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मार से डरा हुआ था बच्चा, देर रात तक दो बार हुई काउंसलिंग, कुछ नहीं बोला
Updated Sun, 09 Oct 2016 12:19 AM IST
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अंबाला सिटी। कोतवाली पुलिस के अंतर्गत पुलिस चौकी नंबर पांच में बेड़ियों से बांधकर रखे गए किशोर के मामले में संज्ञान लेते हुए हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग संबंधित आब्जर्वेशन होम में पहुंचा, जहां चोरी के आरोप में पकड़े किशोर को बतौर न्यायिक हिरासत भेजा गया था।
आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला के साथ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सदस्य डा. कुलदीप सिंह व अन्य शामिल रहे। उन्होंने वहां बच्चे की हालत देखी, बच्चा मार से थोड़ा सहमा हुआ था और कुछ भी नहीं बोल पा रहा था। इसके चलते टीम ने अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए वहीं मौखिक आदेश पर पुलिस चौकी नंबर पांच के तमाम कर्मियों, चौकी प्रभारी और कोतवाली थाना प्रभारी को आब्जर्वेशन होम में ही तलब कर लिया।
होम में चौकी नंबर पांच के प्रभारी, कोतवाली थाना प्रभारी समेत चौकी मुंशी व चौकी के सभी जवान टीम के समक्ष हाजिर हुए और टीम ने सभी से एक-एक कर इस गंभीर मसले पर जवाब तलबी की। लेकिन इस सवाल -जवाब में पुलिस ने ऐसे बेतुके बयान दिए, जो टीम सदस्यों के गले तो नहीं उतरे। इस मामले में आगामी कार्रवाई के बारे में टीम ने पुलिस के बयानों के बाद बच्चे की दोबारा काउंसलिंग कर बच्चे के बयान लिए जाने जरूरी बताया है।
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शनिवार रात को बच्चे को काउंसलिंग के लिए फिर से बुलवाया गया। उसे प्यार से समझाकर काउंसलिंग करने की कोशिश की गई, लेकिन किशोर इतना डरा और सहमा हुआ था कि वे काउंसलिंग करने वाले सदस्यों को ही देखता रहा और कुछ भी नहीं बोल पाया। इस पर आयोग और बोर्ड सदस्यों ने बच्चों को कुछेक दिन सामान्य होने के बाद दोबारा काउंसलिंग के आदेश दिए हैं।
टीम के समक्ष पुलिस साफ मुकरी
टीम ने जब इस वाक्या पर एक-एक पुलिस कर्मी से पूछताछ की, तो पुलिस ने इस मामले से साफ इंकार कर दिया। उनके बयानों से काफी ज्यादा हैरानी प्रतीत हुई। पुलिस चौकी पुलिस ने साफ कहा कि न तो उन्होंने किशोर के पैर में बेड़ियां बांधी है और न ही उन्होंने उसके हाथ बांधे हैं। पुलिस ने कहा कि दरअसल, लोग ही पीटते हुए बच्चे को चौकी में लाए थे और लोगों ने ही उसके हाथ बांध दिए थे। उन्होंने तो बच्चे को एक कमरे में किनारे पर बिठा दिया था। वहीं बच्चे के पास ही एक बेड़ी पड़ी थी, जिसका इस्तेमाल वे लोग अमूमन नहीं करते हैं। लेकिन बच्चे ने शायद खेल-खेल में ये बेड़ी उठाकर अपने पैर में बांध ली होगी और आराम से बैठ गया होगा।
टीम ने पुलिस से पुलिस चौकी के भीतर से बच्चे की फोटो वायरल कैसे हुई? इस पर भी जवाब मांगा, तो पुलिस ने टीम को कहा कि जब बच्चे ने खेल-खेल में बेड़ी उठाकर पैर में बांध ली थी, तो वहां पब्लिक में से ही खड़े काली कमीज वाले एक व्यक्ति ने उसकी फोटो की थी, इसलिए हो सकता है उसी ने फोटो वायरल की है।
