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इंडियन ऑयल डिपो प्रकरण : नारेबाजी कर टैंकर संचालक बोले: हमारी लाशों पर होगी शिफ्टिंग
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इंडियन ऑयल पैट्रोलियम डिपू के बाहर टैंकर संचालकों को समझाती पुलिस
- फोटो : Ambala
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अंबाला। अंबाला-दिल्ली नेशनल हाईवे स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ( आईओसीएल) की शिफ्टिंग को लेकर भड़के टैंकर संचालकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। डिपो से टैंकर भरने का काम न मिलने मुख्य गेट पर एकजुट हुए संचालकों ने जमकर नारेबाजी की।
टैंकर संचालकों का कहना था कि अंबाला की जगह अधिकारी पानीपत से टैंकर भरने की बात कह रहे हैं। ऐसे में करीब पांच सौ टैंकर संचालकों व उनके परिवार पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं हुआ तो उनकी लाशों पर से होकर इंडियन ऑयल डिपो शिफ्ट होगा। प्रधान विनोद कुमार बोले कि राफेल की जो सौगात मिली है। अगर शिफ्टिंग होती है तो अंबाला में 35 मिनट की जगह पानीपत से साढ़े चार घंटे तो जालंधर से भी कई घंटों में तेल पहुंचेगा। सूचना मिलते ही पड़ाव थाना प्रभारी देवेंद्र मौके पर पहुंचे और जल्द ही संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने का आश्वासन देकर उन्हें लौटाया। करीब एक घंटे तक यह हंगामा चला।
चार माह से परेशानी झेल रहे टैंकर संचालक
अंबाला टैंकर यूनियन के प्रधान विनोद कुमार प्रजापति, रवि बिंदर, गुरशाद खान, विलसन, बलकार, नितेश, टोनी, करण, धर्म सिंह, राजकुमार, लाल सिंह, ओमप्रकाश, मलकीत सिंह, हरदीप सिंह, सुखविंदर सिंह, हरविंदर सिंह, संजीव, प्रवीण, दविन्द्र आदि ने बताया कि जीटी रोड पर इंडियन ऑयल डिपो पिछले 39 सालों से है यहां पर आज तक कोई घटना भी घटित नहीं हुई। गृहमंत्री के दबाव में आकर इंडियन ऑयल के अधिकारी उन्हें काम नहीं दे रहे हैं। पिछले 4 महीनों से इंडियन ऑयल में अपने टैंकर लेकर आने वाले ड्राइवर व मालिक सुबह से शाम खाली खड़े रहते है। हमें कोई काम नहीं दिया जा रहा।
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हिमाचल का काम ऊना तो अंबाला का पानीपत भेजा
प्रधान विनोद ने बताया कि अंबाला डिपो से जो टैंकर हिमाचल का काम करते थे वो सारा काम ऊना भेज दिया गया व जो अंबाला का काम था उसे पानीपत शिफ्ट कर दिया गया। पार्किंग की सुविधा न होने के कारण ही यहां से डिपो शिफ्ट किया जा रहा है जबकि इंडियन ऑयल के साथ में बहुत बड़ी पार्किंग है।
वायुसेना को आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण
देशभर में 115 टर्मिनल हैं। इनमें सेना और वायुसेना को ईंधन की आपूर्ति के लिहाज से अंबाला टर्मिनल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में डीजल व पेट्रोल की आपूर्ति यहीं से होती है। राज्य सरकार को भी इससे एक हजार करोड़ रुपये सालाना टैक्स के रूप में मिलता है। सालाना करीब एक लाख किलो लीटर तेल विभिन्न राज्यों, सेना और वायुसेना के लिए भी सप्लाई होता है। लेह लद्दाख में सेना को ईंधन की आपूर्ति यहीं से होती है।
फोटो- 72
पानीपत गए तो छोड़ना पड़ सकता है काम
भूपिंद्र का कहना था कि वह लंबे समय से टैंकर चला रहे हैं। कुछ माह के अंदर ही यहां से टैंकरों को भरने का काम अचानक कम कर दिया गया है। अगर पानीपत चले जाते हैं तो यह काम छोड़ना पड़ सकता है।
फोटो- 73
पंद्रह-पंद्रह दिन तक नहीं भरते टैंकर
नीतिश कुमार का कहना था कि दस साल से टैंकर से पेट्रोल की सप्लाई कर रहे हैं। अब काम पूरी तरह से खत्म हो चुका है। पंद्रह-पंद्रह दिन तक गाड़ी ही नहीं भरती। परिवार को गुजर बसर करना तक मुश्किल हो गया है। जल्द ही शिफ्टिंग पर रोक लगे।
अंबाला है सभी सुरक्षित डिपो
तलविंद्र सिंह ने कहा कि सभी डिपो में से अंबाला सबसे सुरक्षित डिपो में से एक है। करीब डेढ़ किलोमीटर तक पार्किंग की भी व्यवस्था है। अचानक से इतना बड़ा कदम उठाना का मतलब सैकड़ों परिवार के पेट पर लात मारना है।
हाईकोर्ट में चल रहा केस
कर्म सिंह ने कहा कि अभी तो हाईकोर्ट में केस भी चल रहा है और बाकायदा उन्होंने स्टे ले रखी है। जल्द ही उसकी तारीख भी है। उससे पहले ही आनन-फानन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
