{"_id":"5d7fe6f28ebc3e93d62afeeb","slug":"civic-ambala-news-knl5348110","type":"story","status":"publish","title_hn":"जन्म के चंद घंटे के बाद नवजात को हमेशा के लिए छोड़ गई मां, अब गांव का सरपंच उठाएगा पूरा खर्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जन्म के चंद घंटे के बाद नवजात को हमेशा के लिए छोड़ गई मां, अब गांव का सरपंच उठाएगा पूरा खर्च
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबाला। बच्ची के जन्म के चंद घंटे बाद ही उसकी मां दुनिया से हमेशा के लिए छोड़ गई। पंजोखरा के झोपड़-पट्टी में रहने वाले परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा था और बच्ची भी बेसहारा हो गई थी। जब इसका पता गांव के सरपंच अमरजीत सिंह को लगा तो वह न सिर्फ परिवार के साथ खड़े हुए बल्कि बच्ची के इलाज और शिक्षा के खर्च की जिम्मेदारी उठा कर दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं।
दरअसल, पंजोखरा साहिब के पास कुछ झोपड़-पट्टी में कुछ परिवार रहते हैं जिसमें प्रसुता भी रहती थी। जब प्रसुता को लेबर पेन हुई तो उसके परिजन उसे इलाज के लिए छावनी के मोंगा अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन प्रसुता के अस्पताल पहुंचने से ब्लीडिंग ज्यादा हो गई थी। इसीलिए जैसे ही महिला ने बच्ची को जन्म दिया और उसके चंद घंटों के बाद दुनिया छोड़ दी। वह अपनी बच्ची को दूध तक नहीं दे पाई। जब गांव के सरपंच अमरजीत सिंह को पता चला तो वह अस्पताल पहुंच गए। सरपंच ने बच्ची की दो बड़ी जिम्मेदारियां उठाकर हौसला बढ़ाया। सरपंच अमरजीत सिंह के कहने पर ही बच्ची का नाम सिमरन रखा गया है। सरपंच अब बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएंगे और उसकी शिक्षा का भी बीड़ा उठाया है ताकि बच्ची पढ़ लिख कर कुछ बन सके। बच्ची परिवार के पास ही रहेगी और उसकी दोनों जिम्मेदारियां उठाएंगे। सरपंच के इस सराहनीय कदम के चलते वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। और यदि इसी तरह से यदि हर व्यक्ति अपने आसपास इसी तरह से जिम्मेदारी उठाएंगे तो सामाजिक स्तर पर हम मजबूत हो जाएंगे। इसी समाजिक सरोकार के चलते पंजोखरा साहिब के सरपंच चर्चा का विषय बने हुए हैं और उनके सराहनीय कदम की खूब प्रशंसा भी कर रहे हैं।
गोद लेने का रखा था परिजनों के सामने प्रस्ताव
बताया जा रहा है कि सरपंच अमरजीत सिंह ने बच्ची के परिजनों के समक्ष इस बच्ची को गोद लेने का प्रस्ताव भी रखा था। लेकिन परिजन इसके लिए सहमत नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वह बच्ची को खुद ही पालेंगे। तब जाकर सरपंच ने बच्ची के इलाज और उसकी पढ़ाई जब तक चलेगी उसका खर्च उठाने का जिम्मा उठाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, पंजोखरा साहिब के पास कुछ झोपड़-पट्टी में कुछ परिवार रहते हैं जिसमें प्रसुता भी रहती थी। जब प्रसुता को लेबर पेन हुई तो उसके परिजन उसे इलाज के लिए छावनी के मोंगा अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन प्रसुता के अस्पताल पहुंचने से ब्लीडिंग ज्यादा हो गई थी। इसीलिए जैसे ही महिला ने बच्ची को जन्म दिया और उसके चंद घंटों के बाद दुनिया छोड़ दी। वह अपनी बच्ची को दूध तक नहीं दे पाई। जब गांव के सरपंच अमरजीत सिंह को पता चला तो वह अस्पताल पहुंच गए। सरपंच ने बच्ची की दो बड़ी जिम्मेदारियां उठाकर हौसला बढ़ाया। सरपंच अमरजीत सिंह के कहने पर ही बच्ची का नाम सिमरन रखा गया है। सरपंच अब बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएंगे और उसकी शिक्षा का भी बीड़ा उठाया है ताकि बच्ची पढ़ लिख कर कुछ बन सके। बच्ची परिवार के पास ही रहेगी और उसकी दोनों जिम्मेदारियां उठाएंगे। सरपंच के इस सराहनीय कदम के चलते वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। और यदि इसी तरह से यदि हर व्यक्ति अपने आसपास इसी तरह से जिम्मेदारी उठाएंगे तो सामाजिक स्तर पर हम मजबूत हो जाएंगे। इसी समाजिक सरोकार के चलते पंजोखरा साहिब के सरपंच चर्चा का विषय बने हुए हैं और उनके सराहनीय कदम की खूब प्रशंसा भी कर रहे हैं।
विज्ञापन
गोद लेने का रखा था परिजनों के सामने प्रस्ताव
बताया जा रहा है कि सरपंच अमरजीत सिंह ने बच्ची के परिजनों के समक्ष इस बच्ची को गोद लेने का प्रस्ताव भी रखा था। लेकिन परिजन इसके लिए सहमत नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वह बच्ची को खुद ही पालेंगे। तब जाकर सरपंच ने बच्ची के इलाज और उसकी पढ़ाई जब तक चलेगी उसका खर्च उठाने का जिम्मा उठाया।
विज्ञापन