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शहादत के सम्मान पर संशय, शहीद के परिजन नाराज
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:06 AM IST
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पठानकोट एयरबेस पर पाक आतंकियों के साथ लोहा लेते हुए शहीद हुए गरूड़ कमांडो गुरसेवक सिंह को शौर्य चक्र मिलने पर संशय मंडराने लगा है। पिछले कई महीनों से गुरसेवक को शौर्य चक्र दिए जाने की घोषणा की गई थी। परिजनों को भी इसकी बाकायदा सूचना दी गई थी। अब गणतंत्र दिवस गुजर गया, लेकिन न तो इस सम्मान का कुछ पता है और न ही परिजनों को किसी ने बताया कि इस सम्मान में विलंब क्यों हो रहा है? इसी बात को लेकर अब शहीद गुरसेवक के परिजनों में भी व्यवस्था को लेकर रोष है।
एयरफोर्स अथॉरिटी ने लेटर भेज दी थी सूचना
शहीद गुरसेवक के पिता सुच्चा सिंह ने बताया कि लगभग पांच महीने पहले एयरफोर्स अथॉरिटी का उन्हें पत्र मिला था। इसमें उन्हें बताया गया था कि उनके शहीद बेटे को शौर्य चक्र के लिए चुना गया है। जल्द ही गुरसेवक की इस शहादत पर ये सम्मान दिया जाएगा। पिता ने बताया कि गुरसेवक के एक अन्य शहीद साथी लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन को भी शौर्य चक्र के लिए और शहीद हवलदार हंगापन दादा को वीर चक्र के लिए चुना गया था। पिता ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि सूचना आने के महीनों बाद इस गणतंत्र दिवस पर उनके शहीद बेटे को ये सम्मान जरूर मिलेगा। लेकिन उन्हें अब मालूम चला है कि अभी सिर्फ शहीद हवलदार को ही वीर चक्र इस बार दिया गया है। गुरुसेवक व निरंजन को शौर्य चक्र अभी नहीं दिया गया है। उनके अनुसार ये कब मिलेगा? इस बारे में भी उन्हें कोई जानकारी अभी तक नहीं दी गई है।
सांसद भी भूले वायदे, शहीद के पिता नाराज
सांसदों से नाराज शहीद के पिता सुच्चा सिंह ने कहा कि उनका बेटा ही उनकी दौलत था और आज बेटे की शहादत और भी बड़ी दौलत है। लेकिन फिर भी यदि कोई घर आकर शहीद की याद में बनने वाले मेमोरियल हॉल के लिए आर्थिक मदद देने की घोषणा करता है, तो कम से कम वो वायदा तो पूरा करे।
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सुच्चा सिंह ने बताया कि गरूड़ कमांडो शहीद गुरसेवक सिंह की शहादत के बाद अंबाला के सांसद रतनलाल कटारिया और आनंदपुर साहिब के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा अंबाला में शहीद के घर पहुंचे थे। उन्होंने शहीद के नाम से मेमोरियल हाल बनाने के लिए बजट की घोषणा की थी। कटारिया ने इस दौरान 11 लाख की घोषणा की थी तो चंदूमाजरा ने 5 लाख की घोषणा की थी। गुरसेवक के पिता की माने तो अभी तक न तो सांसद कटारिया और न ही सांसद चंदूमाजरा द्वारा घोषित फंड आया है। उनके अनुसार फंड आ जाता तो अधूरा पड़ा गुरसेवक की याद में बनाया हॉल पूरा हो जाता। इसका फायदा गांववालों को विभिन्न कार्यक्रमों व आयोजनों के दौरान होता।
गांव के गेट पर लिखा जाए गुरसेवक का नाम
पिता सुच्चा सिंह ने डीसी अंबाला से भी मांग की है कि उनके गांव के बाहर एक बड़ा तोरणद्वार लगा है। वहां से गांव में प्रवेश है। उनके अनुसार इसी मुख्य सड़क का नाम सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गुरसेवक के नाम से रखने की घोषणा की थी। ये घोषणा तो पूरी हो गई, लेकिन वे चाहते हैं कि गांव के मुख्य द्वार पर जो बड़ा गेट लगा है, उस पर भी शहीद गुरसेवक का नाम लिख दिया जाए तो बेटे को और सम्मान मिलेगा। उल्लेखनीय है कि 02 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए गुरसेवक शहीद हो गया था।
अभी तक क्यों नहीं मिला सम्मान जांच हो
आवाज-ए-हिंदुस्तान के अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को पत्र भेज कर मांग की है कि पठानकोट हमले के शहीदों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की केंद्र आर्थिक सहायता व माता पिता को गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप आवंटित करें। इस अवसर पर आवाज-ए-हिंदुस्तान के प्रदेशाध्यक्ष कुलवंत सिह मानकपुर, पंजाब के प्रधान लखविंद्र सिंह साधापुर, केसर सिंह, जसमीत सिंह जस्सी, अशोक अग्रवाल आदि मौजूद रहे। वीरेश ने कहा कि 26 जनवरी 2017 को गुरसेवक को शौर्य चक्र भी मिलना था, वह भी नहीं मिला। इसकी जांच करवाई जाए कि ये लेट क्यों हुआ?
