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द एसडी विद्या स्कूल को बंद कर, 2 हजार विद्यार्थियों को शिफ्ट करने के निर्देश
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अंबाला सिटी। जिले के प्रतिष्ठित स्कूलों में शामिल छावनी के द एसडी विद्या स्कूल को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निदेशक सेकेंडरी एजुकेशन ने इस बारे में स्कूल प्रबंधन के साथ, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रधान सचिव हरियाणा सरकार और शिकायतकर्ता पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन अंबाला छावनी के प्रधान अजय कुमार गुप्ता को ऑर्डर की प्रति भी जारी कर दी है। निदेशालय की इस कार्रवाई से जहां स्कूल प्रबंधन में हड़कंप की स्थिति है वहीं इस स्कूल में पढ़ रहे 2 हजार विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक भी अब असमंजस की स्थिति में हैं। क्योंकि निदेशालय ने इन सभी विद्यार्थियों को निकट के अन्य स्कूलों में शिफ्ट करने के आदेश भी पारित कर दिए हैं। पांच पेज के आर्डर में निदेशालय ने उन तमाम अनियमितताओं का जिक्र किया है जोकि स्कूल के खिलाफ पाई गई। बता दें कि करीब चार साल से निदेशालय के पास यह केस चल रहा था। वहीं स्कूल ने इस कार्रवाई को एकतरफा करार देते हुए कहा कि डायरेक्टर बलकार सिंह ने उन्हें सुनवाई का मौका ही नहीं दिया।
इसलिए उठाया निदेशालय ने कदम
शिक्षा विभाग और हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव को भेजे पत्र में निदेशालय ने बताया है कि स्कूल के खिलाफ शिकायतों का अंबार है। इसके अतिरिक्त स्कूल में विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के लिए स्कूल प्रबंधन को जांच में दोषी मानते हुए यह कदम उठाया है। इसमें स्कूल प्रबंधन ने अपने स्तर पर बिना किसी विभागीय अनुमति के 2012 में नाम बदलकर फर्जी बैंक अकाउंट खोलकर फीस एकत्रित करनी शुरू कर दी थी। जिसके विरुद्ध सुरेंद्र कुमार गोयल और पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अजय कुमार गुप्ता ने सीएम विंडो एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव के माध्यम से शिकायत दर्ज करवाई थी। उसपर कार्रवाई करते हुए शिक्षा निदेशालय ने जांच ज्वाइंट डायरेक्टर से करवाई। जांच में अधिकारी ने शिकायतकर्ता के आरोपों को सही मानते हुए स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी थी।
स्कूल ने 2012 में बिना किसी विभागीय अनुमति के अपने स्तर पर गैर कानूनी तरीके से नाम बदल दिया। इसके तीन साल बाद 2015 में तथ्यों को तोड़मरोड़ कर गुमराह करते हुए गैर कानूनी तरीके से नाम बदलने की अनुमति ली थी। उसपर निदेशालय ने कार्रवाई कर सराहनीय कार्य कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होने पर रोक लगाने का अच्छा प्रयास किया है।
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अजय कुमार गुप्ता, प्रधान,पेरेंट्स वेलफेयर एसो. अंबाला
डायरेक्टर बलकार सिंह के साथ हमारी कोई हियरिंग ही नहीं हुई। राकेश गुप्ता के साथ हमारी हियरिंग हुई थी। यह एकतरफा फैसला दिया गया है। इसकी हम एसीएस के पास अपील करेंगे। साल 2015 में हमें नाम बदलने की अनुमति मिल गई थी। इसके लिए प्रबंधन ने रेजुलेशन भी पास किया है। छावनी में कई एसडी के नाम से स्कूल चल रहे हैं इसीलिए हमने अपने स्कूल का नाम बदला था। हमारे पास सभी तरह की अनुमति है। हमने नाम बदलने के लिए पहले सीबीएसई फिर डीएससी में फार्म दो जमा करवाकर यह अनुमति ली है। नए आदेश हैरान करने वाले हैं जबकि हम स्कूल में शिक्षकों को सेवन पे कमीशन का लाभ दे रहे हैं 134ए के तहत 138 बच्चे पढ़ा रहे हैं। जो आदेश जारी हुए हैं उसमें किसी घपले का जिक्र नहीं है। महज एक नाम का विवाद बनाकर स्कूल की एनओसी व मान्यता को विड्रा करना बच्चों के भविष्य व रोजगार के साथ खिलवाड़ है।
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इसलिए उठाया निदेशालय ने कदम
शिक्षा विभाग और हरियाणा सरकार के प्रधान सचिव को भेजे पत्र में निदेशालय ने बताया है कि स्कूल के खिलाफ शिकायतों का अंबार है। इसके अतिरिक्त स्कूल में विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं के लिए स्कूल प्रबंधन को जांच में दोषी मानते हुए यह कदम उठाया है। इसमें स्कूल प्रबंधन ने अपने स्तर पर बिना किसी विभागीय अनुमति के 2012 में नाम बदलकर फर्जी बैंक अकाउंट खोलकर फीस एकत्रित करनी शुरू कर दी थी। जिसके विरुद्ध सुरेंद्र कुमार गोयल और पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अजय कुमार गुप्ता ने सीएम विंडो एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव के माध्यम से शिकायत दर्ज करवाई थी। उसपर कार्रवाई करते हुए शिक्षा निदेशालय ने जांच ज्वाइंट डायरेक्टर से करवाई। जांच में अधिकारी ने शिकायतकर्ता के आरोपों को सही मानते हुए स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी थी।
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स्कूल ने 2012 में बिना किसी विभागीय अनुमति के अपने स्तर पर गैर कानूनी तरीके से नाम बदल दिया। इसके तीन साल बाद 2015 में तथ्यों को तोड़मरोड़ कर गुमराह करते हुए गैर कानूनी तरीके से नाम बदलने की अनुमति ली थी। उसपर निदेशालय ने कार्रवाई कर सराहनीय कार्य कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होने पर रोक लगाने का अच्छा प्रयास किया है।
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अजय कुमार गुप्ता, प्रधान,पेरेंट्स वेलफेयर एसो. अंबाला
डायरेक्टर बलकार सिंह के साथ हमारी कोई हियरिंग ही नहीं हुई। राकेश गुप्ता के साथ हमारी हियरिंग हुई थी। यह एकतरफा फैसला दिया गया है। इसकी हम एसीएस के पास अपील करेंगे। साल 2015 में हमें नाम बदलने की अनुमति मिल गई थी। इसके लिए प्रबंधन ने रेजुलेशन भी पास किया है। छावनी में कई एसडी के नाम से स्कूल चल रहे हैं इसीलिए हमने अपने स्कूल का नाम बदला था। हमारे पास सभी तरह की अनुमति है। हमने नाम बदलने के लिए पहले सीबीएसई फिर डीएससी में फार्म दो जमा करवाकर यह अनुमति ली है। नए आदेश हैरान करने वाले हैं जबकि हम स्कूल में शिक्षकों को सेवन पे कमीशन का लाभ दे रहे हैं 134ए के तहत 138 बच्चे पढ़ा रहे हैं। जो आदेश जारी हुए हैं उसमें किसी घपले का जिक्र नहीं है। महज एक नाम का विवाद बनाकर स्कूल की एनओसी व मान्यता को विड्रा करना बच्चों के भविष्य व रोजगार के साथ खिलवाड़ है।