{"_id":"b09569c5029bda383f34a672361bf84c","slug":"carefull-about-your-health","type":"story","status":"publish","title_hn":"संभलकर! कहीं मिठाई का जायका बिगाड़ न दे सेहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संभलकर! कहीं मिठाई का जायका बिगाड़ न दे सेहत
अंबाला
Updated Fri, 18 Oct 2013 04:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबाला। इस त्योहारी सीजन पर मिठाई संभलकर खानी होगी, क्योंकि खोये का उत्पादन कम है और इसकी खपत त्योहारी सीजन में कहीं अधिक होगी।
ऐसी स्थिति में मिलावटी खोया बाजार में सप्लाई होने की पूरी आशंका है और त्योहारी सीजन में खोये से बनी मिठाइयों की डिमांड पूरी करने के लिए खोया माफिया भी सक्रिय होता दिखाई दे रहा है।
जिले में रोजाना दूध का उत्पादन करीब चार लाख किलो है। इन में जहां सोसाइटियां सप्लाई करती हैं, वहीं निजी तौर पर दोधी (दूध बेचने वाले) यह दूध सप्लाई करते हैं। लेकिन त्योहारी सीजन में दूध की डिमांड बढ़ जाती है और यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो जाता है।
ऐसी स्थिति में मिलावटी खोये की सप्लाई करने वाले सक्रिय हो जाते हैं ओर खोये की डिमांड पूरी करने के लिए यह मिलावटी खोया बाजार में उतार दिया जाता है।
एक किलो से 200 ग्राम खोया
कारोबारियों के मुताबिक एक किलो दूध से 150 से 200 ग्राम खोया ही निकल पाता है। यह भी तब संभव है, जब दूध में फुल फैट हो।
अब यदि चार लाख किलो दूध का उत्पादन सामान्य दिनों में रोजाना होता है, तो करीब 70 से 80 हजार किलो खोया ही जिला में रोजाना बन पायेगा, जो त्योहारी सीजन के लिहाज से काफी कम है। इस पर भी इस खोये को फ्रिज में निजी इस्तेमाल के लिए तो सप्ताह भर रख सकते हैं, लेकिन यदि व्यवायिक इस्तेमाल करना हो, तो यह ज्यादा दिनाें तक स्टोर भी नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
दो लाख किलो खोया चाहिए
जिला में हलवाइयों की संख्या करीब 450 है। करीब एक दर्जन मिठाइयां ऐसी हैं, जिनमें खोये का इस्तेमाल होता है। ऐसे में रोजाना औसतन करीब दो लाख किलो खोया इन हलवाइयों को चाहिए।
लेकिन वर्तमान में हलवाइयों पर औसतन 170 किलो खोया ही मिल रहा है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए मिलावटी खोया बाजार में उतारा जाता है।
कुछ मामले जो सामने आ चुके हैं
- कैंट रेलवे स्टेशन से नकली मिल्क केक की खेप निकली, जिसे पंजाब में काबू कर नष्ट कराया गया
- अंबाला में नकली मिल्क केक बनाने की फैक्टरी भी पकड़ी गई
- कैंट बस स्टैंड से करीब 50 बोरियां संदिग्ध खोये की पकड़ी गई थी
- इसी तरह कई मामले ऐसे सामने आए, जिसमें दूषित खोया नष्ट कराना पड़ा
- नारायणगढ़ में छापे के दौरान फफूंद लगी खोये की मिठाइयां नष्ट करवाई गई
‘खोये को यदि निजी इस्तेमाल के लिए रखना है, तो उसे भूनना पड़ेगा, जिससे वह फ्रिज में कई दिनों तक रह सकता है। यदि व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए खोया निकाला गया है, तो वह चार-पांच दिनों के बार खराब होना शुरु हो जाएगा। एक किलो दूध का पांचवा हिस्सा ही खोया निकलता है और वह भी तब, जब दूध में फुल फैट हो।’
- डा. उपासना सिंह
विज्ञापन
ऐसी स्थिति में मिलावटी खोया बाजार में सप्लाई होने की पूरी आशंका है और त्योहारी सीजन में खोये से बनी मिठाइयों की डिमांड पूरी करने के लिए खोया माफिया भी सक्रिय होता दिखाई दे रहा है।
जिले में रोजाना दूध का उत्पादन करीब चार लाख किलो है। इन में जहां सोसाइटियां सप्लाई करती हैं, वहीं निजी तौर पर दोधी (दूध बेचने वाले) यह दूध सप्लाई करते हैं। लेकिन त्योहारी सीजन में दूध की डिमांड बढ़ जाती है और यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो जाता है।
विज्ञापन
ऐसी स्थिति में मिलावटी खोये की सप्लाई करने वाले सक्रिय हो जाते हैं ओर खोये की डिमांड पूरी करने के लिए यह मिलावटी खोया बाजार में उतार दिया जाता है।
एक किलो से 200 ग्राम खोया
कारोबारियों के मुताबिक एक किलो दूध से 150 से 200 ग्राम खोया ही निकल पाता है। यह भी तब संभव है, जब दूध में फुल फैट हो।
अब यदि चार लाख किलो दूध का उत्पादन सामान्य दिनों में रोजाना होता है, तो करीब 70 से 80 हजार किलो खोया ही जिला में रोजाना बन पायेगा, जो त्योहारी सीजन के लिहाज से काफी कम है। इस पर भी इस खोये को फ्रिज में निजी इस्तेमाल के लिए तो सप्ताह भर रख सकते हैं, लेकिन यदि व्यवायिक इस्तेमाल करना हो, तो यह ज्यादा दिनाें तक स्टोर भी नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
दो लाख किलो खोया चाहिए
जिला में हलवाइयों की संख्या करीब 450 है। करीब एक दर्जन मिठाइयां ऐसी हैं, जिनमें खोये का इस्तेमाल होता है। ऐसे में रोजाना औसतन करीब दो लाख किलो खोया इन हलवाइयों को चाहिए।
लेकिन वर्तमान में हलवाइयों पर औसतन 170 किलो खोया ही मिल रहा है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए मिलावटी खोया बाजार में उतारा जाता है।
कुछ मामले जो सामने आ चुके हैं
- कैंट रेलवे स्टेशन से नकली मिल्क केक की खेप निकली, जिसे पंजाब में काबू कर नष्ट कराया गया
- अंबाला में नकली मिल्क केक बनाने की फैक्टरी भी पकड़ी गई
- कैंट बस स्टैंड से करीब 50 बोरियां संदिग्ध खोये की पकड़ी गई थी
- इसी तरह कई मामले ऐसे सामने आए, जिसमें दूषित खोया नष्ट कराना पड़ा
- नारायणगढ़ में छापे के दौरान फफूंद लगी खोये की मिठाइयां नष्ट करवाई गई
‘खोये को यदि निजी इस्तेमाल के लिए रखना है, तो उसे भूनना पड़ेगा, जिससे वह फ्रिज में कई दिनों तक रह सकता है। यदि व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए खोया निकाला गया है, तो वह चार-पांच दिनों के बार खराब होना शुरु हो जाएगा। एक किलो दूध का पांचवा हिस्सा ही खोया निकलता है और वह भी तब, जब दूध में फुल फैट हो।’
- डा. उपासना सिंह