इस पर टीम ने पुलिस कर्मियों की लताड़ लगाते हुए कहा कि नाबालिग बच्चे की बेड़ियों से जकड़ी फोटो वायरल हो जाती है और पुलिस इसे हल्के में ले रही है, क्या पुलिस को इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं मालूम? इस पर पुलिस कर्मी चुप्पी साध गए।
टीम ने पुलिस वालों से पूछा कि वहां बेड़ी कैसे पड़ी थी और वो लॉक कैसे हो गई। पुलिस वालों ने टीम को बताया कि एक बार पुलिस चौकी नंबर दो में एक युवक को बेड़ी बांधने पर विवाद हो गया था। इसलिए उन्होंने इस चौकी में भी बेड़ी साइड में रख दी थी, वे इस बेड़ी से किसी को नहीं बांधते, लेकिन डरे हुए इस बच्चे ने खुद ही खेल-खेल में ये बेड़ी कहीं से उठा ली और पैरों में बांध ली।
पुलिस ने बताया कि लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्चे के हाथ और पांव बंधे देखे तो उन्होंने तुरंत बच्चे की पांव की बेड़ी और हाथ के बंधन को खोला और उसे रात को ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया। पुलिस ने अपने बयान दर्ज करवाए और लौट आई। लेकिन पुलिस के बयान सुनने के बाद टीम के सदस्य पुलिस के साफ मुकरने से खासे हैरान हैं।
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पुलिस ने अपने बयान दे दिए हैं, पुलिस ने बच्चे को बेड़ी और हाथ बांधने की घटना से साफ इंकार कर दिया है। पुलिस का कहना है कि बच्चे ने खुद ही शरारत या खेल-खेल में वहां पड़ी बेड़ी पैर में बांध ली होगी और पब्लिक में से किसी ने उसके हाथ बांध दिए होंगे। अब ऐसे में बच्चे के बयान और काउंसलिंग बहुत जरूरी है, लेकिन बच्चे मार से बहुत सहमा हुआ है, इसलिए दो बार काउंसलिंग में भी कुछ नहीं बोला। कुछेक दिन में फिर से काउंसलिंग कर अपनी रिपोर्ट आला पुलिस अफसरों व आयोग चेयरमैन को आगामी कार्रवाई हेतु भेज दी जाएगी।
-सरदार परमजीत सिंह बड़ौला, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य-
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आयोग व बोर्ड की टीम सदस्यों के बुलावे पर पुलिस चौकी समेत वे भी आब्र्जवेशन होम गए थे। वहां पुलिस ने अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। पुलिस चौकी प्रभारी व मुंशी ने भी अपनी बात टीम सदस्यों के आगे रख दी है। अब टीम सदस्य आगे अपनी कार्रवाई करें, जो भी होगा आगे देखा जाएगा।
-रजनीश, थाना प्रभारी, कोतवाली पुलिस, सिटी-
ये था मामला
दरअसल, गत रात पुलिस को सौंपने आई पब्लिक ने पुलिस को बताया कि संबंधित किशोर ने सेक्टर मार्केट में सब्जी खरीदने आए एक दंपति की खड़ी कार के पिछले टायर में सूआ घोंपकर उसे पंक्चर कर दिया था। दंपत्ति जब वापस लौटा और अपने पंक्चर कार देखी तो वे हैरान हो गए। उसके बाद उन्होंने कार की डिग्गी खोली और स्टेपनी बदलने में जुट गए, तभी इस किशोर ने कार का शीशा खोलकर उसमें रखा लैपटॉप और पर्स उठाकर भागने की कोशिश की। लेकिन तभी पत्नी को इस हरकत का शक हुआ और उसने तुरंत शोर मचा दिया। जिसके बाद लोगों ने भगाते हुए इस किशोर को काबू कर पुलिस को सौंपा। उसके बाद बच्चे के पैर में बेड़ियां और हाथ में बंधन बांधकर उसने पुलिस चौकी के किनारे पर बिठा दिया गया था और देर रात तक वहीं बिठाए रखा था।
