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नारकोटिक ब्यूरो का दवा निर्माताओं, वितरकों पर शिकंजा

Mon, 14 Apr 2014 12:01 AM IST
अमर उजाला,अंबाला
अमर उजाला,अंबाला Updated Mon, 14 Apr 2014 12:01 AM IST
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Bureau of Narcotic drug manufacturers, distributors screws
अंबाला कैंट। नारकोटिक ब्यूरो ने अब उन दवा वितरकों और निर्माताओं पर शिकंजा कसने की तैयारी की है, जो साइकोट्रॉफिक सबस्टेंस यानी नशीली दवाएं (जिनको चिकित्सक इलाज के दौरान मरीज को देता है) बनाते हैं या फिर उनका भारी मात्रा में वितरण करते हैं। इसके लिए होलसेलरों और निर्माताओं को नारकोटिक ब्यूरो के पास रजिस्टर्ड कराना होगा और हर तीन माह पर ऐसी दवाओं के निर्माण और वितरण का रिकॉर्ड देना होगा। नारकोटिक ब्यूरो अब ऐसी दवाओं पर सख्ती करने जा रहा है, जिनका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह पर मरीजों को दी जाती हैं। सूत्रों की मानें तो यह कदम साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस यानी नशीली दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाएगा। साथ ही इसके निर्माण और वितरण में होने वाली हेराफेरी पर भी लगाम लग सकेगी। इस तरह की दवाओं का डाटा फिलहाल पूरा नहीं है, जिसके चलते ब्यूरो ने यह कदम उठाया है। ब्यूरो द्वारा इसी को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है। जिसके तहत ऐसी दवाओं (साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस) का निर्माण करने और वितरण करने वालों को ब्यूरो के पास ऑनलाइन रजिस्ट्र्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद निर्माताओं और होलसेलरों को ऐसी दवाओं का प्रोडक्शन और वितरण (चाहे देश में बेची जाएं या फिर एक्सपोर्ट हों) का पूरा ब्योरा हर तीन माह में देना होगा।
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यह होगा फायदा
ऐसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सक ऐसे मरीजों के लिए करते हैं, जिनको इसकी जरूरत होती है, लेकिन यह भी चिकित्सक एक खास डोज़ के तौर पर ही देते हैं। लेकिन इन दवाआें का इस्तेमाल नशे के तौर पर सबसे अधिक हो रहा है। ऐसे में पता ही नहीं चलता कि यह दवाएं कौन इस्तेमाल कर रहा है और किसकी प्रिस्क्रिप्शन पर दी जा रही हैं। इसी को लेकर नारकोटिक ब्यूरो ने यह कदम उठाया है।
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रिकॉर्ड नहीं दिया तो कार्रवाई
नारकोटिक ब्यूरो के पास रजिस्टर्ड होने के बाद इन दवा वितरकों और निर्माताओं को हर तीन माह बाद अपनी रिपोर्ट देनी होगी। कितनी मात्रा में दवा का निर्माण हुआ और वितरक ने इसे कहां पर सेल किया है। यदि यह रिपोर्ट नहीं दी जाती, तो ब्यूरो ऐसे दवा वितरकों और निर्माताओं पर कार्रवाई भी करेगा।
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सेंट्रल नारकोटिक ब्यूरो ने दवा निर्माताओं और वितरकों को रजिस्ट्रेशन करावने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके बाद इन दोनों को हर तीन माह पर अपनी रिपोर्ट देनी होगी, जबकि साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस के सेल और परचेज की जानकारी भी विभाग के पास होगी।
- रिपन मेहता, सीनियर ड्रग कंट्रोलर, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग 
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