बने हुए 85 साल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि प्राचीन श्री माता महारानी दुर्गा देवी मंदिर की स्थापना वर्ष 1939 में की गई थी। यह मंदिर दो एकड़ में फैला हुआ है। साल 1942 में दूसरे विश्व युद्ध में शामिल होने भारत से जो सैनिक गए थे। उसने साथ ही गिहारा समाज के लोग सेना में ब्रिटिश बटालियन के लिए खाना बनाने का काम करते थे। जिनकी संख्या 50 से 100 तक थी।
वह भी उनके साथ विश्व युद्ध में गए थे। इन लोगों के जाने के बाद घर की महिलाओं ने घर के सदस्यों और सैनिकों की सही सलामत वापसी की पर भव्य मंदिर निमार्ण करवाने की मन्नत मांगी थी। माता महारानी दुर्गा देवी के पवित्र स्वरूप की स्थापना वर्ष 1945 में पूरे विधि विधान के साथ की गई थी।
मंदिर परिसर में ही शीतला माता के पूजन के लिए अलग से जगह बनाई गई थी।ऐसा माना जाता है कि जो भक्त अपने लिए फल मांगता है माता उसे पूरा करती है। पहले के समय में भक्त मन्नत मांगते थे और मंदिर परिसर में ईंटों से छोटे-छोटे अस्थाई मकान बनाए जाते हैं।
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मंदिर उप प्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने बताया यह बासवाड़ा का मेला मंगलवार को भी लगाया जाएगा। होली के एक सप्ताह बाद आने वाले पहले सोमवार और मंगलवार को इस मेले का आयोजन किया जाता है। वहीं मंदिर में मेले के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। मेले में श्रद्धालुओं के लिए सभी सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। मंदिर पर भव्य सजावट की गई है। इस मंदिर की मान्यता दूर तक फैली है। यहां पर अन्य जगहों से लोग मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
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नवरात्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है मंदिर
महारानी दुर्गा देवी शीतला माता मंदिर नवरात्र में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। भक्तगण मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दूरदराज से माथा टेकने आते हैं। मां दुर्गा के साथ-साथ मंदिर में शीतला माता के स्वरूप की भी पूजा की जाती है। नवरात्र पर माता रानी का श्रृंगार करने के अलावा पूजा पाठ और कीर्तन किया जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को मनचाहा फल मिलता है।
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यह है मंदिर का इतिहास
मंदिर उप प्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने बताया कि इस मंदिर को बने हुए 85 साल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि प्राचीन श्री माता महारानी दुर्गा देवी मंदिर की स्थापना वर्ष 1939 में की गई थी। यह मंदिर दो एकड़ में फैला हुआ है। साल 1942 में दूसरे विश्व युद्ध में शामिल होने भारत से जो सैनिक गए थे। उसने साथ ही गिहारा समाज के लोग सेना में ब्रिटिश बटालियन के लिए खाना बनाने का काम करते थे। जिनकी संख्या 50 से 100 तक थी।
वह भी उनके साथ विश्व युद्ध में गए थे। इन लोगों के जाने के बाद घर की महिलाओं ने घर के सदस्यों और सैनिकों की सही सलामत वापसी की पर भव्य मंदिर निमार्ण करवाने की मन्नत मांगी थी। माता महारानी दुर्गा देवी के पवित्र स्वरूप की स्थापना वर्ष 1945 में पूरे विधि विधान के साथ की गई थी।
मंदिर परिसर में ही शीतला माता के पूजन के लिए अलग से जगह बनाई गई थी।ऐसा माना जाता है कि जो भक्त अपने लिए फल मांगता है माता उसे पूरा करती है। पहले के समय में भक्त मन्नत मांगते थे और मंदिर परिसर में ईंटों से छोटे-छोटे अस्थाई मकान बनाए जाते हैं।