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Ambala News: मुलाना में विकास का मुद्दा अहम, नींव पत्थर पर अटकी राजनीति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Sep 2024 12:28 AM IST
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Development issue is important in Mullana, politics stuck on foundation stone
मुलाना। आरक्षित सीट मुलाना चर्चित सीट मानी जाती रही है। प्रत्याशी अपने प्रचार के लिए क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण इलाकों में घूम रहे हैं। जनसभाओं में ज्यादातर इलाके का विकास न होना, बेरोजगारी, टूटी सड़कें, बरसाती पानी की निकासी के मुद्दे गूंज रहे हैं।
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यहां विकास और बेरोजगारी का मुद्दा सबसे अहम है। 2014 में भाजपा की सरकार बनी तो संतोष सारवान विधायक बनी थी। वह अब फिर चुनावी मैदान में है। 2019 में दोबारा भाजपा की सरकार बनी तो यहां से कांग्रेस के वरुण चौधरी करीबी मुकाबले में जीते थे।
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क्षेत्र में नींव पत्थर सबसे ज्यादा किसने लगाए हल्के की राजनीति इस पर घूम रही हैं। प्रत्याशी अपनी पार्टी के कार्यकाल के काम गिना रहे हैं कि उन्होंने इलाके के लिए कौन-कौन से कार्य किए।
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शहरी क्षेत्र के साथ 172 गांव हल्के में
वहीं, मुलाना क्षेत्र में पिछले कई वर्षों में नौकरी के लिए कोई इंडस्ट्री भी नहीं आई है। युवाओं को नौकरी का भी बड़ा मुद्दा है। बेसहारा गोवंश भी सड़कों पर घूमते रहते हैं। हल्के में कई जगह बारिश में ऐसी स्थिति भी बन गई है कि सड़कों में गड्ढे हो गए हैं। इस सीट पर भाजपा से संतोष सारवान, कांग्रेस से पूजा चौधरी, आप से गुरतेज सिंह, जजपा से डॉ. रविंद्र धीन, इनेलो-बसपा से प्रकाश भारती चुनावी मैदान में हैं। मुलाना हल्के में साहा, मुलाना, बराड़ा, मोहड़ा चार मंडल आते हैं। मुलाना हल्के में शहरी एरिया क्षेत्र और करीब 172 गांव हैं।
इस सीट पर इतने मतदाता

मुलाना सीट पर एक लाख 18 हजार 700 पुरुष और एक लाख चार हजार 922 महिला और तीन थर्ड जेंडर मतदाता हैं। कुल दो लाख 23 हजार 625 मतदाता हैं। इनमें 1963 पीडब्ल्यूडी, 2477 मतदाता 85 वर्ष से ज्यादा आयु के,100 वर्ष से ज्यादा आयु के 130, एनआरआई चार, सर्विस वोटर 1206 और 18 से 19 वर्ष के 4501 मतदाता हैं।
वर्जन
भाजपा सरकार ने मुलाना हलके में कोई विकास कार्य नहीं कराया। हलके में बेरोजगारी, महंगाई मुद्दे चरम पर हैं। सड़कें टूटी पड़ी हैं। उनके क्षेत्र में भाजपा सरकार ने कोई प्रोजेक्ट नहीं दिया। सांसद वरुण चौधरी ने विधायक रहते हुए इलाके के विकास के लिए प्रयास किए और विधानसभा में भी मुद्दों को उठाया, लेकिन सरकार ने ग्रांट देने में भेदभाव किया। इससे विकास कार्य प्रभावित हुए। दोसड़का से अंबाला की तरफ आने के दौरान सड़क पर बरसाती पानी जमा हो जाता है। यहां सड़क में गड्ढे भी हो गए हैं। इस वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

राजेश्वर दास, कांग्रेस नेता।
वर्जन
तंदवाल में मारकंडा पुल बनवाया जाना है और बराड़ा में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। 2014 में संतोष सारवान के विधायक बनने के बाद हल्के में सफाई व्यवस्था सुधरी थी, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में सफाई व्यवस्था चरमरा गई। क्षेत्र में बेसहारा गोवंश की समस्या हैं। क्षेत्र में जो भी विकास कार्य पहले करवाए गए हैं, वह भाजपा सरकार ने ही करवाए। संतोष सारवान के कार्यकाल में कई नींव पत्थर क्षेत्र में लगे थे। कांग्रेस ने यहां कोई कार्य नहीं करवाया।
प्रवेश महेंदीरत्ता, पूर्व जिला सह मीडिया प्रभारी, भाजपा।
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