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Ambala News: बिजली चोरी के मामले में सिविल कोर्ट का फैसला रद्द
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- जिला जज ने कहा- सिविल कोर्ट के पास इसमें सुनवाई का अधिकार नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। बिजली चोरी के मामलों में उपभोक्ताओं को राहत देने वाली सिविल अदालतों के क्षेत्राधिकार पर जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज वीरेंद्र मलिक की अदालत ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत (सिविल कोर्ट) के फैसले को रद्द कर दिया है इस फैसले में उपभोक्ता पर लगाए गए जुर्माने को शून्य घोषित किया गया था।
जिला जज वीरेंद्र मलिक ने अपने फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के महेश कुमार बनाम एसडीओ मामले का विशेष जिक्र किया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि बिजली अधिनियम 2003 में चोरी की धारा 135 और धारा 126 के तहत आने वाले मामलों में सिविल कोर्ट का क्षेत्राधिकार पूरी तरह वर्जित है। अदालत ने निचली अदालत के न्यायाधीश को आदेश दिया है कि वे मूल वाद और दस्तावेज उपभोक्ता को लौटा दें जिससे वह इन्हें सक्षम फोरम के समक्ष पेश कर सकें।
यह था मामला
अंबाला सिटी के सेक्टर-10 निवासी बलबीर सिंह के घर पर साल 2019 में बिजली विभाग ने छापामारी की थी। विभाग का दावा था कि उपभोक्ता का मीटर और सीलें छेड़ी गई थीं। जो बिजली चोरी की श्रेणी में आता है। इसके आधार पर विभाग ने बलबीर सिंह पर 1,92,625 का जुर्माना और 20,000 कंपाउंडिंग फीस लगा दी थी। उपभोक्ता ने इस जुर्माने को सिविल कोर्ट में चुनौती दी थी। निचली अदालत ने 30 अगस्त 2024 को उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग की मांग को गलत बताया था। इसी फैसले के खिलाफ बिजली विभाग ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की थी।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। बिजली चोरी के मामलों में उपभोक्ताओं को राहत देने वाली सिविल अदालतों के क्षेत्राधिकार पर जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज वीरेंद्र मलिक की अदालत ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत (सिविल कोर्ट) के फैसले को रद्द कर दिया है इस फैसले में उपभोक्ता पर लगाए गए जुर्माने को शून्य घोषित किया गया था।
जिला जज वीरेंद्र मलिक ने अपने फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के महेश कुमार बनाम एसडीओ मामले का विशेष जिक्र किया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि बिजली अधिनियम 2003 में चोरी की धारा 135 और धारा 126 के तहत आने वाले मामलों में सिविल कोर्ट का क्षेत्राधिकार पूरी तरह वर्जित है। अदालत ने निचली अदालत के न्यायाधीश को आदेश दिया है कि वे मूल वाद और दस्तावेज उपभोक्ता को लौटा दें जिससे वह इन्हें सक्षम फोरम के समक्ष पेश कर सकें।
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यह था मामला
अंबाला सिटी के सेक्टर-10 निवासी बलबीर सिंह के घर पर साल 2019 में बिजली विभाग ने छापामारी की थी। विभाग का दावा था कि उपभोक्ता का मीटर और सीलें छेड़ी गई थीं। जो बिजली चोरी की श्रेणी में आता है। इसके आधार पर विभाग ने बलबीर सिंह पर 1,92,625 का जुर्माना और 20,000 कंपाउंडिंग फीस लगा दी थी। उपभोक्ता ने इस जुर्माने को सिविल कोर्ट में चुनौती दी थी। निचली अदालत ने 30 अगस्त 2024 को उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग की मांग को गलत बताया था। इसी फैसले के खिलाफ बिजली विभाग ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की थी।
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