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हत्या और डकैती के आरोपियों ने दिया बाल सुधार गृह में वारदात को अंजाम, कर्मी बोले अब किस मुंह से करें नौकरी
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बाल सुधार गृह अंबाला में जिन तीन नाबालिगों ने दो कर्मचारियों को बंधक बनाकर जमकर पीटा उनमें से दो जघन्य अपराधों में शामिल हैं। तीन में से दो सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। दोनों पर हत्या और डकैती के आरोप हैं। इतना ही नहीं करीब 8 माह पहले करनाल के पैलेस ऑफ सेफ्टी में हुई तोड़फोड़ और आगजनी मामले में भी यही दोनों आरोपी शामिल थे। इन तीनों ने योजनाबद्घ तरीके से उस समय वार्डर अशोक सिंगला को पकड़ लिया जब बाल सुधार परिसर में कोर्ट चल रही थी। बचाव में हाउस फादर बलविंद्र पहुंचे तो तीनों ने उन्हें भी दबोच लिया। क्योंकि इन तीनों को पता था कि जो एक-दो कर्मचारी हैं वह कोर्ट में व्यस्त होंगे और आसानी से यहां नहीं पहुंच पाएंगे। इसीलिए तीनों ने इन दोनों कर्मचारियों को बंधक बनाकर जमकर पीटा।
कर्मचारी बोले- अब तक आरोपियों के बढ़ जाएंगे हौसले
मारपीट की इस वारदात के बाद जब कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अब हम किस मुंह से नौकरी पर जाएं। क्योंकि तीन जुवेनाइल द्वारा की गई मारपीट की वारदात के बाद दूसरों के हौसले भी बढ़ जाएंगे।
सात कर्मचारी, 12 की जरूरत
बाल सुधार गृह के हालात यह हैं कि इन 53 बाल सुधार गृह के नाबालिगों को संभालने का जिम्मा 7 कर्मचारियों पर है। इनमें एक बाल सुधार गृह अधीक्षक भी शामिल हैं। तीन शिफ्टों में ये कर्मचारी काम करते हैं। एक शिफ्ट में औसतन दो कर्मचारी। ऐसे में जघन्य अपराधों में शामिल ये नाबालिग कर्मचारियों की कमी का फायदा उठाकर कोई भी बड़ी वारदात को आसानी से अंजाम दे सकते हैं।
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5 दिन पहले ही नियुक्त हुए हैं हाउस फादर
बाल सुधार गृह में पिछले कई साल बाद रिक्त पड़े हाउस फादर के पद को भरा गया। बलविंद्र को हाउस फादर नियुक्त किया है। हाउस फादर की जिम्मेदारी यहां उसी तरह होती है जिस तरह परिवार में पिता की। लेकिन बाल बंदियों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। इतना ही नहीं वार्डर अशोक भी करीब 3 माह पहले ही यहां नियुक्त हुए थे।
छोटे जुवेनाइल को नीचे दबा करते हैं गलत काम
बाल सुधार गृह में हालात यह हैं कि छोटी उम्र के जुवेनाइल जोकि चोरी, मारपीट या किसी अन्य अपराध के आरोपी हैं उनके बीच जघन्य अपराधों में शामिल जुवेनाइल को रखने के कारण ये जुवेनाइल छोटों को अपने दबाव में रखकर गलत काम करते हैं। इतना ही नहीं उनसे टॉयलेट तक साफ करवाई जाती है। ये छोटे जुवेनाइल इनके भय या मारपीट के डर से कुछ भी बता नहीं पाते। बाल सुधार गृह अंबाला में 40 नाबालिगों को रखने की क्षमता है लेकिन इसमें 53 को रखा जा रहा है। 53 में से करीब 8-9 ऐसे जुवेनाइल हैं जोकि जघन्य अपराधों में शामिल हैं और जिनकी उम्र 16 साल से ज्यादा है।
पैलेस ऑफ सेफ्टी में ही रखे जा सकते हैं ऐसे जुवेनाइल
16 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे नाबालिग जोकि हत्या, दुष्कर्म या डकैती जैसे जघन्य अपराधों में शामिल हैं उन्हें पैलेस ऑफ सेफ्टी में ही रखने का प्रावधान है। लेकिन अंबाला में शायद जेजे एक्ट लागू नहीं होता। इसी कारण छोटे जुवेनाइलों के साथ जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिगों को रखा जा रहा है।
बाल सुधार गृह में जिन नाबालिगों ने हमारे साथ मारपीट की उनमें दो हत्या और डकैती जैसे अपराधों के आरोपी हैं। बाल सुधार गृह में हर बुधवार को कोर्ट लगती है। कोर्ट के चलते हम व्यवस्था बनाने के लिए बैरग में गए थे। इसका फायदा उठाकर हमें कैरम बोर्ड से पीटा गया। बड़े जुवेनाइल अकसर यहां छोटों पर दबाव बनाकर उनके साथ गलत काम करते हैं और करवाते हैं। डर के चलते उन्हें ऐसा करना पड़ता है। यदि नहीं करते तो उन्हें बैरग में ले जाकर पीटा जाता है। अब हम किस मुंह से नौकरी पर आएं। हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। मेरा प्रशासन और सरकार से अनुरोध है कि यहां से जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। ताकि जो छोटी उम्र के नाबालिग हैं वह और कर्मचारी इनका शिकार न बनें। पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद है वहां भी चेक किया जा सकता है। इस बारे में मैं प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करूंगा।
