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Ambala News: ट्रैफिक पुलिस की वर्दी से कैमरे गायब
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अंबाला। नियमों को तोड़ने और चालान के दौरान पुलिस से अभद्र व्यवहार करने वालों पर नजर रखने वाले सीसीटीवी ट्रैफिक पुलिस की वर्दी से गायब हो गए हैं। सालों पहले खरीदे इन कैमरों में से अधिकतर की बैटरी तो किसी में तकनीकी खराबी आ गई है।
ऐसे में जिलाभर से करीब 34 ऐसे कैमरों को मुख्यालय में रखवाया गया था। ऐसे में नए कैमरों के आने के बाद आचार संहिता रोड़ा बन गई है। पुराने जमा है और नए अभी तक नहीं मिल पाए है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस मुलाजिम बिना इन कैमरों के ही चालान करते हुए नजर आते हैं।
दरअसल, यह कैमरे ट्रैफिक पुलिस को काम को आसान करने के लिए लगाए गए थे, जिससे कि नियम तोड़ने वाले पुलिस मुलाजिमों से किसी तरह की बहस या फिर धौंस न दिखा सके। अक्सर देखा जाता था कि किसी भी वाहन चालक का चालान करते थे तो वो ट्रैफिक पुलिस के मुलाजिमों से ही उलझ जाता था।
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इस स्थिति में मुलाजिमों के पास अपने बचाव का कोई चारा नहीं होता था। कोई नियम तोड़ता था तो वो वीडियो फुटेज मौके पर रिकॉर्ड हो जाता था। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस के कामों में पारदर्शिता बढ़ाने व भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए यह कैमरे काफी मददगार साबित हो रहे थे। इसलिए जिलाभर में यह कैमरे दिए गए थे। जगह-जगह लगने वाले नाकों पर इनसे मदद मिल रही थी।
देर से मिली थी नए कैमरों की अनुमति
दरअसल, ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर लगे कैमरों में लंबे समय से दिक्कत आ रही थी। तभी से इसको लेकर मुख्यालय में पत्राचार चल रहा था लेकिन नए की अनुमति नहीं आ रही थी। विगत माह ही इसको लेकर अनुमति मिलने के बाद पुराने कैमरों को मुख्यालय में जमा करवाया गया था। आचार संहिता के चलते अभी मुलाजिमों को इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।
वर्जन
पुराने करीब 34 कैमरों को मुख्यालय में जमा करवा दिया गया था। आचार संहिता के बाद ही नए कैमरे आने की उम्मीद है। यह कैमरे चालान की कार्रवाई के दौरान काफी फायदेमंद साबित होते हैं।
जोगिंद्र, ट्रैफिक पुलिस प्रभारी अंबाला।
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ऐसे में जिलाभर से करीब 34 ऐसे कैमरों को मुख्यालय में रखवाया गया था। ऐसे में नए कैमरों के आने के बाद आचार संहिता रोड़ा बन गई है। पुराने जमा है और नए अभी तक नहीं मिल पाए है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस मुलाजिम बिना इन कैमरों के ही चालान करते हुए नजर आते हैं।
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दरअसल, यह कैमरे ट्रैफिक पुलिस को काम को आसान करने के लिए लगाए गए थे, जिससे कि नियम तोड़ने वाले पुलिस मुलाजिमों से किसी तरह की बहस या फिर धौंस न दिखा सके। अक्सर देखा जाता था कि किसी भी वाहन चालक का चालान करते थे तो वो ट्रैफिक पुलिस के मुलाजिमों से ही उलझ जाता था।
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इस स्थिति में मुलाजिमों के पास अपने बचाव का कोई चारा नहीं होता था। कोई नियम तोड़ता था तो वो वीडियो फुटेज मौके पर रिकॉर्ड हो जाता था। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस के कामों में पारदर्शिता बढ़ाने व भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए यह कैमरे काफी मददगार साबित हो रहे थे। इसलिए जिलाभर में यह कैमरे दिए गए थे। जगह-जगह लगने वाले नाकों पर इनसे मदद मिल रही थी।
देर से मिली थी नए कैमरों की अनुमति
दरअसल, ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों की वर्दी पर लगे कैमरों में लंबे समय से दिक्कत आ रही थी। तभी से इसको लेकर मुख्यालय में पत्राचार चल रहा था लेकिन नए की अनुमति नहीं आ रही थी। विगत माह ही इसको लेकर अनुमति मिलने के बाद पुराने कैमरों को मुख्यालय में जमा करवाया गया था। आचार संहिता के चलते अभी मुलाजिमों को इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।
वर्जन
पुराने करीब 34 कैमरों को मुख्यालय में जमा करवा दिया गया था। आचार संहिता के बाद ही नए कैमरे आने की उम्मीद है। यह कैमरे चालान की कार्रवाई के दौरान काफी फायदेमंद साबित होते हैं।
जोगिंद्र, ट्रैफिक पुलिस प्रभारी अंबाला।