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सामा एसोसिएशन के सामा के चेयरमैन, भाजपा के स्तंभ ज्ञानचंद अग्रवाल नहीं रहे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2021 01:13 AM IST
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Chairman of Sama Gyanchand Agarwal is no more
ज्ञानचंद अग्रवाल की फाइल फोटो - फोटो : Ambala
साइंटिफिक ऑपरेटर्स एंड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन (सामा) के चेयरमैन व 28 साल लगातार प्रधान रहे ज्ञानचंद अग्रवाल (85) का बीमारी के चलते निधन हो गया है। ज्ञानचंद अग्रवाल सभा के पूर्व प्रधान और भाजपा पार्टी के स्तंभ माने जाते हैं। उनके निधन से अग्रवाल समाज, भाजपा कार्यकर्ताओं और साइंस उद्यमी वर्ग में शोक की लहर है।
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दोपहर को 12 बजे छावनी के रामबाग में हुए संस्कार के दौरान भारी संख्या में लोग कोविड की पालना करते हुए पहुंचे। इनमें न केवल अंबाला के लोग शामिल थे बल्कि आसपास के शहरों से भी लोग पहुंचे और परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में खड़े होकर उन्हें सांत्वना दी। अग्रवाल सभा के महासचिव राजीव अग्रवाल ने बताया कि करीब दो साल से उनकी तबीयत गिरने की वजह से खराब चल रही थी। कुछ समय पहले की किडनी ने काम करना भी बंद कर दिया था, जिस वजह से अब उनका देहांत हो गया।
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मंत्री विज के भाजपा वापसी के समय मंडल प्रधान थे ज्ञानचंद
सांइस कारोबारी होने के साथ-साथ राजनीति में भी ज्ञानचंद अग्रवाल की मजबूत पकड़ थी। 2001 से 2005 व 2008 से 2010 तक भाजपा के सदर मंडल प्रधान होने के नाते वह अंबाला में एक मजबूत स्तंभ थे। वर्ष 2009 में जब गृहमंत्री अनिल विज ने भाजपा में दोबारा एंट्री की थी, तो उस समय ज्ञानचंद ही अंबाला सदर मंडल प्रधान थे। पार्टी में दोबारा आने के बाद विज को वर्ष 2009 का विधानसभा चुनाव जितवाने में भी ज्ञानचंद अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई थी। अंबाला से ताल्लुक रखने वालीर पूर्व विदेश मंत्री रह चुकी सुषमा स्वराज के साथ भी उन्होंने लंबे समय तक काम किया है।
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राजीव अग्रवाल ने बताया कि उनका जीवन संघर्ष भरा रहा है। ज्ञानचंद 1947 में कुरुक्षेत्र के पास गांव भूसतला से अंबाला आए थे। यहां आकर पहले कपड़े के व्यापारी के पास काम किया। बाद में सन 1960 में उन्होंने साइंस उद्योग शुरू किया। अंबाला में बना चर्चित स्वास्तिक चौक उन्हीं की देन हैं।

उधर, ज्ञानचंद ने साइंस उद्योगों पर बढ़ाए वेट चार्ज के खिलाफ भी आवाज बुलंद कर एसोसिएशन के बैनर तले लंबे समय तक संघर्ष किया था। अंतत: सरकार को वेट चार्ज 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करना पड़ा। जिससे साइंस इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिली थी।
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