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Ambala News: दो साल से बॉक्सिंग रिंग को हॉल का इंतजार
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अंबाला। लाखों रुपये की लागत से खिलाड़ियों के लिए छावनी के वार हीरोज स्टेडियम के होस्टल में पड़ा एक बॉक्सिंग रिंग विभाग के अधिकारियों की अनदेखी की भेंट चढ़ गया है। हालांकि स्टेडियम में दो बॉक्सिंग रिंग है। एक तो ऑल वेदर स्वीमिंग पूल के ऊपर बने हॉल में लगा है और वहां पर महिला बॉक्सिंग कोच प्रशिक्षण देती है। जबकि 2021 में दूसरे कोच के लिए बॉक्सिंग रिंग आया था। उस समय हॉल न मिलने के कारण उसे होस्टल में ही खुले आसमान के नीचे रख दिया था। दो साल होने पर भी अभी तक एक हॉल कमरा नहीं मिल पाया है जहां पर लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए बॉक्सिंग रिंग को रखकर धूल-मिट्टी व बरसात से बचाया जा सके। स्थिति यह है कि जुगाड़ यानी तिरपाल के सहारे ही खिलाड़ी व कोच इस रिंग को खराब या उसके नुकसान होने से बचाते हुए नजर आते हैं। इतना ही नहीं अगर बरसात होती है तो उन्हें रिंग को छोड़ना पड़ता है। रोजाना जब तक धूप रिंग से हट नहीं जाती, तब तक खिलाड़ियों रिंग में नहीं उतर पाते। हमेशा रिंग में लगी लकड़ी व मैट पर फटने का भी डर रहता है। बता दें कि करीब 3 से 4 लाख रुपये में यह रिंग आता है।
रोजाना होता है बॉक्सिंग का प्रशिक्षण
होस्टल में रखे बॉक्सिंग रिंग की बात करें तो रोजाना करीब 100 बच्चे आकर बॉक्सिंग के गुर सीखते हैं। इनमें से कई खिलाड़ी इसी रिंग पर खेलकर कई मेडल हासिल कर चुके हैं। अक्सर खिलाड़ियों को एक बॉक्सिंग हॉल की कमी खलती है। हालांकि कई बार पत्राचार भी हो चुका है बावजूद अभी तक विभाग के अधिकारियों की तरफ से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
2021 में नया बॉक्सिंग रिंग आया था और वह होस्टल परिसर में ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं। धूप व बरसात से रिंग को बचाने के लिए तिरपाल का इस्तेमाल किया जाता है। आलाधिकारियों को डिमांड भेजी है और जल्द ही कुछ समाधान की उम्मीद है।
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-संजय, बॉक्सिंग कोच, छावनी वार हीरोज स्टेडियम
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रोजाना होता है बॉक्सिंग का प्रशिक्षण
होस्टल में रखे बॉक्सिंग रिंग की बात करें तो रोजाना करीब 100 बच्चे आकर बॉक्सिंग के गुर सीखते हैं। इनमें से कई खिलाड़ी इसी रिंग पर खेलकर कई मेडल हासिल कर चुके हैं। अक्सर खिलाड़ियों को एक बॉक्सिंग हॉल की कमी खलती है। हालांकि कई बार पत्राचार भी हो चुका है बावजूद अभी तक विभाग के अधिकारियों की तरफ से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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2021 में नया बॉक्सिंग रिंग आया था और वह होस्टल परिसर में ही खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं। धूप व बरसात से रिंग को बचाने के लिए तिरपाल का इस्तेमाल किया जाता है। आलाधिकारियों को डिमांड भेजी है और जल्द ही कुछ समाधान की उम्मीद है।
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-संजय, बॉक्सिंग कोच, छावनी वार हीरोज स्टेडियम