यहीं है कमाई का एकमात्र साधन
निर्मल सिंह ने कहा कि यह कमाई का एकमात्र साधन है। पूरा परिवार ही इस पर निर्भर है और यहीं नहीं चल रहा। यहां से डिपो भी शिफ्ट हो गया तो कमाई का जरिया ही खत्म हो जाएगा।
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टैंकर संचालकों का कहना था कि अंबाला की जगह अधिकारी पानीपत से टैंकर भरने की बात कह रहे हैं। ऐसे में करीब पांच सौ टैंकर संचालकों व उनके परिवार पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं हुआ तो उनकी लाशों पर से होकर इंडियन ऑयल डिपो शिफ्ट होगा। प्रधान विनोद कुमार बोले कि राफेल की जो सौगात मिली है। अगर शिफ्टिंग होती है तो अंबाला में 35 मिनट की जगह पानीपत से साढ़े चार घंटे तो जालंधर से भी कई घंटों में तेल पहुंचेगा। सूचना मिलते ही पड़ाव थाना प्रभारी देवेंद्र मौके पर पहुंचे और जल्द ही संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने का आश्वासन देकर उन्हें लौटाया। करीब एक घंटे तक यह हंगामा चला।
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चार माह से परेशानी झेल रहे टैंकर संचालक
अंबाला टैंकर यूनियन के प्रधान विनोद कुमार प्रजापति, रवि बिंदर, गुरशाद खान, विलसन, बलकार, नितेश, टोनी, करण, धर्म सिंह, राजकुमार, लाल सिंह, ओमप्रकाश, मलकीत सिंह, हरदीप सिंह, सुखविंदर सिंह, हरविंदर सिंह, संजीव, प्रवीण, दविन्द्र आदि ने बताया कि जीटी रोड पर इंडियन ऑयल डिपो पिछले 39 सालों से है यहां पर आज तक कोई घटना भी घटित नहीं हुई। गृहमंत्री के दबाव में आकर इंडियन ऑयल के अधिकारी उन्हें काम नहीं दे रहे हैं। पिछले 4 महीनों से इंडियन ऑयल में अपने टैंकर लेकर आने वाले ड्राइवर व मालिक सुबह से शाम खाली खड़े रहते है। हमें कोई काम नहीं दिया जा रहा।
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हिमाचल का काम ऊना तो अंबाला का पानीपत भेजा
प्रधान विनोद ने बताया कि अंबाला डिपो से जो टैंकर हिमाचल का काम करते थे वो सारा काम ऊना भेज दिया गया व जो अंबाला का काम था उसे पानीपत शिफ्ट कर दिया गया। पार्किंग की सुविधा न होने के कारण ही यहां से डिपो शिफ्ट किया जा रहा है जबकि इंडियन ऑयल के साथ में बहुत बड़ी पार्किंग है।
वायुसेना को आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण
देशभर में 115 टर्मिनल हैं। इनमें सेना और वायुसेना को ईंधन की आपूर्ति के लिहाज से अंबाला टर्मिनल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में डीजल व पेट्रोल की आपूर्ति यहीं से होती है। राज्य सरकार को भी इससे एक हजार करोड़ रुपये सालाना टैक्स के रूप में मिलता है। सालाना करीब एक लाख किलो लीटर तेल विभिन्न राज्यों, सेना और वायुसेना के लिए भी सप्लाई होता है। लेह लद्दाख में सेना को ईंधन की आपूर्ति यहीं से होती है।
फोटो- 72
पानीपत गए तो छोड़ना पड़ सकता है काम
भूपिंद्र का कहना था कि वह लंबे समय से टैंकर चला रहे हैं। कुछ माह के अंदर ही यहां से टैंकरों को भरने का काम अचानक कम कर दिया गया है। अगर पानीपत चले जाते हैं तो यह काम छोड़ना पड़ सकता है।
फोटो- 73
पंद्रह-पंद्रह दिन तक नहीं भरते टैंकर
नीतिश कुमार का कहना था कि दस साल से टैंकर से पेट्रोल की सप्लाई कर रहे हैं। अब काम पूरी तरह से खत्म हो चुका है। पंद्रह-पंद्रह दिन तक गाड़ी ही नहीं भरती। परिवार को गुजर बसर करना तक मुश्किल हो गया है। जल्द ही शिफ्टिंग पर रोक लगे।
अंबाला है सभी सुरक्षित डिपो
तलविंद्र सिंह ने कहा कि सभी डिपो में से अंबाला सबसे सुरक्षित डिपो में से एक है। करीब डेढ़ किलोमीटर तक पार्किंग की भी व्यवस्था है। अचानक से इतना बड़ा कदम उठाना का मतलब सैकड़ों परिवार के पेट पर लात मारना है।
हाईकोर्ट में चल रहा केस
कर्म सिंह ने कहा कि अभी तो हाईकोर्ट में केस भी चल रहा है और बाकायदा उन्होंने स्टे ले रखी है। जल्द ही उसकी तारीख भी है। उससे पहले ही आनन-फानन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
यहीं है कमाई का एकमात्र साधन
निर्मल सिंह ने कहा कि यह कमाई का एकमात्र साधन है। पूरा परिवार ही इस पर निर्भर है और यहीं नहीं चल रहा। यहां से डिपो भी शिफ्ट हो गया तो कमाई का जरिया ही खत्म हो जाएगा।