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एयरफोर्स अथॉरिटी ने लेटर भेज दी थी सूचना
शहीद गुरसेवक के पिता सुच्चा सिंह ने बताया कि लगभग पांच महीने पहले एयरफोर्स अथॉरिटी का उन्हें पत्र मिला था। इसमें उन्हें बताया गया था कि उनके शहीद बेटे को शौर्य चक्र के लिए चुना गया है। जल्द ही गुरसेवक की इस शहादत पर ये सम्मान दिया जाएगा। पिता ने बताया कि गुरसेवक के एक अन्य शहीद साथी लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन को भी शौर्य चक्र के लिए और शहीद हवलदार हंगापन दादा को वीर चक्र के लिए चुना गया था। पिता ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि सूचना आने के महीनों बाद इस गणतंत्र दिवस पर उनके शहीद बेटे को ये सम्मान जरूर मिलेगा। लेकिन उन्हें अब मालूम चला है कि अभी सिर्फ शहीद हवलदार को ही वीर चक्र इस बार दिया गया है। गुरुसेवक व निरंजन को शौर्य चक्र अभी नहीं दिया गया है। उनके अनुसार ये कब मिलेगा? इस बारे में भी उन्हें कोई जानकारी अभी तक नहीं दी गई है।
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सांसद भी भूले वायदे, शहीद के पिता नाराज
सांसदों से नाराज शहीद के पिता सुच्चा सिंह ने कहा कि उनका बेटा ही उनकी दौलत था और आज बेटे की शहादत और भी बड़ी दौलत है। लेकिन फिर भी यदि कोई घर आकर शहीद की याद में बनने वाले मेमोरियल हॉल के लिए आर्थिक मदद देने की घोषणा करता है, तो कम से कम वो वायदा तो पूरा करे।
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सुच्चा सिंह ने बताया कि गरूड़ कमांडो शहीद गुरसेवक सिंह की शहादत के बाद अंबाला के सांसद रतनलाल कटारिया और आनंदपुर साहिब के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा अंबाला में शहीद के घर पहुंचे थे। उन्होंने शहीद के नाम से मेमोरियल हाल बनाने के लिए बजट की घोषणा की थी। कटारिया ने इस दौरान 11 लाख की घोषणा की थी तो चंदूमाजरा ने 5 लाख की घोषणा की थी। गुरसेवक के पिता की माने तो अभी तक न तो सांसद कटारिया और न ही सांसद चंदूमाजरा द्वारा घोषित फंड आया है। उनके अनुसार फंड आ जाता तो अधूरा पड़ा गुरसेवक की याद में बनाया हॉल पूरा हो जाता। इसका फायदा गांववालों को विभिन्न कार्यक्रमों व आयोजनों के दौरान होता।
गांव के गेट पर लिखा जाए गुरसेवक का नाम
पिता सुच्चा सिंह ने डीसी अंबाला से भी मांग की है कि उनके गांव के बाहर एक बड़ा तोरणद्वार लगा है। वहां से गांव में प्रवेश है। उनके अनुसार इसी मुख्य सड़क का नाम सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गुरसेवक के नाम से रखने की घोषणा की थी। ये घोषणा तो पूरी हो गई, लेकिन वे चाहते हैं कि गांव के मुख्य द्वार पर जो बड़ा गेट लगा है, उस पर भी शहीद गुरसेवक का नाम लिख दिया जाए तो बेटे को और सम्मान मिलेगा। उल्लेखनीय है कि 02 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए गुरसेवक शहीद हो गया था।
अभी तक क्यों नहीं मिला सम्मान जांच हो
आवाज-ए-हिंदुस्तान के अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को पत्र भेज कर मांग की है कि पठानकोट हमले के शहीदों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की केंद्र आर्थिक सहायता व माता पिता को गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप आवंटित करें। इस अवसर पर आवाज-ए-हिंदुस्तान के प्रदेशाध्यक्ष कुलवंत सिह मानकपुर, पंजाब के प्रधान लखविंद्र सिंह साधापुर, केसर सिंह, जसमीत सिंह जस्सी, अशोक अग्रवाल आदि मौजूद रहे। वीरेश ने कहा कि 26 जनवरी 2017 को गुरसेवक को शौर्य चक्र भी मिलना था, वह भी नहीं मिला। इसकी जांच करवाई जाए कि ये लेट क्यों हुआ?