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Haryana: एसीबी ने अंबाला कैंट के राजकीय PG कॉलेज में बड़ा भ्रष्टाचार, पूर्व प्रिंसिपलों सहित 10 पर केस दर्ज

Sun, 16 Nov 2025 12:49 PM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 16 Nov 2025 12:49 PM IST
सार

समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि वेंडरों के जीएसटी नंबर या तो गलत, पता न मिलने वाला या अमान्य पाया गया। समिति ने इसे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी व गबन की संभावना मानते हुए मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की थी।

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ACB files case against 10 former principals, including corruption case at Ambala Cantt Government PG College
भ्रष्टाचार - फोटो : AI

विस्तार

राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने राजकीय पीजी कॉलेज अंबाला कैंट में सरकारी खरीद नियमों के उल्लंघन, सरकारी धन के गबन और फर्जीवाड़ा सहित अन्य गंभीर आरोपों में तत्कालीन प्रिंसिपल, सहायक प्रोफेसर और वेंडरों सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अंबाला रेंज के पुलिस उपाधीक्षक ओम प्रकाश की तहरीर पर यह प्राथमिकी 14 नवंबर को एसीबी ने दर्ज की गई।

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इस मामले में तत्कालीन प्राचार्य अरुण जोशी, पूर्व प्राचार्य खुशीला, वर्तमान प्राचार्य देशराज बाजवा, सहायक प्रोफेसर इतिहास अतुल यादव, सहायक प्रोफेसर भूगोल अजय चौहान, सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी मुनीष त्रिगठिया, वेंडर राकेश कालरा, राकेश कुमार, आशीष और प्रिंसिपल संजय कुमार का नाम है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
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इन सभी पर बीएनएस की धाराओं में आपराधिक षड्यंत्र, लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगे हैं। वहीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी अरोप लगाया गया है। इस मामले की शिकायत करनाल निवासी रमेश अहलावत ने एसीबी को 5 जून 2024 को ईमेल के माध्यम से भेजी थी। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित एक तथ्य-खोज समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर जांच के आदेश दिए गए।
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समिति ने जांच के बाद यह लगाए आरोप 
खरीद और बिलिंग धोखाधड़ी: खरीद बिलों में फर्जी जीएसटी नंबर और एचएसएन कोड का उपयोग किया गया।
नियमों का उल्लंघन: सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल के माध्यम से खरीद नहीं की गई।
सरकारी धन का गबन: वर्ष 2021 से खरीद और निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर 2 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया।
अवैध निर्माण: कॉलेज परिसर के अंदर लोक निर्माण विभाग के बजाय अपने स्तर पर कमरों व भवन का निर्माण किया गया।

वेंडरों के जीएसटी नंबर या तो गलत थे या उनका पता गल था
समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि वेंडरों के जीएसटी नंबर या तो गलत, पता न मिलने वाला या अमान्य पाया गया। समिति ने इसे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी व गबन की संभावना मानते हुए मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की थी। सरकार के मुख्य सचिव ने एसीबी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। दर्ज मामले की आगे की जांच महिला निरीक्षक नन्ही देवी को सौंपी गई है।

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