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Ambala News: बीपी-शुगर बन रही मरीजों में दिव्यांगता का कारण
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सीएमओ कार्यालय में बने मेडिकल ब्रांच में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंचे हुए मरीज। संवाद
अंबाला सिटी। बीपी और शुगर जैसी बीमारियां तनाव के साथ-साथ मरीजों में दिव्यांगता का भी कारण बन रही है। जिला अंबाला में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आ रहे मरीजों में 50 से 60 प्रतिशत मरीज सिर्फ स्ट्रोक के कारण दिव्यांग होने वाले मरीज ही हैं। वर्तमान में 4510 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें स्ट्रोक के कारण मरीज ऐसे हैं जो चलने- फिरने और अपने शरीर के हिस्सों को नियंत्रित करने में असमर्थ हैं। इनमे सबसे अधिक संख्या युवा मरीजों की है।
इसके बाद 20 से 30 प्रतिशत मरीज दुर्घटना और जन्मजात दिव्यांग आते हैं। जिला अंबाला में कुल 15000 मरीज दिव्यांग हैं। पहले के मुकाबले दिव्यांग मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण विभाग को अतिरिक्त व्हीलचेयर मंगवानी पड़ रही है।
पहले दो से तीन व्हीलचेयर की जरूरत होती थी अब मरीजों के लिए 10 व्हीलचेयर मंगवानी पड़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि खराब जीवन शैली इसका सबसे बड़ा कारण है। जीवन शैली बिगड़ने और खान- पान में नियंत्रण न होने से मरीज को शुगर और बीपी की समस्या हो जाती है।
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स्ट्रोक से दिव्यांग होने पर भी बनता है प्रमाण पत्र
स्ट्रोक के कारण दिव्यांग होने वाले मरीजों का भी प्रमाण पत्र बनाया जाता है। दिव्यांगता की प्रतिशतता पर ही मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। पेंशन लेने के लिए 60 प्रतिशत दिव्यांगता होनी चाहिए। इसके अलावा अन्य सेवाओं में छूट मिलती है।
रोजाना बढ़ रहे शुगर-बीपी के मरीज
जिले में बीपी और शुगर के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वर्तमान में जिला अंबाला में शुगर के मरीज 24870 हैं तो वहीं बीपी के 41463 मरीज हैं। सिटी नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब सात से आठ मरीज शुगर और 10 से 12 मरीज बीपी के नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीजों को अपनी बीमारी के बारे में जानकारी ही नहीं है। वहीं जिले में इस वर्ष अभी तक स्ट्रोक के 20 मरीज सामने आ चुके हैं।
वर्जन
स्ट्रोक के कारण होने वाली दिव्यांगता के मामले बढ़ते जा रही है। जिन मरीजों को अपनी बीपी और शुगर की जानकारी नहीं है उन्हें स्ट्रोक होने का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए 30 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को अपने बीपी और शुगर की जांच अवश्य करवानी चाहिए।
डॉ़ बलविंद्र कौर, डिप्टी सीएमओ, मेडिकल ब्रांच, अंबाला।
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इसके बाद 20 से 30 प्रतिशत मरीज दुर्घटना और जन्मजात दिव्यांग आते हैं। जिला अंबाला में कुल 15000 मरीज दिव्यांग हैं। पहले के मुकाबले दिव्यांग मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण विभाग को अतिरिक्त व्हीलचेयर मंगवानी पड़ रही है।
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पहले दो से तीन व्हीलचेयर की जरूरत होती थी अब मरीजों के लिए 10 व्हीलचेयर मंगवानी पड़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि खराब जीवन शैली इसका सबसे बड़ा कारण है। जीवन शैली बिगड़ने और खान- पान में नियंत्रण न होने से मरीज को शुगर और बीपी की समस्या हो जाती है।
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स्ट्रोक से दिव्यांग होने पर भी बनता है प्रमाण पत्र
स्ट्रोक के कारण दिव्यांग होने वाले मरीजों का भी प्रमाण पत्र बनाया जाता है। दिव्यांगता की प्रतिशतता पर ही मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। पेंशन लेने के लिए 60 प्रतिशत दिव्यांगता होनी चाहिए। इसके अलावा अन्य सेवाओं में छूट मिलती है।
रोजाना बढ़ रहे शुगर-बीपी के मरीज
जिले में बीपी और शुगर के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वर्तमान में जिला अंबाला में शुगर के मरीज 24870 हैं तो वहीं बीपी के 41463 मरीज हैं। सिटी नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब सात से आठ मरीज शुगर और 10 से 12 मरीज बीपी के नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीजों को अपनी बीमारी के बारे में जानकारी ही नहीं है। वहीं जिले में इस वर्ष अभी तक स्ट्रोक के 20 मरीज सामने आ चुके हैं।
वर्जन
स्ट्रोक के कारण होने वाली दिव्यांगता के मामले बढ़ते जा रही है। जिन मरीजों को अपनी बीपी और शुगर की जानकारी नहीं है उन्हें स्ट्रोक होने का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए 30 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को अपने बीपी और शुगर की जांच अवश्य करवानी चाहिए।
डॉ़ बलविंद्र कौर, डिप्टी सीएमओ, मेडिकल ब्रांच, अंबाला।