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Ambala News: बीजों की किस्मों के लिए विभाग कर रहा किसानों को जागरूक
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अंबाला सिटी। अंबाला शहर कृषि विज्ञान केंद्र में लगाई गई डीबीडब्ल्यू 222 गेहूं के बीज की किस्म में इस बार बंपर पैदावार हुई है। केंद्र की ओर से दूसरी बार गेहूं का ये बीज लगाया गया था। कृषि वैज्ञानिक डॉ सुनीता आहुजा ने बताया कि इस बार बीज की पैदावार 580 क्विंटल हुई है। जो कि बीते वर्ष के मुकाबले काफी अधिक है। केंद्र द्वारा 25 एकड़ में इस बीज को लगाया गया था। जिसमें प्रति एकड़ के आंकड़े को देखें तो प्रति एकड़ 23 से 25 एकड़ तक की पैदावार हुई है। यह गेहूं बीज के तौर पर हरियाणा बीज विकास निगम को भेजा गया है। जिसके बाद आगे बीज को तैयार कर किसानों को बेचा जाएगा।
इस बीज की खासियत यह है कि इसे बहुत कम पानी की जरूरत होती है। कम पानी वाले क्षेत्रों में गेहूं के इस बीज से अच्छी फसल ली जा सकती है। बीजों के उत्पादन में बढ़ोतरी के उद्देश्य से राष्ट्रीय बीज निगम की ओर से बुधवार को एक बैठक का भी आयोजन किया गया था। जिसमें किसानों को बीज की किस्मों और किस प्रकार से नए बीजों से पैदावार को बढ़ाया जाता है , इसके बारे में जानकारी दी गई है। जो भी किसान बीज को लगाना चाहता है वह केंद्र से संपर्क कर सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रो. डॉ. देवेंद्र चहल ने बताया कि इस बार सर्दी का मौसम अच्छा रहा था। जिस कारण गेहूं की फसल अच्छी हुई है। मार्च के अंत तक भी ठंड बनी रही जिससे दाना मोटा हुआ। इस बीज को पानी भी सिर्फ एक बार ही दिया गया है। गेहूं में किसी भी प्रकार की बीमारियां भी नहीं लगी इससे भी पैदावार बढ़ी है। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा बीज तैयार कर हरियाणा बीज विकास निगम को भेज दिया जाता है। इसके बाद बीज की गुणवत्ता को जांचते हुए आगे किसानों को बेच दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने गेहूं की बिजाई से पहले जमीन को शून्य लेवल पर समतल करवाया था। जिससे बराबर मात्रा में फसल को पानी मिला। इससे भी फसल अधिक होती है। डॉ चहल ने कहा कि किसी भी फसल को लगाने से पहले अपने खेत की जमीन को समतल अवश्य करवाना चाहिए जिससे बराबर मात्रा में पानी पौधों की जड़ों तक पहुंच सके।
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तीन श्रेणियों में होती है बीज की गुणवत्ता
किसानों या फिर निजी कंपनियों द्वारा जो बीज उगाया जाता है। वह तीन श्रेणियों में होता है। जिसमें पहला प्रजनक बीज, आधार बीज, पंजीकृत बीज और अंत में प्रमाणित बीज होता है। अधिकतर किसान जिस बीज की बुआई करते हैं वह प्रमाणित बीज होता है। जिला अंबाला में देखें तो हरियाणा बीज विकास निगम में इस बार डीबीडब्ल्यू 222 और 327 की मांग सबसे अधिक रही है। दोनों ही बीजों में औसतन 24 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार हुई है।
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इस बीज की खासियत यह है कि इसे बहुत कम पानी की जरूरत होती है। कम पानी वाले क्षेत्रों में गेहूं के इस बीज से अच्छी फसल ली जा सकती है। बीजों के उत्पादन में बढ़ोतरी के उद्देश्य से राष्ट्रीय बीज निगम की ओर से बुधवार को एक बैठक का भी आयोजन किया गया था। जिसमें किसानों को बीज की किस्मों और किस प्रकार से नए बीजों से पैदावार को बढ़ाया जाता है , इसके बारे में जानकारी दी गई है। जो भी किसान बीज को लगाना चाहता है वह केंद्र से संपर्क कर सकता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रो. डॉ. देवेंद्र चहल ने बताया कि इस बार सर्दी का मौसम अच्छा रहा था। जिस कारण गेहूं की फसल अच्छी हुई है। मार्च के अंत तक भी ठंड बनी रही जिससे दाना मोटा हुआ। इस बीज को पानी भी सिर्फ एक बार ही दिया गया है। गेहूं में किसी भी प्रकार की बीमारियां भी नहीं लगी इससे भी पैदावार बढ़ी है। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा बीज तैयार कर हरियाणा बीज विकास निगम को भेज दिया जाता है। इसके बाद बीज की गुणवत्ता को जांचते हुए आगे किसानों को बेच दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने गेहूं की बिजाई से पहले जमीन को शून्य लेवल पर समतल करवाया था। जिससे बराबर मात्रा में फसल को पानी मिला। इससे भी फसल अधिक होती है। डॉ चहल ने कहा कि किसी भी फसल को लगाने से पहले अपने खेत की जमीन को समतल अवश्य करवाना चाहिए जिससे बराबर मात्रा में पानी पौधों की जड़ों तक पहुंच सके।
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तीन श्रेणियों में होती है बीज की गुणवत्ता
किसानों या फिर निजी कंपनियों द्वारा जो बीज उगाया जाता है। वह तीन श्रेणियों में होता है। जिसमें पहला प्रजनक बीज, आधार बीज, पंजीकृत बीज और अंत में प्रमाणित बीज होता है। अधिकतर किसान जिस बीज की बुआई करते हैं वह प्रमाणित बीज होता है। जिला अंबाला में देखें तो हरियाणा बीज विकास निगम में इस बार डीबीडब्ल्यू 222 और 327 की मांग सबसे अधिक रही है। दोनों ही बीजों में औसतन 24 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार हुई है।