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Ambala News: महिलाओं के लिए बनीं, अब पुरुष भी कर रहे पिंक बसों में सफर
Mon, 21 Sep 2026 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Mon, 21 Sep 2026 01:54 AM IST
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अंबाला छावनी बस अड्डे पर खड़ी पिंक बस। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। करीब सात साल पहले शुरू की गई पिंक बसें अब सामान्य बसों की तरह ग्रामीण और शहरी मार्गों पर चलाई जा रही हैं। इन बसों में केवल महिला यात्रियों और स्कूली-कॉलेज की छात्राओं को ही सफर करने की अनुमति थी, जिससे महिलाएं बेझिझक और आराम से यात्रा कर पाती थीं। जब से इन बसों में पुरुषों की आवाजाही शुरू हुई है, तब से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोडवेज द्वारा अंबाला डिपो को नौ पिंक बसें सौंपी गई थीं। इनमें से छह बसें अंबाला सिटी और तीन बसें नारायणगढ़ सब-डिपो के अधीन चलाई जा रही थीं। कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद इन बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया था। जब स्थितियां सामान्य हुईं और बसों को दोबारा सड़कों पर उतारा गया, तो शुरुआती दौर में इन पिंक बसों में महिला यात्रियों की संख्या काफी कम दर्ज की गई। बसें खाली चलने के कारण विभाग को राजस्व का नुकसान होने लगा। इसके बाद रोडवेज प्रशासन ने करीब पांच साल पहले नीति में बदलाव करते हुए इन बसों में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष यात्रियों को भी बैठाना शुरू कर दिया।
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सामान्य बस में धक्का-मुक्की करने को मजबूर
स्नेहा ने बताया कि पिंक बस बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी हम छात्राओं को हो रही है। सुबह कॉलेज जाने के समय सामान्य बसों में इतनी भीड़ होती है कि धक्का-मुक्की के बीच सफर करना पड़ता है।
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पुरुषों के कारण होता है असहज महसूस
रीना देवी ने बताया कि काम पर आने-जाने के लिए रोज बस से ही सफर करती है। जब पिंक बस चलती थी तो आराम से सीट मिल जाती थी। अब पुरुषों की मौजूदगी और भीड़ के कारण पूरी यात्रा में असहज महसूस होता है।
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खड़े होकर सफर करना मुश्किल
पूजा ने बताया कि गांव से शहर पढ़ने आने के लिए बसों में भारी भीड़ का सामना करना पड़ता है। लोकल रूटों पर चलने वाली बसों में पुरुषों के बीच खड़े होकर सफर करना बहुत मुश्किल होता है।
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पिंक बसों में मिलती थी राहत
सुनीता ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव पर भीड़भाड़ वाली आम बसों में चढ़ना और खड़े रहना बहुत कठिन है। पिंक बस में महिलाओं के लिए बहुत बड़ा सहारा थीं। अब इनमें भी पुरुषों को बैठाया जा रहा है।
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वर्जन....
इसके बारे में जानकारी नहीं हैं पता करके ही बताया जा सकता है कि महिलाओं के लिए कितनी बसें चलाई जा रही है।
गुरनाम सिंह, मुख्य निरीक्षक, अंबाला डिपो।
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अंबाला। करीब सात साल पहले शुरू की गई पिंक बसें अब सामान्य बसों की तरह ग्रामीण और शहरी मार्गों पर चलाई जा रही हैं। इन बसों में केवल महिला यात्रियों और स्कूली-कॉलेज की छात्राओं को ही सफर करने की अनुमति थी, जिससे महिलाएं बेझिझक और आराम से यात्रा कर पाती थीं। जब से इन बसों में पुरुषों की आवाजाही शुरू हुई है, तब से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोडवेज द्वारा अंबाला डिपो को नौ पिंक बसें सौंपी गई थीं। इनमें से छह बसें अंबाला सिटी और तीन बसें नारायणगढ़ सब-डिपो के अधीन चलाई जा रही थीं। कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद इन बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया था। जब स्थितियां सामान्य हुईं और बसों को दोबारा सड़कों पर उतारा गया, तो शुरुआती दौर में इन पिंक बसों में महिला यात्रियों की संख्या काफी कम दर्ज की गई। बसें खाली चलने के कारण विभाग को राजस्व का नुकसान होने लगा। इसके बाद रोडवेज प्रशासन ने करीब पांच साल पहले नीति में बदलाव करते हुए इन बसों में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष यात्रियों को भी बैठाना शुरू कर दिया।
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सामान्य बस में धक्का-मुक्की करने को मजबूर
स्नेहा ने बताया कि पिंक बस बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी हम छात्राओं को हो रही है। सुबह कॉलेज जाने के समय सामान्य बसों में इतनी भीड़ होती है कि धक्का-मुक्की के बीच सफर करना पड़ता है।
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पुरुषों के कारण होता है असहज महसूस
रीना देवी ने बताया कि काम पर आने-जाने के लिए रोज बस से ही सफर करती है। जब पिंक बस चलती थी तो आराम से सीट मिल जाती थी। अब पुरुषों की मौजूदगी और भीड़ के कारण पूरी यात्रा में असहज महसूस होता है।
खड़े होकर सफर करना मुश्किल
पूजा ने बताया कि गांव से शहर पढ़ने आने के लिए बसों में भारी भीड़ का सामना करना पड़ता है। लोकल रूटों पर चलने वाली बसों में पुरुषों के बीच खड़े होकर सफर करना बहुत मुश्किल होता है।
पिंक बसों में मिलती थी राहत
सुनीता ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव पर भीड़भाड़ वाली आम बसों में चढ़ना और खड़े रहना बहुत कठिन है। पिंक बस में महिलाओं के लिए बहुत बड़ा सहारा थीं। अब इनमें भी पुरुषों को बैठाया जा रहा है।
वर्जन....
इसके बारे में जानकारी नहीं हैं पता करके ही बताया जा सकता है कि महिलाओं के लिए कितनी बसें चलाई जा रही है।
गुरनाम सिंह, मुख्य निरीक्षक, अंबाला डिपो।