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गजब का कारनामा: मृतक दंपती को पैदा हुई 'संतान' और निगम ने जारी कर दिया जन्म प्रमाणपत्र
Fri, 17 Jan 2020 03:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला, अंबाला(हरियाणा)
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Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2020 03:39 PM IST
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जन्म प्रमाण पत्र
- फोटो : फाइल फोटो
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दंपती की मौत के बाद संतान पैदा हो गई। संतान भी एक नहीं दो नहीं बल्कि पूरे 30 साल की। जी हां सुनने में बेशक अजीब लगे लेकिन यह एकदम सच है। बाकायदा इसका नगर निगम की ओर से सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया है।
अपने कारनामों के लिए मशहूर हो चुके अंबाला के नगर निगम (वर्तमान में नगर परिषद छावनी) ने इस बार यह नया कारनामा कर दिखाया। इस दस्तावेज को मृतक महिला के सगे भाई ने कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने इसे आधार मानते हुए 10 मई 2019 को युवती को मृतकों की प्रापर्टी का वारिस घोषित कर दिया।
कोर्ट से वारिस घोषित होने के बाद उसे अपने नाम करवाने के लिए उसकी म्युटेशन फाइल डीसी पटियाला को जमा करवा दी गई है। अभी यह मामला डीसी पटियाला के यहां विचाराधीन है। इस तरह का यह पूरा खेल प्रापर्टी के लिए खेला गया, जिसमें नगर निगम के अधिकारियों ने दिल खोलकर फर्जीवाड़ा किया।
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अपने कारनामों के लिए मशहूर हो चुके अंबाला के नगर निगम (वर्तमान में नगर परिषद छावनी) ने इस बार यह नया कारनामा कर दिखाया। इस दस्तावेज को मृतक महिला के सगे भाई ने कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने इसे आधार मानते हुए 10 मई 2019 को युवती को मृतकों की प्रापर्टी का वारिस घोषित कर दिया।
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कोर्ट से वारिस घोषित होने के बाद उसे अपने नाम करवाने के लिए उसकी म्युटेशन फाइल डीसी पटियाला को जमा करवा दी गई है। अभी यह मामला डीसी पटियाला के यहां विचाराधीन है। इस तरह का यह पूरा खेल प्रापर्टी के लिए खेला गया, जिसमें नगर निगम के अधिकारियों ने दिल खोलकर फर्जीवाड़ा किया।
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क्या है पूरा मामला, क्यों जारी किया गया फर्जी प्रमाण पत्र
दरअसल हाउसिंग बोर्ड निवासी सतेंद्र सिंह ने पुलिस, गृहमंत्री और डीसी को दी शिकायत में आरोप लगाए हैं कि उनके छोटे भाई सुखपाल सिंह की 21 मार्च 219 को मौत हो चुकी है। जबकि सुखपाल सिंह की पत्नी कमलजीत कौर का निधन मई 2018 में हुआ था। वह पटियाला में 21 हीरा नगर में रहते थे।
शिकायतकर्ता सतेंद्र सिंह के आरोप हैं कि उनके भाई-भाभी की कोई संतान नहीं थी। नगर निगम ने कागजों में उनकी बेटी कैसे दिखा दी? दरअसल कमलजीत कौर की सगी बहन के जुड़वां संताने हुईं। यहीं पर खेल किया गया। इन जुड़वा बेटियों में से एक को मृतक सुखपाल सिंह और कमलजीत कौर की बेटी बना दिया गया।
जबकि आरोपियों ने एक बेटी को ही अपनी असली बेटी दिखाया। यह सब इसीलिए हुआ ताकि पंजाब के पटियाला स्थित मृतक दंपती की प्रॉपर्टी को हथियाया जा सके। इसके बाद आधिकारिक तौर पर उस बेटी को मृतक दंपती की बेटी बनाने के लिए निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरा खेल रचा गया।
