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Ambala News: अंतिम प्रक्रिया के पैसे नहीं मिलने की बात कह जीआरपी ने प्लेटफॉर्म से एक घंटे तक नहीं उठाया शव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:33 PM IST
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Citing the non-receipt of funds for the final rites, the GRP did not remove the body from the platform for an hour.
अंबाला। रेलवे परिसर और ट्रेनों में सफर के दौरान दम तोड़ने वाले यात्रियों के शव उठाने और अंतिम संस्कार के लिए मिलने वाली राशि को लेकर रेलवे अधिकारियों व जीआरपी के बीच तकरार पैदा हो रही है। मंगलवार को इस विवाद के कारण एक यात्री का शव एक घंटे से अधिक समय तक प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर पड़ा रहा। परिजनों के हंगामा करने और नाराजगी के बाद जब रेलवे अधिकारियों ने राशि जारी करने के निर्देश दिए, तब जाकर शव को उठाया जा सका।
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नियमानुसार, रेलवे परिसर या ट्रेनों में मृत पाए जाने वाले यात्रियों के शवों को उठाने, र्मार्चरी तक पहुंचाने और उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए रेलवे की ओर से जीआरपी को प्रति शव 5,000 रुपये की राशि दी जाती है। जीआरपी कर्मियों का आरोप है कि दिन-रात की मेहनत और तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बावजूद रेलवे अधिकारी उनके बिलों को बेवजह अटका देते हैं या रोक लेते हैं। इससे कर्मचारियों में रोष है।
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रेलवे अधिकारी बोले- पूरी जानकारी न होने के कारण फंस जाता है तकनीकी पेंच
दूसरी ओर अंबाला रेल मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक यशनजीत सिंह ने बताया कि कई मामलों में पूरी जानकारी या दस्तावेज समय पर उपलब्ध न होने और अज्ञात शवों के मामलों में अंजान होने का तकनीकी पेंच फंस जाता है। इस दौरान यह पता नहीं चल पाता कि शव रेलवे स्टेशन से नागरिक अस्पताल भेजा भी गया था या नहीं। इस कारण भुगतान प्रक्रिया में कई बार बाधा आ जाती है।
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कैथल के यात्री की सफर के दौरान हुई मौत
मंगलवार को ट्रेन नंबर 12919 के बी-4 कोच में सीट नंबर 34 पर कैथल निवासी मनोज कुमार (58) यात्रा कर रहे थे। उनके पास दिल्ली से अंबाला छावनी तक का रेल टिकट था। इससे आगे उन्हें दूसरी ट्रेन में जाना था। लेकिन बीच रास्ते सफर के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। ट्रेन लगभग 11:30 बजे जब कैंट रेलवे स्टेशन पहुंची और उन्हें स्टेशन पर उतारकर जब रेलवे डाॅक्टर ने जतिंदर ने जांचा, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। लेकिन रेलवे और जीआरपी में खींचतान के कारण लगभग सवा घंटे बाद 1:15 बजे शव को प्लेटफॉर्म से उठाया गया। इस दौरान मौके पर पहुंचे मृतक के परिजनों ने भी हंगामा किया और रेलवे सहित जीआरपी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

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वर्जन
यह एक बार की समस्या नहीं है। हमेशा ऐसा होता है। हमें जब नागरिक अस्पताल से संदेश मिलता है कि स्टेशन से आए किसी व्यक्ति की मौत हो गई है तो हम अस्पताल पहुंचकर शव को कब्जे में लेते हैं और पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई करते हैं। इसकी एवज में जब जानकारी को स्टेशन अधीक्षक के पास भेजा जाता है तो बेवजह मिलने वाली राशि को लटका देते हैं। इससे हमें अपनी जेब खर्च से आगामी कार्रवाई करनी पड़ती है।
- सुखबीर सिंह, जांच अधिकारी, जीआरपी, अंबाला
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