पुलिस चौकी में बच्चे के साथ ऐसा बर्ताव किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75 के तहत अपराध है। इसी बात को लेकर पुलिस चौकी पुलिस पांच विवादों फंस गई है।
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आयोग के सदस्य सरदार परमजीत सिंह बड़ौला के साथ जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सदस्य डा. कुलदीप सिंह व अन्य शामिल रहे। उन्होंने वहां बच्चे की हालत देखी, बच्चा मार से थोड़ा सहमा हुआ था और कुछ भी नहीं बोल पा रहा था। इसके चलते टीम ने अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए वहीं मौखिक आदेश पर पुलिस चौकी नंबर पांच के तमाम कर्मियों, चौकी प्रभारी और कोतवाली थाना प्रभारी को आब्जर्वेशन होम में ही तलब कर लिया।
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होम में चौकी नंबर पांच के प्रभारी, कोतवाली थाना प्रभारी समेत चौकी मुंशी व चौकी के सभी जवान टीम के समक्ष हाजिर हुए और टीम ने सभी से एक-एक कर इस गंभीर मसले पर जवाब तलबी की। लेकिन इस सवाल -जवाब में पुलिस ने ऐसे बेतुके बयान दिए, जो टीम सदस्यों के गले तो नहीं उतरे। इस मामले में आगामी कार्रवाई के बारे में टीम ने पुलिस के बयानों के बाद बच्चे की दोबारा काउंसलिंग कर बच्चे के बयान लिए जाने जरूरी बताया है।
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शनिवार रात को बच्चे को काउंसलिंग के लिए फिर से बुलवाया गया। उसे प्यार से समझाकर काउंसलिंग करने की कोशिश की गई, लेकिन किशोर इतना डरा और सहमा हुआ था कि वे काउंसलिंग करने वाले सदस्यों को ही देखता रहा और कुछ भी नहीं बोल पाया। इस पर आयोग और बोर्ड सदस्यों ने बच्चों को कुछेक दिन सामान्य होने के बाद दोबारा काउंसलिंग के आदेश दिए हैं।
टीम के समक्ष पुलिस साफ मुकरी
टीम ने जब इस वाक्या पर एक-एक पुलिस कर्मी से पूछताछ की, तो पुलिस ने इस मामले से साफ इंकार कर दिया। उनके बयानों से काफी ज्यादा हैरानी प्रतीत हुई। पुलिस चौकी पुलिस ने साफ कहा कि न तो उन्होंने किशोर के पैर में बेड़ियां बांधी है और न ही उन्होंने उसके हाथ बांधे हैं। पुलिस ने कहा कि दरअसल, लोग ही पीटते हुए बच्चे को चौकी में लाए थे और लोगों ने ही उसके हाथ बांध दिए थे। उन्होंने तो बच्चे को एक कमरे में किनारे पर बिठा दिया था। वहीं बच्चे के पास ही एक बेड़ी पड़ी थी, जिसका इस्तेमाल वे लोग अमूमन नहीं करते हैं। लेकिन बच्चे ने शायद खेल-खेल में ये बेड़ी उठाकर अपने पैर में बांध ली होगी और आराम से बैठ गया होगा।
टीम ने पुलिस से पुलिस चौकी के भीतर से बच्चे की फोटो वायरल कैसे हुई? इस पर भी जवाब मांगा, तो पुलिस ने टीम को कहा कि जब बच्चे ने खेल-खेल में बेड़ी उठाकर पैर में बांध ली थी, तो वहां पब्लिक में से ही खड़े काली कमीज वाले एक व्यक्ति ने उसकी फोटो की थी, इसलिए हो सकता है उसी ने फोटो वायरल की है।
इस पर टीम ने पुलिस कर्मियों की लताड़ लगाते हुए कहा कि नाबालिग बच्चे की बेड़ियों से जकड़ी फोटो वायरल हो जाती है और पुलिस इसे हल्के में ले रही है, क्या पुलिस को इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं मालूम? इस पर पुलिस कर्मी चुप्पी साध गए।