शिकायतकर्ता सतेंद्र सिंह के आरोप हैं कि उनके भाई-भाभी की कोई संतान नहीं थी। नगर निगम ने कागजों में उनकी बेटी कैसे दिखा दी? दरअसल कमलजीत कौर की सगी बहन के जुड़वां संताने हुईं। यहीं पर खेल किया गया। इन जुड़वा बेटियों में से एक को मृतक सुखपाल सिंह और कमलजीत कौर की बेटी बना दिया गया।
जबकि आरोपियों ने एक बेटी को ही अपनी असली बेटी दिखाया। यह सब इसीलिए हुआ ताकि पंजाब के पटियाला स्थित मृतक दंपती की प्रॉपर्टी को हथियाया जा सके। इसके बाद आधिकारिक तौर पर उस बेटी को मृतक दंपती की बेटी बनाने के लिए निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरा खेल रचा गया।
कैसे खेला गया खेल, कैसे खुली पोल
हुआ यूं कि मृतक कमलजीत कौर की बहन को जुड़वां बेटियां खुराना क्लीनिक अंबाला कैंट में 28 जुलाई 1990 को हुआ। जबकि कमलजीत कौर और उनके पति सुखपाल सिंह के कोई संतान नहीं थी। ऐसे में एक बेटी को सुखपाल और कमलजीत कौर की बेटी बना दिया गया।
इस पूरे मामले की परतें उस समय उठी जब प्रॉपर्टी का विवाद कोर्ट में पहुंचा। मृतक के भाई सतेंद्र जौली को कोर्ट की ओर से नोटिस गया। जब सतेंद्र कोर्ट में पेश हुए तो उन्हें पता चला कि उनके भाई की बेटे को कानूनी तौर इस प्रॉपर्टी का वारिस बनाया गया है। यह सुनकर सतेंद्र हैरान हो गए क्योंकि उनकी तो कभी भतीजी हुई ही नहीं।
नगर निगम का जल गया 1990 का रिकार्ड
जब सतेंद्र सिंह ने इस सर्टिफिकेट के बारे में सवाल किया तो उन्हें बताया गया कि 1990 का सारा रिकार्ड जल गया था। इसके बाद इस दौरान नया रिकार्ड जोकि तैयार हुआ व मृतक कमलजीत कौर के पिता की रिपोर्ट पर तैयार किया गया था। यहीं पर खेल खेला गया। जिस बेटी को उनकी वारिस बनाया गया है वह मृतक महिला की सगी बहन की बेटी है। शिकायतकर्ता सतेंद्र ने पूरे मामले की जांच करवाने और इस मामले में जो भी आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सतेंद्र जौली मेरे पास आए थे। हमने तो रिकार्ड उन्हें दिखा दिया। जो रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज है हमने उसी आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया है। अब वह किसी ने गलत दर्ज करवा दिया है तो यह तो शिकायतकर्ता को ही साबित करना होगा। क्योंकि 1990 का रिकार्ड जल गया था। इसके बाद नया रिकार्ड रिश्तेदारों से पूछकर ही तैयार किया गया था।
- राजेश सचिव, नगर परिषद
इस पूरे मामले की परतें उस समय उठी जब प्रॉपर्टी का विवाद कोर्ट में पहुंचा। मृतक के भाई सतेंद्र जौली को कोर्ट की ओर से नोटिस गया। जब सतेंद्र कोर्ट में पेश हुए तो उन्हें पता चला कि उनके भाई की बेटे को कानूनी तौर इस प्रॉपर्टी का वारिस बनाया गया है। यह सुनकर सतेंद्र हैरान हो गए क्योंकि उनकी तो कभी भतीजी हुई ही नहीं।
नगर निगम का जल गया 1990 का रिकार्ड
जब सतेंद्र सिंह ने इस सर्टिफिकेट के बारे में सवाल किया तो उन्हें बताया गया कि 1990 का सारा रिकार्ड जल गया था। इसके बाद इस दौरान नया रिकार्ड जोकि तैयार हुआ व मृतक कमलजीत कौर के पिता की रिपोर्ट पर तैयार किया गया था। यहीं पर खेल खेला गया। जिस बेटी को उनकी वारिस बनाया गया है वह मृतक महिला की सगी बहन की बेटी है। शिकायतकर्ता सतेंद्र ने पूरे मामले की जांच करवाने और इस मामले में जो भी आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सतेंद्र जौली मेरे पास आए थे। हमने तो रिकार्ड उन्हें दिखा दिया। जो रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज है हमने उसी आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया है। अब वह किसी ने गलत दर्ज करवा दिया है तो यह तो शिकायतकर्ता को ही साबित करना होगा। क्योंकि 1990 का रिकार्ड जल गया था। इसके बाद नया रिकार्ड रिश्तेदारों से पूछकर ही तैयार किया गया था।
- राजेश सचिव, नगर परिषद