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तफरी से ड्राइवर को रोका तो कोठी से पहुंचे नेताजी और जड़ दिए एसपीओ को थप्पड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2020 12:45 AM IST
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crime
crime - फोटो : Ambala
अंबाला। समय रात के करीब आठ बजे। स्थान शहर मंजी साहिब गुरूद्वारा नाका। चार पुलिस कर्मी नाके पर तैनात हैं। इसी बीच एक गाड़ी चालक बार-बार इस एरिया में चक्कर काट रहा है। पहली बार पुलिस ने अनदेखा कर दिया। इसके बाद दूसरी और तीसरी बार भी लेकिन जब अति हो गई तो एक पुलिस कर्मी ने उसे रोका। लेकिन गाड़ी चालक ने अपनी पहुंच बताते हुए कहा कि एक-एक को देख लेगा। साथ ही नेताजी का नाम भी लिया। इस पर दूसरे पुलिस कर्मी ने उसे गाड़ी से उतारा और चपाक से दो डंडे ठोक दिए ताकि वह दोबारा से इस तरह की हरकत न करे। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। ड्राइवर ने तुरंत फोन नेताजी को मिलाया। नेताजी कोठी से पहुंचे और मौके पर तैनात एक स्पेशल पुलिस आफिसर को तपाक से एक नहीं बल्कि दो थप्पड़ जड़ दिए। गाली-गलौज किया। कहा कि ज्यादा हीरो मत बनो। जैसा चल रहा है वैसा चलने दो। अंबाला शहर में यह घटना तीन दिन पहले 25 मार्च को घटी। हालांकि पुलिस कप्तान ऐसी किसी भी जानकारी होने से इंकार कर रहे हैं।
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डंडे रखने की भी नहीं अब पावर, असहाय हुई पुलिस
इस घटना के बाद सहमे पुलिस कर्मियों से डंडे तक रखने की पावर छीन ली गई। ऐसे में कैसे जिले में लॉक डाउन सफल होने की कामना की जा सकती है। अमर उजाला की टीम ने जब नाकों पर तैनात पुलिस कर्मियों के हाथ देखे तो ज्यादातर पुलिस कर्मियों के हाथ में भी डंडे नहीं थे। अलबत्ता सहजता से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब नाकों पर तैनात कर्मियों के हाथ ही खाली हैं तो दूसरों के क्या हाल होंगे। हालांकि कुछ जगह पुलिस के हाथों में डंडे दिखाई भी दिए।
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नशे का आदी है नेताजी का ड्राइवर
पुलिस सूत्रों की माने तो जिस नेताजी के ड्राइवर को पुलिस कर्मियों ने रोका था वह स्मैक का आदी है। इससे पहले भी उसे पुलिस कर्मी अलग-अलग मामलों में पकड़ चुकी है लेकिन नेताजी का हाथ होने के कारण आज तक उस पर केस दर्ज नहीं हुआ। जिस दिन यह घटना घटी उस दिन भी वह बार-बार इसीलिए तफरी कर रहा था। उसे पुड़िया की तलब थी और पुड़िया उसे मिल नहीं रही थी।
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जान जोखिम में डालने वाले पुलिस कर्मियों का टूटा हौसला
इस घटना के बाद जिले में लॉक डाउन को सफल बनाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डालकर ड्यूटी दे रहे पुलिस कर्मियों का हौसला पूरी तरह से टूट गया है। उन्हें डर इस बात का है कि यदि वह सख्ती करेंगे तो फिर से उनके साथ वही दुर्व्यवहार न हो जाए जो एसपीओ के साथ हुआ।
किसी एसपीओ को थप्पड़ मारा है इस तरह की मेरे पास अभी कोई शिकायत नहीं आई है। ऐसा मामला संज्ञान में नहीं है।
-अभिषेक जोरवाल, एसपी अंबाला।
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