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Ambala News: सुषमा स्वराज बस अड्डे पर शौचालयों के टूटे पड़े दरवाजे
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शहर स्थित सुषमा स्वराज बस अड्डे पर महिला शौचालय के टूटे दरवाजे। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। शहर स्थित सुषमा स्वराज बस अड्डा परिसर में पिछले छह महीनों से शौचालयों की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। यहां आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और दिव्यांगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भूतल से लेकर प्रथम तल तक बने महिला शौचालयों के दरवाजे टूटे पड़े हैं, वहीं छतों की फॉल्स सीलिंग उखड़कर नीचे गिर रही है।
इनमें सबसे बदतर स्थिति दिव्यांगों के लिए बनाए गए शौचालयों की है। दिव्यांग शौचालय का दरवाजा टूटा होने के कारण विशेष आवश्यकता वाले लोगों को इसका इस्तेमाल करने में असुविधा हो रही है। निजता और सुरक्षा के अभाव में कई बार यात्रियों को बिना सुविधा का उपयोग किए ही लौटना पड़ता है।
अंबाला सिटी के इस आधुनिक बस अड्डे का निर्माण वर्ष 2018 में लगभग 18 करोड़ रुपये से करवाया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की स्मृति में इसका नाम बदलकर सुषमा स्वराज बस अड्डा रख दिया था। करोड़ों की लागत से बनी इस बहुमंजिला इमारत की नियमित देखभाल न होने के कारण इसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
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महिलाओं को हो रही असहजता
सुनीता देवी ने बताया कि बस अड्डे पर महिलाओं के लिए बने शौचालय के दरवाजे तक टूटे हुए हैं और फाॅल्स सीलिंग गिर रही है। यहां आने वाली महिलाओं को असहजता और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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दिव्यांग शौचालयों का उपयोग करना मुश्किल
छावनी निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि करोड़ों खर्च करके बस अड्डा तो बना दिया, लेकिन दिव्यांगों के लिए जो शौचालय बनाए गए हैं, उनके दरवाजे तक टूटे पड़े हैं। इस हाल में हमारे लिए इनका उपयोग करना बेहद मुश्किल है।
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बस अड्डे पर महिला और दिव्यांगों के टूटे दरवाजों की मरम्मत करवाने के लिए महाप्रबंधक अश्वनी डोगरा को पत्र लिखा हुआ है।
- सत्यावान, इंचार्ज, बस स्टैंड अंबाला सिटी।
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अंबाला सिटी। शहर स्थित सुषमा स्वराज बस अड्डा परिसर में पिछले छह महीनों से शौचालयों की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। यहां आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और दिव्यांगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भूतल से लेकर प्रथम तल तक बने महिला शौचालयों के दरवाजे टूटे पड़े हैं, वहीं छतों की फॉल्स सीलिंग उखड़कर नीचे गिर रही है।
इनमें सबसे बदतर स्थिति दिव्यांगों के लिए बनाए गए शौचालयों की है। दिव्यांग शौचालय का दरवाजा टूटा होने के कारण विशेष आवश्यकता वाले लोगों को इसका इस्तेमाल करने में असुविधा हो रही है। निजता और सुरक्षा के अभाव में कई बार यात्रियों को बिना सुविधा का उपयोग किए ही लौटना पड़ता है।
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अंबाला सिटी के इस आधुनिक बस अड्डे का निर्माण वर्ष 2018 में लगभग 18 करोड़ रुपये से करवाया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की स्मृति में इसका नाम बदलकर सुषमा स्वराज बस अड्डा रख दिया था। करोड़ों की लागत से बनी इस बहुमंजिला इमारत की नियमित देखभाल न होने के कारण इसकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
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महिलाओं को हो रही असहजता
सुनीता देवी ने बताया कि बस अड्डे पर महिलाओं के लिए बने शौचालय के दरवाजे तक टूटे हुए हैं और फाॅल्स सीलिंग गिर रही है। यहां आने वाली महिलाओं को असहजता और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दिव्यांग शौचालयों का उपयोग करना मुश्किल
छावनी निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि करोड़ों खर्च करके बस अड्डा तो बना दिया, लेकिन दिव्यांगों के लिए जो शौचालय बनाए गए हैं, उनके दरवाजे तक टूटे पड़े हैं। इस हाल में हमारे लिए इनका उपयोग करना बेहद मुश्किल है।
बस अड्डे पर महिला और दिव्यांगों के टूटे दरवाजों की मरम्मत करवाने के लिए महाप्रबंधक अश्वनी डोगरा को पत्र लिखा हुआ है।
- सत्यावान, इंचार्ज, बस स्टैंड अंबाला सिटी।

शहर स्थित सुषमा स्वराज बस अड्डे पर महिला शौचालय के टूटे दरवाजे। संवाद