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एआई का भय दिखाकर उत्पाद बेचना चाह रहीं कंपनियां, कारोबारी न डरें : रितवन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2026 02:19 AM IST
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Companies are trying to sell products by showing the fear of AI, businessmen should not be afraid: Ritwan
अंबाला। हरियाणा चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री अंबाला चैप्टर ने शुक्रवार को औद्योगिक जागरूकता सत्र आयोजित किया। यह कार्यक्रम छावनी के रुकमणि देवी हाल में हुआ। कार्यक्रम में जर्मनी से विशेषज्ञ वक्ता रितवन पहुंचे। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के लीगेसी बिजनेस में प्रयोग पर उद्योग संचालकों को व्याख्यान दिया। उन्होंने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि एआई के क्षेत्र में आ रहीं कंपनियां डर दिखाकर अपना उत्पाद बेचने के लिए माहौल बना रही हैं। परंपरागत उद्योग संचालित करने वाले लोग इससे बिल्कुल भी न डरें। उन्होंने कहा कि एआई कुछ काम को आसान कर सकता है मगर यह व्यापार में आपको जीत दिला दे ऐसा दावा नहीं किया जा सकता है। इसको लेकर उन्होंने कई तर्क भी दिए।
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गौरतलब है कि रितवन पुरस्कार विजेता एक लेखक हैं और पेरिस से मशीन लर्निंग की पढ़ाई भी कर चुके हैं। कार्यक्रम में हरियाणा चैम्बर ऑफ कॉमर्स अंबाला से सीए एडी गांधी, चेयरमैन डॉ आशावंत, सचिव आलोक सूद, कोषाध्यक्ष कमलजीत जैन आदि उपस्थित रहे।
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ऐतिहासिक आधार भी नहीं

विशेषज्ञ वक्ता रितवन ने बताया कि टेक्नॉलोजी को लेकर कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है। पहले कंप्यूटर आया तो काम आसान हुआ मगर नौकरी करने वाले फिर भी चाहिए थे। इसी प्रकार ऑटोमेशन के युग में कुछ काम आसान जरूर हुआ है मगर अभी भी इस तकनीक पर पूरी निर्भरता नहीं है। ऐसे में यह बिल्कुल भी आकलन करना ठीक नहीं है कि एआई नौकरियां खा जाएगा। उद्योगों को अपने आप को अपग्रेड करना होगा।
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श्रम की तुलना में तकनीकें महंगी

रितवन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो अभी भी भारत में श्रम सस्ता है। जबकि तकनीकें काफी महंगी हैं। अगर कोई पूरी तरह से एआई में निवेश भी करता है तो वह बाजार में विजेता बन जाएंगे यह भी निश्चित नहीं है। क्योंकि बाजार एआई से तैयार उत्पादों से नहीं बल्कि उत्पाद में कितनी दम है इस पर निर्भर करेगा। कई कंपनियां ऑटोमेशन पर काम कर रही हैं मगर उनके उत्पाद फिर भी बाजार में नेतृत्व नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि आप किसी और की बनाई चीज का प्रयोग करेंगे तो हाल उस विश्वविद्यालय की तरह होगा जो हाल ही में एआई समिट में चर्चा में आ गया था। अब वह विश्वविद्यालय कोई भी अच्छा काम करे पर उसके काम को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। ऐसे में भरोसा टूटने की संभावना भी रहेगी।
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