टीम ने पुलिस वालों से पूछा कि वहां बेड़ी कैसे पड़ी थी और वो लॉक कैसे हो गई। पुलिस वालों ने टीम को बताया कि एक बार पुलिस चौकी नंबर दो में एक युवक को बेड़ी बांधने पर विवाद हो गया था। इसलिए उन्होंने इस चौकी में भी बेड़ी साइड में रख दी थी, वे इस बेड़ी से किसी को नहीं बांधते, लेकिन डरे हुए इस बच्चे ने खुद ही खेल-खेल में ये बेड़ी कहीं से उठा ली और पैरों में बांध ली।
पुलिस ने बताया कि लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्चे के हाथ और पांव बंधे देखे तो उन्होंने तुरंत बच्चे की पांव की बेड़ी और हाथ के बंधन को खोला और उसे रात को ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश किया। पुलिस ने अपने बयान दर्ज करवाए और लौट आई। लेकिन पुलिस के बयान सुनने के बाद टीम के सदस्य पुलिस के साफ मुकरने से खासे हैरान हैं।
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पुलिस ने अपने बयान दे दिए हैं, पुलिस ने बच्चे को बेड़ी और हाथ बांधने की घटना से साफ इंकार कर दिया है। पुलिस का कहना है कि बच्चे ने खुद ही शरारत या खेल-खेल में वहां पड़ी बेड़ी पैर में बांध ली होगी और पब्लिक में से किसी ने उसके हाथ बांध दिए होंगे। अब ऐसे में बच्चे के बयान और काउंसलिंग बहुत जरूरी है, लेकिन बच्चे मार से बहुत सहमा हुआ है, इसलिए दो बार काउंसलिंग में भी कुछ नहीं बोला। कुछेक दिन में फिर से काउंसलिंग कर अपनी रिपोर्ट आला पुलिस अफसरों व आयोग चेयरमैन को आगामी कार्रवाई हेतु भेज दी जाएगी।
-सरदार परमजीत सिंह बड़ौला, हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य-
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आयोग व बोर्ड की टीम सदस्यों के बुलावे पर पुलिस चौकी समेत वे भी आब्र्जवेशन होम गए थे। वहां पुलिस ने अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। पुलिस चौकी प्रभारी व मुंशी ने भी अपनी बात टीम सदस्यों के आगे रख दी है। अब टीम सदस्य आगे अपनी कार्रवाई करें, जो भी होगा आगे देखा जाएगा।
-रजनीश, थाना प्रभारी, कोतवाली पुलिस, सिटी-
ये था मामला
दरअसल, गत रात पुलिस को सौंपने आई पब्लिक ने पुलिस को बताया कि संबंधित किशोर ने सेक्टर मार्केट में सब्जी खरीदने आए एक दंपति की खड़ी कार के पिछले टायर में सूआ घोंपकर उसे पंक्चर कर दिया था। दंपत्ति जब वापस लौटा और अपने पंक्चर कार देखी तो वे हैरान हो गए। उसके बाद उन्होंने कार की डिग्गी खोली और स्टेपनी बदलने में जुट गए, तभी इस किशोर ने कार का शीशा खोलकर उसमें रखा लैपटॉप और पर्स उठाकर भागने की कोशिश की। लेकिन तभी पत्नी को इस हरकत का शक हुआ और उसने तुरंत शोर मचा दिया। जिसके बाद लोगों ने भगाते हुए इस किशोर को काबू कर पुलिस को सौंपा। उसके बाद बच्चे के पैर में बेड़ियां और हाथ में बंधन बांधकर उसने पुलिस चौकी के किनारे पर बिठा दिया गया था और देर रात तक वहीं बिठाए रखा था।
पुलिस चौकी में बच्चे के साथ ऐसा बर्ताव किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75 के तहत अपराध है। इसी बात को लेकर पुलिस चौकी पुलिस पांच विवादों फंस गई है।