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लोगों की जेब में जाएगा निगम का पैसा

Sun, 06 Oct 2013 01:32 AM IST
अमर उजाला, ब्यूरो
अमर उजाला, ब्यूरो Updated Sun, 06 Oct 2013 01:32 AM IST
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Corporation's money in people's pockets will
अंबाला में हरियाणा सरकार ने प्रापर्टी टैक्स में आम लोगों व कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। इनसे वसूले जाने वाला प्रापर्टी टैक्स 90 फीसदी तक कम हो जाएगा। सरकार के इस फैसले से जहां नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाले 1,81,712 आम लोगाें और कारोबारी परिवारों को राहत मिलेगी।
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मगर नगर निगम को करारी चपत लगने वाली है। इस फैसले से म्यूनिसिपल कारपोरशन अंबाला (एमसीए) को करीबन 5 करोड़ रुपये का झटका लगेगा। जिससे निगम की माली हालत और खराब हो जाएगी। इसी को लेकर एमसीए के अफसरों व कर्मचारियों की टेंशन बढ़ गई है।
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ऐसे मिलेगी लोगों को राहत
दरअसल, एमसीए के अंतर्गत रिहायशी व कारोबारी 1,81,712 इकाइयां ऐसी हैं, जिनसे नगर निगम हर साल 6 करोड़ रुपये से ज्यादा बतौर हाउस टैक्स (प्रॉपर्टी टैक्स) के वसूलती है, लेकिन हरियाणा सरकार ने इस प्रापर्टी टैक्स को 90 फीसदी तक कम कर दिया है। जिस वजह से लोगों को अब अपनी मकानों व दुकानों का बहुत कम प्रापर्टी टैक्स अदा करना पड़ेगा। लोगों की जेबों पर इससे काफी भार कम होगा।
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निगम को ऐसे लगेगी चपत
नगर निगम के सालाना बजट में प्रॉपर्टी टैक्स ही ऐसा टैक्स है, जो निगम की आय का सबसे बड़ा साधन है। दरअसल, नगर निगम सरकार की ऐसी संस्था है, जो खुद ही अपने स्टाफ का वेतन निकालती है। इस लिहाज प्रापर्टी टैक्स से होने वाली राजस्व आय निगम की सबसे बड़ी आय थी, लेकिन अब निगम को हर साल इसी मद में मिलने वाले 6 करोड़ से अधिक राशि पर 90 फीसदी की कैंची चल जाएगी और ये राशि बहुत कम रह जाएगी। इसी को लेकर निगम की आय में भारी कटौती होगी। निगम को हर साल इस फैसले से अपेक्षाकृत 5 करोड़ का फटका लगेगा। प्रॉपर्टी टैक्स के मामले में ये निगम को ये दूसरा बड़ा झटका है, क्योंकि पहले भी सरकार ने प्रापर्टी टैक्स के फार्मूले में इस दर को कम कर दिया था और अब फिर से अपेक्षाकृत 90 फीसदी और घटा दिया है।


इनको मिलेगी छूट
धार्मिक संपत्तियों, अनाथलायों, भिक्षु ग्रह, शमशान घाट, निकाय, कब्रिस्तान, धर्मशाला, राज्य सरकार की शिक्षण संस्थाओं व सरकारी अस्पतालों की प्रॉपर्टी, पूर्व सैनिकों, अर्ध सैनिक बलाें के आश्रितों के 300 वर्ग गज की संपत्ति, बशर्ते आश्रितों की पेंशन 1575 रुपये से कम हों, ऐसी संपत्तियां नए प्रापर्टी टैक्स के दायरे में नहीं आएंगे। बाकी रिहायशी व व्यवसायिक संपत्तियों पर टैक्स प्रापर्टी टैक्स की नई विभिन्न स्लैब के आधार पर लगेगा।



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