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बिना उपचार अस्पताल से लौटे मासूम और तीमारदार
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प्रतिदिन 100 से ज्यादा बच्चों की ओपीडी और सिक न्यू बोर्न यूनिट होने के बावजूद जिला अस्पताल में एक ही बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ पिछले तीन महीनों से सेवाएं दे रहे हैं। मंगलवार को वह भी रोहतक पीजीआई प्रशिक्षण पर चले गए। ऐसे में उपचार के लिए पहुंचे मरीज और तीमारदार भटकते नजर आए। मासूम बच्चों को गोद में उठाए कई माताओं को भी अस्पताल से बैरंग लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल में मंगलवार की सुबह नौ बजे के करीब हल्की बूंदाबांदी के बीच पर्ची कटवाने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी थी। लाइन इतनी लंबी हो चली थी कि मरीज व तीमारदारों की कतार बनाए गए शेड से बाहर जा चुकी थी। इस दौरान कई लोग अपने मासूम बच्चों को गोदी में उठाए कतार में खड़े रहे। इस दौरान बच्चों वाले डॉक्टर की पर्ची काटने से कर्मचारी ने इंकार कर दिया। साथ ही कहा कि बच्चों वाला कोई डाक्टर उपलब्ध नहीं है। परेशान परिजनों ने किसी अन्य डाक्टर की पर्ची बनाने की गुहार लगाई, लेकिन कर्मी ने इंकार कर दिया और इमरजेंसी में तैनात डाक्टर से दिखाने की बात कही। ऐसे में जिला अस्पताल से बड़ी संख्या में लोग बिना उपचार के ही वापस लौट गए। विदित हो कि जिला अस्पताल में कुल 4 पद बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत हैं, लेकिन तीन खाली होने के कारण एक ही सारा काम संभाल रहे हैं जो मंगलवार को प्रशिक्षण पर चले गए, जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
दो दिन और झेलनी पड़ेंगी दिक्कतें
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभज्योति प्रकाश वीरवार तक प्रशिक्षण पर ही रहेंगे। लिहाजा यहां आने वाले मरीजों को वीरवार तक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि अस्पताल में डॉ. शुभज्योति का कोई विकल्प नहीं है। हालांकि छावनी नागरिक अस्पताल में चार बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। ऐसे में इस अवधि में आपातकालीन मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल से छावनी नागरिक अस्पताल में भेजा जा सकता है।
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मेरे बच्चे को दो दिन से कान गले में दिक्कत हो रही है, इसीलिए आज छुट्टी लेकर बच्चे को लेकर दिखाने आया हूं। करीब एक घंटे तक कतार में पर्ची कटवाने के लिए खड़ा रहा, जब नंबर आया तो कर्मचारी कह रहा है कि आज तो डॉक्टर ही बाहर गए हुए हैं। ऐसे में अब हम कहां जाएं।
- रतन लाल
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मेरी बेटी के पेट में दर्द है, रात भर बेटी दर्द से तड़पती रही। आज सुबह 8 बजे से कतार में लगी हूं कि जल्दी से बेटी को डॉक्टर से जांच करवा कर दवा ले लूंगी। लेकिन खिड़की पर पहुंचते ही कर्मचारी ने पर्ची काटने से मना कर दिया। कहते हैं कि आज 12 नंबर वाले डॉक्टर नहीं मिलेंगे।
- कविता यादव।
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मेरी 7 माह की बेटी है, रात से उसे दस्त लग रही है। सुबह से आकर पर्ची कटवाने के लिए कतार में खड़ी रही। करीब डेढ़ घंटे कतार में लगने के बाद जब नंबर आया तो जवाब मिला कि आज तो डॉक्टर छुट्टी पर हैं। पर्ची नहीं बनेगी। ऐसे में अब गरीब लोग कहां जाएं। प्राइवेट में जाएं तो इतनी हमारी हैसियत नहीं है।
- पूजा।
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मेेरी 9 महीने की बेटी है जिसे दिखाने के लिए मैं यहां आई थी। कर्मचारी ने पर्ची काटने से मना कर दिया है, यह कहकर कि आज डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में विभाग को अगर पहले से पता था तो किसी अन्य डॉक्टर की ड्यूटी लगानी चाहिए थी।
- परमजीत कौर।
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मेेरी दो बेटियां हैं, जिनमें से एक तो अपाहिज है जिसका उपचार यहीं से चल रहा है। दूसरी को पेट में दिक्कत है, जिसको दिखाने के लिए मैं यहां आई थी। दूसरी बेटी की दवा भी लेनी थी, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। हम कहां जाएं? इस बात की जानकारी कोई नहीं दे रहा है। बिना डॉक्टर के तो दवा भी नहीं मिलेगी।
- सरिता।
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मेरे बच्चे को दौरे पड़ते हैं, इसीलिए दो दिन से बच्चा यहीं दाखिल है। डॉक्टर ने जांच के बाद दाखिल तो कर लिया था लेकिन उसके बाद देखने के लिए कोई नहीं आया। कह रहे हैं कि बच्चों वाले डॉक्टर बाहर गए हैं। ज्यादा दिक्कत होगी तो क्या नर्सें सब कुछ संभाल लेंगी।
- रजनी।
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तीसरी लहर के अंदेशे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शिशु रोग विशेषज्ञ को पीजीआई रोहतक में प्रशिक्षण के लिए भेजा है। शिशु रोग विशेषज्ञ समेत अंबाला से सात लोग इस प्रशिक्षण के लिए भेजे गए हैं। समस्या को दूर करने के लिए शिशु रोग विशेषज्ञों की नई भर्ती शुरू कर दी गई है।
--डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन
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जिला अस्पताल में मंगलवार की सुबह नौ बजे के करीब हल्की बूंदाबांदी के बीच पर्ची कटवाने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी थी। लाइन इतनी लंबी हो चली थी कि मरीज व तीमारदारों की कतार बनाए गए शेड से बाहर जा चुकी थी। इस दौरान कई लोग अपने मासूम बच्चों को गोदी में उठाए कतार में खड़े रहे। इस दौरान बच्चों वाले डॉक्टर की पर्ची काटने से कर्मचारी ने इंकार कर दिया। साथ ही कहा कि बच्चों वाला कोई डाक्टर उपलब्ध नहीं है। परेशान परिजनों ने किसी अन्य डाक्टर की पर्ची बनाने की गुहार लगाई, लेकिन कर्मी ने इंकार कर दिया और इमरजेंसी में तैनात डाक्टर से दिखाने की बात कही। ऐसे में जिला अस्पताल से बड़ी संख्या में लोग बिना उपचार के ही वापस लौट गए। विदित हो कि जिला अस्पताल में कुल 4 पद बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत हैं, लेकिन तीन खाली होने के कारण एक ही सारा काम संभाल रहे हैं जो मंगलवार को प्रशिक्षण पर चले गए, जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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दो दिन और झेलनी पड़ेंगी दिक्कतें
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभज्योति प्रकाश वीरवार तक प्रशिक्षण पर ही रहेंगे। लिहाजा यहां आने वाले मरीजों को वीरवार तक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि अस्पताल में डॉ. शुभज्योति का कोई विकल्प नहीं है। हालांकि छावनी नागरिक अस्पताल में चार बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। ऐसे में इस अवधि में आपातकालीन मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल से छावनी नागरिक अस्पताल में भेजा जा सकता है।
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मेरे बच्चे को दो दिन से कान गले में दिक्कत हो रही है, इसीलिए आज छुट्टी लेकर बच्चे को लेकर दिखाने आया हूं। करीब एक घंटे तक कतार में पर्ची कटवाने के लिए खड़ा रहा, जब नंबर आया तो कर्मचारी कह रहा है कि आज तो डॉक्टर ही बाहर गए हुए हैं। ऐसे में अब हम कहां जाएं।
- रतन लाल
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मेरी बेटी के पेट में दर्द है, रात भर बेटी दर्द से तड़पती रही। आज सुबह 8 बजे से कतार में लगी हूं कि जल्दी से बेटी को डॉक्टर से जांच करवा कर दवा ले लूंगी। लेकिन खिड़की पर पहुंचते ही कर्मचारी ने पर्ची काटने से मना कर दिया। कहते हैं कि आज 12 नंबर वाले डॉक्टर नहीं मिलेंगे।
- कविता यादव।
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मेरी 7 माह की बेटी है, रात से उसे दस्त लग रही है। सुबह से आकर पर्ची कटवाने के लिए कतार में खड़ी रही। करीब डेढ़ घंटे कतार में लगने के बाद जब नंबर आया तो जवाब मिला कि आज तो डॉक्टर छुट्टी पर हैं। पर्ची नहीं बनेगी। ऐसे में अब गरीब लोग कहां जाएं। प्राइवेट में जाएं तो इतनी हमारी हैसियत नहीं है।
- पूजा।
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मेेरी 9 महीने की बेटी है जिसे दिखाने के लिए मैं यहां आई थी। कर्मचारी ने पर्ची काटने से मना कर दिया है, यह कहकर कि आज डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में विभाग को अगर पहले से पता था तो किसी अन्य डॉक्टर की ड्यूटी लगानी चाहिए थी।
- परमजीत कौर।
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मेेरी दो बेटियां हैं, जिनमें से एक तो अपाहिज है जिसका उपचार यहीं से चल रहा है। दूसरी को पेट में दिक्कत है, जिसको दिखाने के लिए मैं यहां आई थी। दूसरी बेटी की दवा भी लेनी थी, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। हम कहां जाएं? इस बात की जानकारी कोई नहीं दे रहा है। बिना डॉक्टर के तो दवा भी नहीं मिलेगी।
- सरिता।
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मेरे बच्चे को दौरे पड़ते हैं, इसीलिए दो दिन से बच्चा यहीं दाखिल है। डॉक्टर ने जांच के बाद दाखिल तो कर लिया था लेकिन उसके बाद देखने के लिए कोई नहीं आया। कह रहे हैं कि बच्चों वाले डॉक्टर बाहर गए हैं। ज्यादा दिक्कत होगी तो क्या नर्सें सब कुछ संभाल लेंगी।
- रजनी।
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तीसरी लहर के अंदेशे को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शिशु रोग विशेषज्ञ को पीजीआई रोहतक में प्रशिक्षण के लिए भेजा है। शिशु रोग विशेषज्ञ समेत अंबाला से सात लोग इस प्रशिक्षण के लिए भेजे गए हैं। समस्या को दूर करने के लिए शिशु रोग विशेषज्ञों की नई भर्ती शुरू कर दी गई है।
--डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन