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Ambala News: शुगर मिल पर करोड़ों रुपये बकाया, कल धरना देंगे किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Dec 2023 12:30 AM IST
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Crores of rupees outstanding on sugar mill, farmers will protest tomorrow
अंबाला। नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) से जुड़े घोटाले में शीर्ष अदालत ने अगस्त में फैसला सुनाया था। नारायणगढ़ मिल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सी जया शारदा ने बताया कि नारायणगढ़ शुगर मिल को कुर्क नहीं बल्कि अटैच यानि संबद्ध करने का फैसला दिया गया था। ऐसे में इस फैसले के बाद हरियाणा सरकार की तरफ से हर्को ने भी शीर्ष अदालत में एक एप्लीकेशन लगाई। इसमें किसानों के बकाया की जानकारी देते हुए इस मिल को अभी संचालित रखने की अपील की गई है।
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11 दिसंबर को यह एप्लीकेशन दी गई, जिस पर निर्णय लिया जाना है। सीईओ ने बताया कि इतना तय है कि भविष्य में इस मिल की कुर्की कर इसे बेचा जा सकता है। यह मामला करीब वर्ष 2013 से चल रहा है। दूसरी ओर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने वीडियो जारी कर दो जनवरी को किसानों की पंचायत बुलाई है। वहीं भाकियू शहीद भगत सिंह और संयुक्त किसान मजदूर इंकलाब यूनियन ने सोमवार को बैठक कर 27 दिसंबर को एकत्रित होकर धरना देने का निर्णय लिया है।
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सीईओ ने बताया कि एनएसईएल से जुड़े प्रकरण में मुंबई से जुड़े मामले की एग्जीक्यूशन पिटीशन पर शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसमें कोर्ट ने अगस्त में याथुरी एसोसिएट्स के खिलाफ फैसला सुनाया था। याथुरी एसोसिएट्स के मालिक नारायणगढ़ शुगर मिल से ताल्लुक रखते हैं। इस कारण नारायणगढ़ शुगर मिल को भी संबद्ध करने का फैसला सुनाया गया।
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सीईओ खुद गईं थी पिछली तारीख पर

शुगर मिल की सीईओ सी जया शारदा ने बताया कि इस मामले की सुनवाई के दौरान पिछली तारीख पर वह खुद गईं थी। उन्होंने मिल की तरफ से काेर्ट के समक्ष पक्ष रखा था कि मिल पर अभी किसानों का भुगतान बकाया है। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि शुगर मिल पर करीब सात हजार किसान आश्रित हैं। इन किसानों का पिछले वर्ष का 17 करोड़ रुपये तो इस साल का 35 करोड़ रुपये बकाया है। इस कारण इसे संचालित रहने दिया जाए। यह पूरा प्रकरण सरकार के निर्देशन में चल रहा है। हर्को के अधिवक्ता भी इस सुनवाई में पेश हो रहे हैं।

नारायणगढ़ शुगर मिल का ऐसे आया नाम

दरअसल नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड कई वर्ष पहले डूब गई थी। इस मामले में एनएसईएल से रुपये लेकर वापस न करने वालों पर केस दर्ज होने लग गए। इसी में एक कंपनी याथुरी एसोसिएट्स भी फंसी, जिन पर एनएसईएल का बकाया था। यह याथुरी एसोसिएट्स को संचालित करने वाला परिवार ही नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़ा था। जब मामले की जांच हुई तो कंपनी के पास एक अकाउंट नारायणगढ़ शुगर मिल से जुड़ा भी सामने आया। ऐसे में नारायणगढ़ शुगर मिल भी लपेटे में आ गई। अब याथुरी एसोसिएट्स की संपत्ति संबद्ध करने के फैसले में नारायणगढ़ मिल को भी जोड़ा गया है।



क्या है एनएसईएल घोटाला

एनएसईएल के जरिये निवेशक वेयरहाउस में रखी गई कस्टर सीड, ऊन, चीनी जैसी कमोडिटी पर 25-36 दिन के लिए लोन देते थे। इसमें 15-16 फीसदी तक का वापस मिलता था। 2014 में दलालों ने निवेशकों से जिन वस्तुओं पर पैसा लगवाया, स्टॉक में वह कमोडिटी थी ही नहीं और गोदाम खाली थे। वेयरहाउस की रसीद फर्जी थी। घोटाला सामने आने के बाद एनएसईएल एक्सचेंज बंद हो गया। इसमें 13,000 से अधिक निवेशकों का 5600 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।




अभी चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम किसानों के बकाया को लेकर मजबूती से अपनी बात कोर्ट के समक्ष रख रहे हैं। हर्को व अन्य एजेंसियां भी अपने पक्ष कोर्ट में रखेंगे तो मामले लंबा चलेगा।
-सी जया शारदा, सीईओ, नारायणगढ़ शुगर मिल
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