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ब्लैकमेलिंग : फीस दो वरना बैठने नहीं देंगे परीक्षा में
ambala
Updated Thu, 02 Mar 2017 12:06 AM IST
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शिक्षा नियमावली 134-ए के तहत दाखिला पाए बच्चों के अभिभावकों से प्राइवेट स्कूल संचालकों ने पूरे साल की फीस मांगनी शुरु कर दी है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि फीस नहीं दी जाती, तो फाइनल परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। इसी को लेकर निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के डीईईओ को पत्र जारी कर दिशा निर्देश दिए हैं। प्राइवेट स्कूलों के इस कदम के बाद जहां अभिभावकों में गुस्सा है, वहीं बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
निदेशक द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि जिन बच्चों को 134ए के तहत बच्चों को दाखिला दिया गया था, उन स्कूलों के प्राचार्य व प्रबंधक ऐसे बच्चों से 2016 में दिए दाखिले को लेकर 2016-17 सत्र की पूरी फीस मांग रहे हैं। इसके लिए बाकायदा नोटिस भी जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि ऐसे बच्चों के अभिभावक पूरी फीस जमा करवाएं, नहीं तो बच्चों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। इसी को लेकर अब अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। अभिभावकों की मानें, तो यदि परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाता, तो बच्चों के भविष्य पर असर पड़ेगा।
विवादों में रही है शिक्षा नियमावली 134-ए
सरकार द्वारा मेधावी बच्चों के लिए शुरु की गई शिक्षा नियमावली 134-ए शुरु से ही विवादों में रही है। निजी स्कूल संचालक जहां इसे लेकर अपनी मनमानी करते रहे, वहीं शिक्षा विभाग भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के बीच फुटबॉल बने रहे हैं। कई बार शिक्षा विभाग के पास भी इन स्कूलों द्वारा फीस मांगने की शिकायतें पहुंची, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
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कोई भी निजी स्कूल, जिसने 134ए के तहत बच्चों को एडमिशन दिया है, उनसे फीस नहीं मांग सकता और न ही परीक्षा देने से रोक सकता है। निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया है, जिसके बारे में सभी बीईओ को जानकारी दी गई है। यदि किसी को कोई दिक्कत आती है, तो वह बीईओ अथवा उनसे संपर्क कर सकता है। किसी भी बच्चे को परीक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। यदि कोई स्कूल मनमानी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला
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निदेशक द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि जिन बच्चों को 134ए के तहत बच्चों को दाखिला दिया गया था, उन स्कूलों के प्राचार्य व प्रबंधक ऐसे बच्चों से 2016 में दिए दाखिले को लेकर 2016-17 सत्र की पूरी फीस मांग रहे हैं। इसके लिए बाकायदा नोटिस भी जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि ऐसे बच्चों के अभिभावक पूरी फीस जमा करवाएं, नहीं तो बच्चों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। इसी को लेकर अब अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। अभिभावकों की मानें, तो यदि परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाता, तो बच्चों के भविष्य पर असर पड़ेगा।
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विवादों में रही है शिक्षा नियमावली 134-ए
सरकार द्वारा मेधावी बच्चों के लिए शुरु की गई शिक्षा नियमावली 134-ए शुरु से ही विवादों में रही है। निजी स्कूल संचालक जहां इसे लेकर अपनी मनमानी करते रहे, वहीं शिक्षा विभाग भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है। यही कारण है कि शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के बीच फुटबॉल बने रहे हैं। कई बार शिक्षा विभाग के पास भी इन स्कूलों द्वारा फीस मांगने की शिकायतें पहुंची, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
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कोई भी निजी स्कूल, जिसने 134ए के तहत बच्चों को एडमिशन दिया है, उनसे फीस नहीं मांग सकता और न ही परीक्षा देने से रोक सकता है। निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया है, जिसके बारे में सभी बीईओ को जानकारी दी गई है। यदि किसी को कोई दिक्कत आती है, तो वह बीईओ अथवा उनसे संपर्क कर सकता है। किसी भी बच्चे को परीक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। यदि कोई स्कूल मनमानी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला