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Ambala News: किताब बिक्री पर नींद से जागा विभाग
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अंबाला सिटी। निजी स्कूलों की ओर से बेची जा रही किताबों को लेकर शिक्षा विभाग की नींद टूटी है। विभाग ने नींद से जागते हुए निजी स्कूलों के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही निजी स्कूलों की कोई शिकायत आने पर कार्रवाई को लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों के नंबर सार्वजनिक किए गए हैं।
साथ ही ई-मेल भी विभाग की ओर से जारी कर दी गई है कि अगर किसी भी अभिभावक व विद्यार्थी को कोई समस्या आती है तो वह अपनी समस्या रख सकते हैं। नया सत्र शुरू होने से ही निजी स्कूलों की ओर से किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। यह किताब उन स्टोर पर ही मिलती है, जहां निजी स्कूलों की ओर से अभिभावकों को भेजा जाता है।
वर्दी व किताब खरीदने के लिए नहीं की जा सकती मनमानी
विभाग के पत्र अनुसार जिस कक्षा में विद्यार्थी पढ़ रहा है। वह एनसीईआरटी व सीबीएसई से संबंधित किताब ले रहा है तो उसे जबरदस्ती दूसरी किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके लिए विद्यार्थियों पर दबाव नहीं बनाया जा सकता कि उक्त किताब ही लेनी है। वर्दी भी बदली नहीं जा सकती। साथ ही निजी स्कूलों में भी पीने के पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
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वहीं, विभाग ने कक्षा पहली से दूसरी के विद्यार्थी को डेढ़ किलो तक, तीसरी से 5वीं कक्षा तक 2 से 3 किलो तक, 6वीं से 7वीं तक 4 किलो तक, कक्षा 8वीं से 9वीं कक्षा तक विद्यार्थी को साढ़े 4 किलो तक, कक्षा दसवीं के विद्यार्थी के बैग का 5 किलो तक ही भार होना चाहिए।
निजी स्कूलों में दाखिले हो भी चुके, विभाग ने नहीं की चेकिंग
एक अप्रैल से निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। विभाग ने अभी तक किताबों व वर्दी की चेकिंग को लेकर अपने स्तर पर चेकिंग अभियान नहीं चलाया है। विभाग अभिभावकों की शिकायत का इंतजार कर रहा है जबकि अभिभावक महंगे दाम में किताब व वर्दी खरीदने पर मजबूर हैं। जिले में 385 से ज्यादा निजी स्कूल चल रहे हैं।
वर्जन
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी निजी स्कूल से संबंधित किताब व वर्दी बेचने या अन्य कोई शिकायत आती है तो वह उस समस्या का समाधान करेंगे। साथ ही विभाग की ओर से ई-मेल भी जारी की गई है।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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साथ ही ई-मेल भी विभाग की ओर से जारी कर दी गई है कि अगर किसी भी अभिभावक व विद्यार्थी को कोई समस्या आती है तो वह अपनी समस्या रख सकते हैं। नया सत्र शुरू होने से ही निजी स्कूलों की ओर से किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। यह किताब उन स्टोर पर ही मिलती है, जहां निजी स्कूलों की ओर से अभिभावकों को भेजा जाता है।
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वर्दी व किताब खरीदने के लिए नहीं की जा सकती मनमानी
विभाग के पत्र अनुसार जिस कक्षा में विद्यार्थी पढ़ रहा है। वह एनसीईआरटी व सीबीएसई से संबंधित किताब ले रहा है तो उसे जबरदस्ती दूसरी किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके लिए विद्यार्थियों पर दबाव नहीं बनाया जा सकता कि उक्त किताब ही लेनी है। वर्दी भी बदली नहीं जा सकती। साथ ही निजी स्कूलों में भी पीने के पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
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वहीं, विभाग ने कक्षा पहली से दूसरी के विद्यार्थी को डेढ़ किलो तक, तीसरी से 5वीं कक्षा तक 2 से 3 किलो तक, 6वीं से 7वीं तक 4 किलो तक, कक्षा 8वीं से 9वीं कक्षा तक विद्यार्थी को साढ़े 4 किलो तक, कक्षा दसवीं के विद्यार्थी के बैग का 5 किलो तक ही भार होना चाहिए।
निजी स्कूलों में दाखिले हो भी चुके, विभाग ने नहीं की चेकिंग
एक अप्रैल से निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। विभाग ने अभी तक किताबों व वर्दी की चेकिंग को लेकर अपने स्तर पर चेकिंग अभियान नहीं चलाया है। विभाग अभिभावकों की शिकायत का इंतजार कर रहा है जबकि अभिभावक महंगे दाम में किताब व वर्दी खरीदने पर मजबूर हैं। जिले में 385 से ज्यादा निजी स्कूल चल रहे हैं।
वर्जन
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी निजी स्कूल से संबंधित किताब व वर्दी बेचने या अन्य कोई शिकायत आती है तो वह उस समस्या का समाधान करेंगे। साथ ही विभाग की ओर से ई-मेल भी जारी की गई है।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।