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दावों से नहीं गोशालाओं की संख्या बढ़ाने से सड़कों से हटेगा गोवंश
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बराड़ा के मुख्य बाजार में सड़क पर बैठे बेसहारा पशु
- फोटो : Ambala
आशीष भारद्वाज
बराड़ा। प्रशासन के बड़े-बड़े दावे सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंशों के सामने छोटे नजर आते हैं। प्रशासन चार साल पहले बराड़ा की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंशों से मुक्त घोषित कर चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आज भी क्षेत्र की सड़कों पर काफी संख्या में बेसहारा गोवंश घूमते नजर आते हैं। यही नजारा बराड़ा के बाजार व कॉलोनियों की गलियों में भी देखने को मिलता है। इसके कारण वाहन चालक व स्थानीय लोग चोटिल भी होते हैं।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार गोशालाओं की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे तो बेसहारा घूम रहे गोवंशों से छुटकारा मिल सकता है। क्षेत्र के रोहित राणा, राजेश कुमार, बंसी लाल, पवन कुमार, बीरम सिंह, कर्म सिंह, लाभ सिंह, करतार चंद, सुखबीर सिंह, बलबीर, सोमनाथ व बलवान सिंह ने बताया कि बेसहारा गोवंशों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है। कई बार सड़क के बीच में घूम रहे गोवंश लड़ने लगते हैं, इससे वाहन चालकों व राहगीरों को चोटिल होने का डर लगा रहता है। प्रशासन इन्हें पकड़ने में नाकाम साबित हो रहा है।
वहीं मुलाना के गांव टंगैल स्थित नंदीशाला के प्रधान अनिल चड्ढा ने बताया कि 2017 में यह नंदीशाला बनाई गई थी। इस समय 400 से ज्यादा गोवंश नंदीशाला में हैं। यहां पर एक बार शेड डालने के लिए सरकार ने 10 लाख रुपये दिए थे। वहीं गोसेवा आयोग की ओर से 02 लाख 82 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद चारे के लिए कोई फंड नहीं मिला है। इसके कारण इतनी गायों के चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। यदि सरकार उन्हें फंड उपलब्ध कराए तो गोवंशों की देखभाल अच्छे ढंग से हो सकती है।
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फोटो नंबर 7
श्री गोविंद गोशाला बराड़ा के प्रधान राजेश सिंगला ने बताया कि बराड़ा गोशाला में इस समय 650 गोवंश हैं। इनके चारे के लिए केवल 2 से 3 लाख रुपये मिलते हैं। जोकि पर्याप्त नहीं है। गोशाला में समाज सेवकों व गो सेवकों के सहारे ही गोशाला में चारे इत्यादि की व्यवस्था होती है।
फोटो नंबर 8
गोरक्षा हिंदू दल के अध्यक्ष रोहित राणा उगाला का कहना है कि गाय जब दूध देने में असमर्थ हो जाती है तो लोग उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। यदि सरकार गोशालाओं पर ध्यान दे तो इनकी संख्या में कमी आ सकती है। गांव में गोचरान भूमि है, सरकार को उस पर गोशाला बनाने पर विचार करना चाहिए।
बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगा दिया गया है। जल्द ही बेसहारा पशुओं की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
-रिचा पाहवा, चेयरपर्सन, नपा बराड़ा।
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बराड़ा। प्रशासन के बड़े-बड़े दावे सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गोवंशों के सामने छोटे नजर आते हैं। प्रशासन चार साल पहले बराड़ा की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंशों से मुक्त घोषित कर चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आज भी क्षेत्र की सड़कों पर काफी संख्या में बेसहारा गोवंश घूमते नजर आते हैं। यही नजारा बराड़ा के बाजार व कॉलोनियों की गलियों में भी देखने को मिलता है। इसके कारण वाहन चालक व स्थानीय लोग चोटिल भी होते हैं।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार गोशालाओं की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे तो बेसहारा घूम रहे गोवंशों से छुटकारा मिल सकता है। क्षेत्र के रोहित राणा, राजेश कुमार, बंसी लाल, पवन कुमार, बीरम सिंह, कर्म सिंह, लाभ सिंह, करतार चंद, सुखबीर सिंह, बलबीर, सोमनाथ व बलवान सिंह ने बताया कि बेसहारा गोवंशों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है। कई बार सड़क के बीच में घूम रहे गोवंश लड़ने लगते हैं, इससे वाहन चालकों व राहगीरों को चोटिल होने का डर लगा रहता है। प्रशासन इन्हें पकड़ने में नाकाम साबित हो रहा है।
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वहीं मुलाना के गांव टंगैल स्थित नंदीशाला के प्रधान अनिल चड्ढा ने बताया कि 2017 में यह नंदीशाला बनाई गई थी। इस समय 400 से ज्यादा गोवंश नंदीशाला में हैं। यहां पर एक बार शेड डालने के लिए सरकार ने 10 लाख रुपये दिए थे। वहीं गोसेवा आयोग की ओर से 02 लाख 82 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद चारे के लिए कोई फंड नहीं मिला है। इसके कारण इतनी गायों के चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। यदि सरकार उन्हें फंड उपलब्ध कराए तो गोवंशों की देखभाल अच्छे ढंग से हो सकती है।
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फोटो नंबर 7
श्री गोविंद गोशाला बराड़ा के प्रधान राजेश सिंगला ने बताया कि बराड़ा गोशाला में इस समय 650 गोवंश हैं। इनके चारे के लिए केवल 2 से 3 लाख रुपये मिलते हैं। जोकि पर्याप्त नहीं है। गोशाला में समाज सेवकों व गो सेवकों के सहारे ही गोशाला में चारे इत्यादि की व्यवस्था होती है।
फोटो नंबर 8
गोरक्षा हिंदू दल के अध्यक्ष रोहित राणा उगाला का कहना है कि गाय जब दूध देने में असमर्थ हो जाती है तो लोग उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। यदि सरकार गोशालाओं पर ध्यान दे तो इनकी संख्या में कमी आ सकती है। गांव में गोचरान भूमि है, सरकार को उस पर गोशाला बनाने पर विचार करना चाहिए।
बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगा दिया गया है। जल्द ही बेसहारा पशुओं की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
-रिचा पाहवा, चेयरपर्सन, नपा बराड़ा।

बराड़ा में सड़क पर घूमते बेसहारा गाय- फोटो : Ambala