अशोक सिंगला, वार्डर बाल सुधार गृह
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कर्मचारी बोले- अब तक आरोपियों के बढ़ जाएंगे हौसले
मारपीट की इस वारदात के बाद जब कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अब हम किस मुंह से नौकरी पर जाएं। क्योंकि तीन जुवेनाइल द्वारा की गई मारपीट की वारदात के बाद दूसरों के हौसले भी बढ़ जाएंगे।
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सात कर्मचारी, 12 की जरूरत
बाल सुधार गृह के हालात यह हैं कि इन 53 बाल सुधार गृह के नाबालिगों को संभालने का जिम्मा 7 कर्मचारियों पर है। इनमें एक बाल सुधार गृह अधीक्षक भी शामिल हैं। तीन शिफ्टों में ये कर्मचारी काम करते हैं। एक शिफ्ट में औसतन दो कर्मचारी। ऐसे में जघन्य अपराधों में शामिल ये नाबालिग कर्मचारियों की कमी का फायदा उठाकर कोई भी बड़ी वारदात को आसानी से अंजाम दे सकते हैं।
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5 दिन पहले ही नियुक्त हुए हैं हाउस फादर
बाल सुधार गृह में पिछले कई साल बाद रिक्त पड़े हाउस फादर के पद को भरा गया। बलविंद्र को हाउस फादर नियुक्त किया है। हाउस फादर की जिम्मेदारी यहां उसी तरह होती है जिस तरह परिवार में पिता की। लेकिन बाल बंदियों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। इतना ही नहीं वार्डर अशोक भी करीब 3 माह पहले ही यहां नियुक्त हुए थे।
छोटे जुवेनाइल को नीचे दबा करते हैं गलत काम
बाल सुधार गृह में हालात यह हैं कि छोटी उम्र के जुवेनाइल जोकि चोरी, मारपीट या किसी अन्य अपराध के आरोपी हैं उनके बीच जघन्य अपराधों में शामिल जुवेनाइल को रखने के कारण ये जुवेनाइल छोटों को अपने दबाव में रखकर गलत काम करते हैं। इतना ही नहीं उनसे टॉयलेट तक साफ करवाई जाती है। ये छोटे जुवेनाइल इनके भय या मारपीट के डर से कुछ भी बता नहीं पाते। बाल सुधार गृह अंबाला में 40 नाबालिगों को रखने की क्षमता है लेकिन इसमें 53 को रखा जा रहा है। 53 में से करीब 8-9 ऐसे जुवेनाइल हैं जोकि जघन्य अपराधों में शामिल हैं और जिनकी उम्र 16 साल से ज्यादा है।
पैलेस ऑफ सेफ्टी में ही रखे जा सकते हैं ऐसे जुवेनाइल
16 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे नाबालिग जोकि हत्या, दुष्कर्म या डकैती जैसे जघन्य अपराधों में शामिल हैं उन्हें पैलेस ऑफ सेफ्टी में ही रखने का प्रावधान है। लेकिन अंबाला में शायद जेजे एक्ट लागू नहीं होता। इसी कारण छोटे जुवेनाइलों के साथ जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिगों को रखा जा रहा है।
बाल सुधार गृह में जिन नाबालिगों ने हमारे साथ मारपीट की उनमें दो हत्या और डकैती जैसे अपराधों के आरोपी हैं। बाल सुधार गृह में हर बुधवार को कोर्ट लगती है। कोर्ट के चलते हम व्यवस्था बनाने के लिए बैरग में गए थे। इसका फायदा उठाकर हमें कैरम बोर्ड से पीटा गया। बड़े जुवेनाइल अकसर यहां छोटों पर दबाव बनाकर उनके साथ गलत काम करते हैं और करवाते हैं। डर के चलते उन्हें ऐसा करना पड़ता है। यदि नहीं करते तो उन्हें बैरग में ले जाकर पीटा जाता है। अब हम किस मुंह से नौकरी पर आएं। हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। मेरा प्रशासन और सरकार से अनुरोध है कि यहां से जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। ताकि जो छोटी उम्र के नाबालिग हैं वह और कर्मचारी इनका शिकार न बनें। पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद है वहां भी चेक किया जा सकता है। इस बारे में मैं प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करूंगा।
अशोक सिंगला, वार्डर बाल सुधार गृह